स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी : कल्‍पना से परे एक चमत्‍कार

महात्‍मा गांधी का नाम चाहे हमने सुना हो या बोला हो, इससे जुड़ा पहला शब्‍द जो हमारे दिमाग़ में आता है वह है ‘अहिंसा’। उसी तरह जब हम सरदार वल्‍लभभाई पटेल का नाम लेते हैं, तो हमारे दिमाग़ में जो शब्‍द उभरता है, वह है ‘लौह पुरुष’। 

इसी लौह पुरुष की गुजरात में विश्‍व की सबसे ऊंची प्रतिमा के निर्माण की योजना को 2014-15 के केंद्रीय बजट में ‘राष्‍ट्रीय योजना’ घोषित किया गया और इसके लिए केंद्र ने 200 करोड़ रुपये आवंटित किए। गुजरात सरकार ने इस प्रतिष्ठित संरचना के निर्माण के लिए पहले ही 500 करोड़ रुपये आवंटित किए हुए हैं। नर्मदा नदी के जल में खड़ी होने वाली यह प्रतिमा भारत में प्राचीनकाल से मौजूद सामाजिक-सांस्‍कृतिक विविधता के बावजूद भारतीयता एकता और राष्‍ट्र की इस एकता व एकजुटता के वाहक पुरुष के पुण्‍यस्‍मरण की प्रतीक है। इसीलिए भारत सरकार ने वल्‍लभभाई पटेल के जन्‍मदिवस 31 अक्‍टूबर को ‘राष्‍ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाने का निश्‍चय किया है।

भारत के लौह पुरुष को श्रद्धांजलिस्‍वरूप 182 मीटर ऊंची यह प्रतिष्ठित प्रतिमा, साधु-बेट द्वीप पर बनाई जा रही है, जो गुजरात के नर्मदा जि़ले में केवड़ि‍या में बने सरदार सरोवर बांध से लगभग 3.5 किलोमीटर दक्षिण में है। यह प्रेरक स्‍मारक स्‍थल, जो अपने में कई शिक्षण-मनोरंजन संघटकों को समेटे हुए है, नर्मदा नदी की ओर सतपुड़ा और विंध्‍याचल पर्वतश्रेणी, गुरुदेश्‍वर से घिरी, सरदार सरोवर बांध और केवड़ि‍या शहर के बीच स्थित है। इस भव्‍य स्‍मारक की महिमा इसकी सुरम्य पृष्‍ठभूमि से और बढ़ जाएगी। इसकी अद्भुत अवस्थिति पारिस्थितिक-पर्यटन और क्षेत्रिय विकास के लिए लाभकारी है।

‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्‍ट है। यह स्‍वतंत्रता के बाद लगभग 565 रियासतों के विखंडित समूहों की और भारतीय राज्‍य के निर्माण के पटेल के निष्‍कलंक कार्य का प्रतीक है। यह रक्‍तरंजित और दर्दनाक विभाजन के बाद अखंड भारत में तत्‍कालीन गृहमंत्री सरदार वल्‍लभभाई पटेल की अद्वितीय प्रशासनिक क्षमता और वीरता को श्रद्धांजलि के रूप में स्‍थापित  होगा। दुनियाभर के सैलानियों को भारत की खूबसूरती को सराहने के लिए पर्यटन को प्रोत्‍साहन देने और भारतीय एकता के प्रतीक पुरुष के अभिवादन में बिला शक सरदार जी की यह 182 मीटर ऊंची प्रतिमा एक अद्वितीय पहल है।

भारत के पहले गृहमंत्री सरदार वल्‍ल्‍भभाई पटेल की विश्‍व की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रिय परियोजना है, जिसके निर्माण का कार्यभार गुजरात सरकार ने अग्रणी इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो को सौंपा है। सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा के निर्माण की कुल लागत 2,979 करोड़ रुपये है, जो अभी तक इस परियोजना के लिए आवंटित कुल 700 करोड़ रुपये की धनराशि से बहुत अधिक है। लेकिन इसके एक राष्‍ट्रीय परियोजना घोषित होने के बाद सरकार द्वारा इसके त्‍वरित निर्माण और पर्याप्‍त वित्‍तपोषण को सुनिश्चित किया गया है।

गुजरात की मुख्‍यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने कहा कि ‘यह विशाल निर्माण कार्य 2,979 करोड़ रुपये की लागत से चार वर्षों में पूरा होगा। इसका निर्माण अनुबंध देश की अग्रणी इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो को दिया गया है।’ 1,347 करोड़ रुपये मुख्‍य प्रतिमा पर खर्च होंगे, 235 करोड़ रुपये प्रदर्शनी हॉल और सम्‍मेलन केंद्र पर खर्च होंगे, वहीं 83 करोड़ रुपये मुख्‍य जगह से स्‍मारक को जोड़ने वाले पुल के निर्माण पर खर्च होंगे और 657 करोड़ रुपये इसके पूरा होने के बाद 15 वर्ष तक इसकी संरचना के अनुरक्षण के लिए होंगे। 182 मीटर ऊंची ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’, जो न्‍यूयॉर्क की ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ लिबर्टी’ (93 मीटर) से आकार में दोगुनी है, भावी पीढ़ियों को प्रेरित करेगी। इस परियोजना में सरदार वल्‍लभभाई पटेल की जीवनी पर आधारित दृश्‍य-श्रव्‍य प्रस्‍तुति और एक प्रदर्शनी हॉल दुनियाभर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगे। 75,000 घन मीटर बजरी, 5,700 मेट्रिक टन इस्‍पात संरचना, 18,500 इस्‍पात छड़ें और 22,500 मेट्रिक टन पीतल इस परियोजना में इस्‍तेमाल होगा। इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है कि ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’ परियोजना नर्मदा जिले के आदिवासी क्षेत्र और पर्यटन क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा करेगी। 

इस परियोजना का शुभारंभ गुजरात के पूर्व मुख्‍यमंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्‍टूबर, 2013 को सरदार पटेल की जयन्‍ती पर किया था। मोदी ने ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’ के निर्माण हेतु लौह एकत्र करने के लिए देशस्‍तर पर अभियान की शुरुआत भी की थी और गुजरात सरकार का यह दावा है कि उसने राष्‍ट्र के लगभग सात लाख गांवों से लौह इकट्ठा कर लिया है।

वास्‍तव में यह गुजरात के लिए गौरव का क्षण है, कि उसकी धरती के एक नेता ने इस अभूतपूर्व ऊंचाई पर स्‍थापना का सम्‍मान प्राप्‍त किया है। इसमें आश्‍चर्य नहीं कि पूरे गुजरात ने इसके आगे अपना शीश नवाया है। लेकिन सरदार पटेल को गुजरात तक सीमित करना उनके कार्य का अनादर है। उनका कार्य, हालांकि एक राज्‍य से शुरू है, सारी सीमाओं को तेजी से पार करता हुआ पूरी दुनिया और पूरी मानवता पर अपना असर छोड़ता है। सरदार पटेल के शब्‍द पूरी दुनिया में गूंज रहे हैं, इसलिए इसे एक राष्‍ट्रीय योजना घोषित करना कोई आश्‍चर्य की बात नहीं है। हमें आशा है कि पूरी दुनिया वास्‍तव में इसे एक राष्‍ट्रीय परियोजना के रूप में देखेगी न कि राजनीतिक रूप में और प्रत्‍येक भारतीय इस पर नाज़ करेगा।

विश्‍व की सबसे बड़ी प्रतिमा की प्रस्‍तावित ऊंचाई न्‍यूयॉर्क की विश्‍व प्रसिद्ध ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ लिबर्टी’ से लगभग दोगुनी है और रियो डी जेनेरो की क्राइस्ट द रिडीमर की प्रतिमा से पांच गुना ऊंची है। यह सरदार सरोवर बांध से भी ऊंची है। यह प्रतिमा न तो अपने विहंगम आकार में गर्व का मान लिए हुए है, न ही यह शांत स्‍मारक के रूप में स्‍थापित होगी। बल्कि एक विशेष कार्य योजना द्वारा इसे एक जीवंत कार्य केंद्र बनाया जाएगा। ‘स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी’ न सिर्फ भारत के स्‍वतंत्रता आंदोलन को याद करने के लिए बनाया जा रहा है, बल्कि सरदार पटेल की एकता, देश-भक्ति, समावेशी विकास और सुशासन की दूरदर्शी विचारधारा को विकसित करना है।

यह स्‍मारक जल्‍दी ही एक पूरी तरह कार्यात्‍मक आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा जो लोगों को जोड़ेगा, स्‍वास्‍थ्‍य और शिक्षा सुविधाएं उपलब्‍ध कराएगा, क्षेत्र की आदिवासी आबादी के लिए विभिन्‍न विकासात्‍मक गतिविधियां चलाएगा। इस योजना के चलते, नर्मदा जिला में आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण होगा जो इस जिले के साथ-साथ राज्‍य के लिए भी लाभकारी होगा। आधुनिक बुनियादी ढांचा जिले में औद्योगिक विकास को आगे बढ़ाएगा। विभिन्‍न पर्यावरण अनुकूल उद्योग इस क्षेत्र में स्‍थापित किए जा सकते हैं, जो न सिर्फ आम आबादी को रोजगार उपलब्‍ध कराएंगे बल्कि उनके जीवन-स्‍तर को ऊंचा उठाने में मदद करेंगे। जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केन्द्र क्षेत्र में स्थापित कर रहे हैं, जिससे कृषि क्षेत्र में किसान भी लाभांवित होंगे। यह अंतिम नहीं है कि इस अद्भुत स्‍मारक की स्‍थापना से पर्यटन उद्योग को पुनर्जीवन मिलेगा।

सरकार इस स्‍मारक की विकास का जीवंत केंद्र के रूप में परिकल्‍पना कर रही है। हालांकि कुछ भागों में इस परियोजना की संसाधनों और धन का अपव्‍यय बताकर आलोचना की गई है, लेकिन इस योजना के पीछे छिपे उद्देश्‍यों को देखा जाए तो यह हमारे देश के विकास के लिए एक आधुनिक केंद्र के रूप में उभर कर आएगा। पूरा होने के बाद, यह प्रतिष्ठित स्‍मारक अवश्‍य ही दुनियाभर के पर्यटकों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों, बुद्धिजीवियों और शोधार्थियों को अपनी ओर आकर्षित करेगा और यह योजना विश्‍व में भारत की एक नई पहचान है। सरदार जी की जीजिविषा और इच्‍छाशक्ति की तरह, यह स्‍मारक दुनिया में बाकी मूक स्‍मारकों के पार एक जीवंत आर्थिक केंद्र होगा।


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