‘स्वच्छ भारत’ अब सपना नहीं...

ऐसे अनेक उदाहरण हैं जहां लड़कियों ने ऐसे घरों में शादी करने से मना कर दिया जहां शौचालय नहीं बने थे। इन सभी मामलों में महिलाएं ही आत्‍मसम्‍मान को कायम रखने के लिए नई भावना को जागृत करने में आगे रही हैं।

-महाराष्‍ट्र के वाशिम जिले के साईखेड़ा गांव की रहने वाली संगीता अहवाले ने अपने घर में शौचालय का निर्माण करवाने के लिए अपना मंगलसूत्र तक बेच दिया। 

-छत्‍तीसगढ़ जिले के धमतारी जिले में स्थित कोटाभारी गांव की 104 वर्ष आयु की वृद्धा कुंवर बाई ने अपने घर में शौचालय बनवाने के लिए अपनी ब‍करियां बेच दीं। 

-कोलारस ब्‍लॉक के गोपालपुरा गांव की आदिवासी नववधू प्रियंका अपनी ससुराल के घर में शौचालय न होने के कारण अपने माता-पिता के घर लौट आई। 

-आंध्रप्रदेश के गुंटुर जिले की एक मुस्लिम महिला ने अपनी नई पुत्रवधू को एक शौचालय उपहार में दिया। 

-स्‍कूल की छात्रा लावण्‍या तब तक भूख हड़ताल पर बैठी रही जब तक कर्नाटक स्थित उनके गांव हालनहल्‍ली के सभी 80 परिवारों में शौचालयों का निर्माण नहीं हो गया। 

स्‍वच्‍छ भारत की दिशा में आए बदलाव के इस भारी परिवर्तन की ये कुछ झलकियां ही हैं...


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