बीते 29 नवंबर को नागपुर बुक फेस्टिवल में बोलते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने महात्मा गांधी की किताब ‘हिंद स्वराज’ के एक विवादित वाक्य की आलोचना की। गांधी ने लिखा था कि भारत एक राष्ट्र के रूप में वास्तव में ब्रिटिश शासन के कारण ही उभरा...
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बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।
बीते 29 नवंबर को नागपुर बुक फेस्टिवल में बोलते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने महात्मा गांधी की किताब ‘हिंद स्वराज’ के एक विवादित वाक्य की आलोचना की। गांधी ने लिखा था कि भारत एक राष्ट्र के रूप में वास्तव में ब्रिटिश शासन के कारण ही उभरा...
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कर्नाटक इन दिनों किसी रियासत की तरह चल रहा है! नाश्ते की मेज़ पर मुख्यमंत्री और उनके डिप्टी इडली-वड़ा नहीं, बल्कि तख़्त की लड़ाई लड़ रहे हैं, धीमी गति की चाकू-छुरी वाली जंग की तरह, और दिल्ली का तथाकथित हाईकमान गलियारे में सहमा खड़ा है, महाभारत के धृतराष्ट्र जैसा हिचकिचाता हुआ...
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लहरिया सराय का 40 वर्षीय युवा राम सहाय रेलवे स्टेशन पर आज एक ऐसे दोराहे पर खड़ा है जहां उसका हर कदम आगे बढ़ता है तो कोई न कोई ताक़त उसे पीछे खींच लेती है। गांव की मिट्टी की सुगंध, और शहरी चकाचौंध के आकर्षण से जूझता यह शख्स हर भारतीय नागरिक की दुविधा का आईना बन चुका है...
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मध्य प्रदेश के एक गांव में, भोर की हल्की रोशनी में धान के खेतों पर फैली धुंध को चीरते हुए एक मोटरसाइकिल गुजरती है। पीछे बैठी किशोरी मोबाइल पर ऑनलाइन गाने सुन रही है, उसके कानों में ईयरफोन, और उसके सड़क किनारे गांव में अभी-अभी लगा नया 4जी टॉवर...
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ज़रा जाड़े की उस सुबह की कल्पना कीजिए, धुंध इतनी गाढ़ी कि ताज महल का सफ़ेद संगमरमर भी भूत-सा दिखने लगे। हवा में ऐसी सड़ांध कि सांस लेते ही सीने में जलन हो और ठीक ताज के पीछ, यमुना नदी, जिसने कभी मुग़लों का इतिहास देखा, आज ज़हरीले झाग का उबलता कब्रिस्तान बन चुकी है। ऐसा लगता है मानो ताज महल अपनी ही धीमी मौत का मातम मना रहा हो।
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एक तंग-सी कोठरी में 28 साल के रमेश की अम्मा आज भी शाम होते ही उसके स्कूटर की आहट सुनने को बेचैन रहती हैं। बस 11 महीने पहले उसकी शादी हुई थी। दीवारों पर अब भी वही चमकदार, कुछ हद तक दिखावटी शादी के फ़ोटोग्राफ़ मुस्कुरा रहे हैं, लेकिन उन तस्वीरों का वह नौजवान अब कहीं नहीं है। उसकी मौत ‘शादी से जुड़े मसले’ के तहत दर्ज हुई, एक ऐसा चौंकाने वाला तथ्य जिसमें 2023 में पहली बार मर्दों की खुदकुशियाँ औरतों से ज़्यादा हुईं।
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