साल 2025 की आख़िरी सुबह है। सर्दियों की धुंध अब भी इंडस्ट्रियल एरिया पर छाई हुई है। जगन्नाथ अपनी छोटी-सी फैक्ट्री का शटर उठाते हैं। अंदर तेल, लोहे और पसीने की जानी-पहचानी गंध फैली है। एक तरफ़ दफ़्तर में कंप्यूटर और डिस्प्ले बोर्ड लगे हैं। घर पर उनकी पत्नी रजनी ने चाय का पानी चढ़ा दिया है। टिफ़िन बांधते हुए, बच्चों के स्कूल के संदेश देखते हुए और बुज़ुर्ग माता-पिता की देखभाल करते हुए वह धीमी आवाज़ में चल रही ख़बरें सुन रही है। अर्थव्यवस्था, तकनीक, एआई और भविष्य जैसे शब्द कमरे में तैरते हुए बड़े अच्छे लगते हैं।
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