बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भारत के प्रति हालिया रवैया, जिसमें टैरिफ बढ़ाने, दबाव बनाने और सौदों की भाषा में रिश्तों को परिभाषित करने की कोशिश शामिल है, एक नए साम्राज्यवादी दौर की आहट है। ट्रंप का विश्व व्यापार संगठन से विमुख होना और वैश्विक व्यापार के नियमों को धता बताते हुए ‘अमेरिका फर्स्ट’ के नाम पर आर्थिक धौंस का प्रयोग, बताता है कि अमेरिका अब मित्र नहीं, मालिक बनना चाहता है।

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आज के युवा पति, नीले प्लास्टिक ड्रम और सीमेंट के बोरों से डरते हैं, मानो ये कोई जानलेवा संकेत बन गए हों। वहीं, संयुक्त परिवारों की बुजुर्ग सासें अब शादी के बर्तन नहीं, ‘कटोरे’ इस डर से खरीद रही हैं कि बहू अब केवल रसोई तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसके इरादे कहीं और हैं।

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बॉलीवुड फिल्मों ने गोरेपन को लेकर इतनी भ्रांतियां पैदा कर दीं हैं कि हर दिन टनों फेयर एंड लवली क्रीमें खप जाती हैं। गोरे होने के चक्कर में तरह-तरह के नुस्खे आजमाए जाते हैं। "गोरे रंग पे न इतना गुमान कर," “गोरी तेरा गांव बड़ा प्यारा” जैसे गीत बनाए जाते हैं। सांवले रंग की वजह से बच्चों के नाम कालिया, कालीचरण, भूरा, आदि रखे जाते हैं। श्री कृष्ण भी मैय्या से पूछते हैं, “राधा क्यों गोरी, मैं क्यों काला?” सच में भारतीय समाज में रंग भेद का अभिशाप युगों से चल रहा है।

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संसद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का जोशीला भाषण जितने सवालों के जवाब देने आया था, उससे कहीं ज़्यादा प्रश्न खड़े कर गया। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' के बहाने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला, लेकिन क्या यह ‘हमला’ सरकार पर भारी पड़ा, या फिर उनकी अपनी समझदारी पर नए सवालिया निशान छोड़ गया...

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योगी आदित्यनाथ ने कामयाबी के झंडे गाड़ दिए हैं। आंकड़ों की समीक्षा से लगने लगा है कि 2025 का उत्तर प्रदेश उड़ान भरने को तैयार है। प्रदेश का बुलडोजर मॉडल क्राइम कंट्रोल के लिए कारगर हथियार साबित हुआ है। आज नहीं तो कल वर्तमान नेतृत्व नई पीढ़ी को जगह देगी। अगर यह सवाल पूछा जा रहा है कि मोदी के बाद कौन, तो इसमें गलत क्या है?

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चेन्नई शहर में, अचानक रास्ता पूछने के चक्कर में एक लैदर बेल्ट और बटुए बेचने वाले से टकराहट हुई। हमने गलतफहमी में उससे अंग्रेजी में जानकारी लेनी चाही, उसने हिंदी में बताया। बोली का लहजा कुछ जाना पहचाना सा लगने पर हमारा अगला सवाल था... कहां से हो? सकुचाते हुए वह बोला, “आगरा से हैं…”। “आगरा में कहां से?” “इटौरा के पास के गांव से…“ उसने बताया “निरे लौंडे” अपनी तरफ के यहां हैं...

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