सीवरमुक्त नदियों पर कोल्हापुर में मंथन

भारत विकास संगम में बजा बिगुल

मथुरा,

सीवरमुक्त नदियों को लेकर भारत विकास संगम के तत्वावधान में महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के अंतर्गत कनेरी क्षेत्र में 19 से 25 जनवरी के मध्य आयोजित भारतीय संस्कृति उत्सव में प्रदर्शित ‘नदियाँ छोड़ो, सीवर जोड़ो’ विषयक प्रदर्शनी एवं 20 जनवरी को हुए व्याख्यान में महाराष्ट्र समेत भारत की पवित्र नदियों में गिरते सीवरों पर रोष व्यक्त किया गया। संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष एवं ‘नदियां छोड़ो, सीवर जोड़ो’ आंदोलन के सूत्रधार डाॅ0 सुरेश चन्द्र शर्मा ने आरोप लगाया कि देश की हर नदी लगभग सीवर बनती जा रही है और सरकार वोट बैंक के चलते सिर्फ गंगा शु़िद्ध को फोकस कर रही है। जबकि गंगा को भी अन्य नदियों की तरह सीवर मुक्त करने की जरूरत है। मगर राजनीतिज्ञों और नदीशुद्धि माफियाओं के षडयंत्र के चलते गंगा-यमुना को सीवरमुक्त करने के बजाय शुद्ध करने का ढोंग रचा जा रहा है ताकि उनके घरों में धन की गंगा बहती रहे। बताया कि पिछले 28 वर्षों में लगभग 50 हजार करोड़ से भी ज्यादा रूपये गंगा-यमुना की सफाई पर खर्च हो चुके हैं और इस बीच दोनों नदियां शुद्ध होने के बजाय अशुद्ध ज्यादा हुई हैं। फिर भी वर्तमान सरकार मनमानी कर गंगाशुद्धि को बढ़ावा दे रही है।

आगे बताया कि कोल्हापुर से उद्गमित पंचगंगा नदी कई वर्षों से पूना शहर का सीवर समेटते हुए कृष्णा नदी को अशुद्ध कर रही है। इसी तरह नासिक क्षेत्र से गोदावरी भी तटीय शहरों की सीवरवाहिनी बनती जा रही है।

डाॅ0 शर्मा ने महाराष्ट्र की नदियों को सीवरमुक्त करने के लिए केन्द्र व राज्य सरकार से माँग की। चिंता जताई कि यदि राज्य सरकारों ने यदि अपने-अपने राज्यों की नदियों को सीवरमुक्त नहीं किया तो लोग विषाक्त जल से जल्द मरने शुरू हो जायेंगे। 

डाॅ0 शर्मा ने नदियों को जोड़ने के लिए वर्ष 2014 के बजट में घोषित 100 करोड़ रूपये की परियोजना को निरस्त करने की माँग की। बताया कि इस परियोजना के कार्यान्वन से देश की सभी नदियां जहरीली हो जायेंगी। चेतावनी दी कि सरकार ने नदियों को सीवरमुक्त करने से पहले उन्हें जोड़ने की पहल की तो उग्र आंदोलन किया जायेगा।

आंदोलन की भूमिका के बारे में ‘आस्था’ व ए बी पी समेत अन्य टी वी चैनलों को दिये गये साक्षात्कार में बताया कि सीवरमुक्त नदियों से पूर्व मथुरा में 27 अक्टूबर 2011 से यमुना मुक्ति आंदोलन से शुरूआत हुई थी जिसने आगे बढ़ते हुए 8 जून 2014 तक गंगा दशहरा पर्व पर देश की सारी नदियों को अपनी आगोश में समेेट लिया। आगे बताया कि आंदोलन को भरपूर जन समर्थन मिलने लगा है। जल्द ही लोग राज्य सरकारो समेत केन्द्र सरकार पर दबाव बनायेंगे।    


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