
मथुरा। सिद्धपीठ श्री काली मन्दिर कैन्ट पर चल रहें चतुर्थ पंचकुंडीय सहस्त्र चंडी महायज्ञ के पाचवें दिन भी भारी सर्दी के बावजूद भी यज्ञ स्थल का परिक्रमा करने वालों का ताता लगा रहा। यजमानों ने वेदमंत्रों के साथ आहूतिया देकर विश्व शान्ति तथा यमुना शुद्धिकरण की भक्तों ने मनोकमान की। यज्ञाचार्य उपेन्द्र नाथ चतुर्वेदी व महन्त दिनेश चैबे ने कहा कि सनातन धर्म की विशेषता है कि जगत जननी माता परमेश्वरी देवी के रूप में जानी जाति है मातृ शक्ति देवी पूजा उपासना का श्रोत्र ऋग्वेद के दशवें मंडल का 125वाॅ सूक्त है इसमें आठ मंत्र है इसीलिए इसें देवीय सुक्त कहा जाता हैं। मार्कण्डेय ऋषि द्वारा मार्कण्डेय पुराण में श्री दुर्गा सप्तशति नामक पुस्तक में वर्णित किया गया हैं। आने वाली बाधाओं से बचाने के लिए माता चण्डी काली प्रधान रूप से पूजित है। इनकी पूजा करने से यजमान को मनोवांछित परिणाम की प्राप्त होती हैं। उन्होंने बताया कि अब तक दुर्गा सप्तशति के 660 पाठ हो चुके हैं। इसमें 35 सौं आहूतियों भक्तों द्वारा दी जा चुकी हैं। आहूति देने वालों में सुनीता नौहवार, नीलम सोलकी, प्रीति बंसल, पिकंी बसंल, सुषमा अग्रवाल, शीला गर्ग, विजया शर्मा, मधू जैन, ऋतु खंडेलवाल, रीता जैन, बन्दना चतुर्वेदी आदि थी।






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