सूर श्याम की पावन तपोभूमि में नृत्य और वादन के साथ गूंज उठा पद गायन

   

दो दिवसीय सूरदास संगीत समारोह कला, संगीत व साहित्य के मिलन के साथ सम्पन्न 

सूरदास संगीत समारोह में पद गायन करते जयपुर से आये कलाकार पं0 विजय शर्मा

सूरदास संगीत समारोह मे ओडि़सी नृत्य नाटिका की प्रस्तुति के दौरान भाव भंगिमा में कलाकारों का दल

गोवर्धन। भगवान कृष्ण की वात्सल्य लीलाओं के पद्य दिग्दर्शी महाकवि सूरदास जी की तपस्थली पारासौली में आयोजित दो दिवसीय अखिल भारतीय सूरदास संगीत समारोह का आज परम्परागत मयूर औैर दीपक नृत्य के बीच पदों के सुमधुर गायन के साथ समापन हो गया। समापन समारोह के मुख्यातिथि एवं कार्यक्रम के संयोजक पूरन प्रकाश कौशिक द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। समारोह में स्थानीय कलाकारों के साथ साथ जयपुर, मुम्बई से आये कलाकारों ने अपनी अनूठी प्रस्तुतियां देकर न सिर्फ संगीत और साहित्य के पुरोधा सूरदास जी को अपनी सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की बल्कि उपस्थित दर्शकों और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर गिरिराज तलहटी के चन्द्र सरोवर के तट की सुरम्य शोभा को पारलौकिक कर दिया। 

भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं और अलौकिक महारास की साक्षी रही पारासौली की पावन भूमि आज गद्य, पद्य की संगीतमय अनूठी प्रस्तुतियों से झंकृत हो उठी। श्री राधा कृष्ण सेवा समिति के तत्वाधान में विगत रोज आरम्भ हुए इस विशाल आयोजन में आज जनपद की कई हस्तियों के साथ साथ नृत्य, संगीत और साहित्य के कई पुरोधा भी इसमें शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ बृज के प्रसिद्ध गायक कलाकार मनोहर लाल शर्मा कामा वाले के सुपुत्र विजय शर्मा ने सूरदास की के पद चरण कमल बन्दोहरि राई से किया। कार्यक्रम में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जिसमें सूरदास संगीत सम्मान व्यक्तिगत राधेश्याम शर्मा को पखावज बादन पर वहीं सूरदास संगीत सम्मान संस्थागत श्रीपुष्टिय मार्गीय चूडामणि दीपभागवत ट्रस्ट को दिया गया। गो सेवा के लिए सूरदास ब्रज गौरव सम्मान सूरश्याम सेवा संस्थान को दिया गया। जिन्होंने कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति देकर तलहटी के सुरम्य वातावरण को मनमोहक और मनोहारी बना दिया। जयुपर से यहां आये पं0 विजय शर्मा ने पद गायन कर सूरदास के पदों को अपना नमन अर्पित किया तो मूल रूप से गोवर्धन निवासी मृम्बई से पधारी अन्तर्राष्ट्रीय कलाकार गीतांजलि शर्मा ने मयूर नृत्य की अलबेली प्रस्तुति से आभास कराया कि प्रथ्वी अभी भी कला और कलाकारो से सुसज्जित है। स्थानीय कलाकार पं0 राजेश शर्मा ने दीपक नृत्य की अदभुत प्रस्तुति से दर्शकों केा दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर कर दिया। इससे पूर्व भी वेणुनाद कला केन्द्र के देशी विदेशी कलाकारों ने ओड़सी नृत्य नाटिका के अभिनय से सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया। भारी संख्या में पहुंचे दर्शक और अतिथियों ने मुक्त कण्ठ से कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए अगली बार पुनः इसके आयोजन की मांग रखी। वहीं कार्यक्रम संयोजक पूरन प्रकाश कौशिक ने प्रतिवर्ष वृहद स्तर पर इसका आयोजन कर दुनिया भर की संगीत और साहित्य की कलाओं के यहां प्रदर्शन के अपने प्रयासों को दोहराया। उन्होंने अपने अंधेरे नेत्रों से ही पद्य साहित्य में वात्सल्य के कोने कोने को झंकृत कर देने वाले सूरदास जी की साधना स्थली में उनके विशाल कृतित्व को चिरस्मृत बना देने की सहयोगी लोगों से अपील की। कार्यक्रम में संयोजक पूरन प्रकाश कौशिक ने सभी अतिथियों का माला दुपटटा उढ़ा कर भव्य स्वागत सत्कार किया और प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को स्मृति चिन्ह व पुरूष्कार भेंट कर सम्मानित किया। अन्त में कार्यक्रम के संयोजक पूरन प्रकाश कौशिक ने सभी आगन्तुक अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राधाकृष्ण कौशिक ने की। इस मौके पर सूरश्याम सेवा संस्थान के महामंत्री रमेश चन्द्र शर्मा, प्रबन्धक देवेन्द्र शर्मा, डा0 विकास मिश्रा, खगुल भारद्वाज, ब्रम्हदत्त तिवारी उर्फ दीपक, गिर्राज मिष्ठान भण्डार के संचालक चा0 भगवान सिंह सैनी हलवाई समाजसेवी, जगदीश सुपानियां, केपी सिंह, गणेश पहलवान, गिरिधारी सेठी, दाऊदयाल शर्मा, सियाराम शर्मा, हरीबाबू कौशिक, मोहन सिंह पूर्व प्रधान, महादेव पाण्डेय, पंकज वर्मा आदि उपस्थित थे।


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