काशी विश्वविद्यालय से ‘शास्त्री’ की उपाधि प्राप्त करने के बाद आजीवन कथावाचन और अध्यापन कार्य में रत रहे देवीराम शास्त्री को आज भी क्षेत्रीय लोग याद करते हैं।
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