बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

गांधी परिवार की रणनीति हमेशा यह रही है कि पार्टी का मुखिया कोई ऐसा व्यक्ति हो जो ‘काबू में’ रहे। वर्तमान अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इस सोच के लिए बिल्कुल मुफ़ीद साबित हुए हैं...

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बेंगलुरु एयरपोर्ट की चमकती रोशनियों के बीच, दो ज़िंदगियां एक ही सवाल से टकरा रहीं थीं—आख़िर उड़ानें रुकी क्यों...

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सुबह की गुलाबी रोशनी में महाराष्ट्र के सातारा ज़िले के एक छोटे से गांव की रोजमर्रा ज़िंदगी जगने लगती है, मुर्गों की बांग, पीतल के बर्तनों की खनक, और बरगद के पेड़ के नीचे बैठी आशा वर्कर संगीता, जिसने अपनी नीली दवाई-बक्शा खोलकर सामने फैला दी है। गन्ने के खेतों पर पड़ती धूप में वह औरतों के एक घेरे को समझा रही है कि जन्मों में फ़ासला रखना कैसे मां और बच्चे दोनों की ज़िंदगी बचाता है। कुछ औरतें बच्चों को गोद में लिए हैं, कुछ संकोच में ऐसे सवाल पूछ रही हैं जो शायद वे अपने शौहर के सामने कभी न पूछ पातीं। इस सादे से सुबह के दृश्य में भारत की असली आबादी-क्रांति दर्ज है, न फ़ाइलों में, न नारेबाज़ी में, बल्कि एक-एक आशा की सब्र, मोहब्बत, और इख़्तियार देने की कोशिश में...

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भारतीय इतिहास में संत सुधारकों ने गहन और जटिल आध्यात्मिक ज्ञान को जनसाधारण की भाषा में अनुवादित कर जनसंचार का एक अनोखा माध्यम विकसित किया। यह प्रक्रिया न केवल ज्ञान को सुलभ बनाती थी, बल्कि उसे लोकप्रिय बनाकर समाज में गहराई से स्थापित करती थी...

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एक अरसे के बाद, मैं अपने नाती को लेने स्कूल पहुंचा। छुट्टी में अभी वक्त था, सोचा कि एक चक्कर लगा लूं। तभी मोड़ पर 7–8 बच्चे दिखे। एक एलीट स्कूल के चकाचौंधभरे कॉरिडोर में उनकी भाषा सुनकर कान सुन्न पड़ गए। ‘जेन-जी’ की तेज़, कटी-कटी, इमोजी-टपकाती जुबान… और हर वाक्य में चार-अक्षरों की भीषण आग...

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बीते 28 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा फ़ैसला दिया है जिसने पूरे मुल्क को झकझोर दिया है। अदालत ने उस शख़्स की ज़मानत रद्द कर दी जिस पर शादी के महज़ चार महीने बाद ही बीवी को ज़हर देकर मारने का इल्ज़ाम है।

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