
वांछित सूचना न देना, अस्पष्ट या अपूर्ण देना, देरी से देना शासनादेश का उल्लंघन- गजेन्द्र यादव
कलैक्ट्रेट सभाकक्ष में वार्ता के दौरान राज्य सूचना आयुक्त उ0प्र0 गजेन्द्र यादव
मथुरा। राज्य सूचना आयुक्त उ0प्र0 गजेन्द्र यादव की अध्यक्षता में जनपद के जन सूचना अधिकारियों तथा प्रथम अपीलीय अधिकारियों के साथ एक आवश्यक बैठक कलेक्टेªट सभाकक्ष में सम्पन्न हुई। उन्होंने बैठक में प्रथम अपीलीय अधिकारियों एवं जन सूचना अधिकारियों के पास वर्ष 2014 माह दिसम्बर तक सूचना माॅंगने से सम्बन्धित कितने आवेदन पत्र प्राप्त हुए और उसमें कितने आवेदन पत्रों का निस्तारण जन सूचना अधिकारी द्वारा अपने स्तर से किया गया है, की विस्तार पूर्वक समीक्षा की गयी। उन्होंने जनपद के समस्त जन सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारियों द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के क्रियान्वयन के लिये क्या 2 व्यवस्था एवं प्रबन्ध अपने विभाग में किये गये है उनका विस्तृत विवरण के सम्बन्ध में जानकारी ली।
सूचना आयोग उ0प्र0 द्वारा जिन वादों में अभी तक अर्थदंड वसूली और क्षतिपूर्ति की कार्यवाही की गयी है उसके क्रियान्वयन की अद्यतन स्थिति क्या है। जन सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारियों को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्राप्त आवेदन पत्रों के निस्तारण के दौरान आने वाली समस्याओं कठिनाईयों के निस्तारण हेतु उनके प्रश्नों के समाधान मा0 आयुक्त महोदय द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि जनपद की किसी एक तहसील, कार्यालय बेसिक शिक्षा अधिकारी व कार्यालय जिलाधिकारी के जन सूचना प्रकोष्ठ में सूचना का अधिकार अधिनियिम 2005 के तहत प्राप्त आवेदनपत्रों का दर्ज रजिस्टर का अवलोकन किया, साथ ही जन सूचना अधिकारियों एवं प्रथम अपीलीय अधिकारियों के नेम प्लेट या बोर्ड या मोबाइल नम्बर अंकित है कि नहीं की भी विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने नोडल अधिकारी एवं प्रभारी जन सूचना अधिकारी सहित सभी विभागीय जन सूचना अधिकारियों को निर्देशित किया है कि माॅगी जा रही सभी सूचनायें आवेदक को समय से उपलब्ध करायी जायें। उन्होंने बताया कि सूचना का अधिनियम धारा 2005 के अनुसार राज्य सूचना आयोग का मूल उदद्ेश्य दंड देना नहीं बल्कि वादी को सूचना उपलब्ध कराना हैं। उन्होंने कहा कि वादी को सूचना उपलब्ध कराने की समय सीमा 30 दिन इसलिये तय की गयी है कि क्योंकि जन सूचना अधिकारी को किसी सूचना की रचना नहीं करनी है बल्कि आपके पास जो भी उपलब्ध सूचना है उसे वादी तक रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से उपलब्ध कराना है। यदि सूचना आपके कार्यालय से सम्बन्धित नहीं है तो भी उसमें विलम्ब न करके उससे सम्बन्धित कार्यालय को भिजवा दें ताकि वादी तक तय समय सीमा में सूचना पहुॅच सके। उन्होंने बताया कि यदि जन सूचना अधिकारी तथा प्रथम अपीलीय अधिकारी की शिथिलता के कारण वादी द्वितीय अपीलीय अधिकारी अर्थात राज्य सूचना आयोग तक अपना पक्ष रखता है तो आयोग को दडात्मक कार्यवाही करने का पूर्ण अधिकार है तथा यह कार्यवाही किसी विभाग की न होकर सम्बन्धित अधिकारी के व्यक्तिगत पक्ष से सम्बन्ध रखती है तथा जुर्माना भी उनके वेतन से वसूल किया जायेगा। उन्होंने स्पष्ट बताया कि किसी भी माॅंगी गयी सूचना को न देना, अस्पष्ट देना, पूर्ण न देना अथवा देरी से उपलब्ध कराना पूर्ण रूप से शासनादेश का उल्लंघन है। उन्होंने मथुरा जनपद के लंबित पड़े वादों की चर्चा करते हुए बताया कि राज्य सूचना आयोग में मथुरा जनपद के 568 वाद लंबित है जिसमें सबसे अधिक राजस्व 137, माध्यमिक शिक्षा 36, विद्युत 41, पुलिस विभाग 36, ग्राम विकास 47, नगर पालिका 43, पंचायती राज 17 तथा अन्य विभागों से सम्बन्धित वाद लंबित है। इन वादों में से 22 वादों में जन सूचना अधिकारी तथा प्रथम अपीलीय अधिकारी के खिलाफ दंड अधि रोपित किये जा चुके है। उन्होंने जनपदीय अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा है कि वे वादी द्वारा माॅगी गयी सूचनाओं को समय से उपलब्ध कराकर शिकायत का निस्तारण करें ताकि वादी को द्वितीय चरण अथवा न्यायालय की शरण न लेनी पड़े तथा अधिकारी स्वयं भी दंडात्मक कार्यवाही से बचे रहे। आयुक्त ने बैठक के पश्चात मीडिया बन्धुओं के साथ जन सूचना अधिकार विषय के सम्बन्ध में प्रेसवार्ता भी की। उन्होंने मीडिया को जन सूचना अधिकार से सम्बन्धित बहुत सी जानकारिया भी दी। इस अवसर पर नोडल अधिकारी जन सूचना अपर जिलाधिकारी कानून व्यवस्था सुरेन्द्र कुमार शर्मा, अपर जिलाधिकारी प्रशासन धीरेन्द्र प्रताप सिंह, नगर मजिस्टेªट हेमसिंह आदि जनपदीय जन सूचना अधिकारी उपस्थित थे।






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