बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

विपक्षी दलों के नेताओं की मानें तो भारत गर्त में जा रहा है। राहुल गांधी हर दिन मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते रहे हैं कि अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है। सही स्थिति क्या है, यह जानने के लिए साल 2015 से पूर्व और 2025 तक के आंकड़ों का विश्लेषण करने से पता लगता है कि तमाम दिक्कतों के बावजूद भारत की विकास यात्रा सही गति से सही दिशा की तरफ अग्रसर है...

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वाशिंगटन की राजनीतिक हवाएं एक बार फिर अप्रत्याशित रूप से बदल गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो भारत को अपना विश्वसनीय साझेदार बताने में पीछे नहीं हटते थे, ने अचानक भारतीय आयातों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी और भारत की अर्थव्यवस्था को ‘डेड इकॉनमी’ तक कह डाला।

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आज नदियां गंदी हो रही हैं, जंगल कट रहे हैं और जानवरों की कई नस्लें खत्म हो रही हैं। ऐसे में कृष्ण की शिक्षा हमें बताती है कि प्रकृति की देखभाल करना हमारी ज़िम्मेदारी है। जो पेड़, नदी और जानवरों की रक्षा करता है, वही असली भक्त है...

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साफ संकेत मिल रहे हैं कि ट्रंप टैरिफ झटकों ने भारत को नींद से जगा दिया है। आत्मसम्मान पर चोट लगी है और दोस्ती से विश्वास उठ गया है। सकारात्मक बात यह है कि स्वाबलंबन से एक नया भारत निर्माण होगा। जल्दी ही तमाम अमेरिकन ब्रांड और सेवाओं के विकल्प खोजे जाएंगे। जनता पार्टी के जॉर्ज फर्नांडिस ने कोका कोला को लात मारकर डबल सेवन कोल्ड ड्रिंक के लिए मार्केट खोला था। देश के हिंदूवादी संगठन और स्वदेशी आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता तुरंत सक्रिय हों और अमेरिका पर निर्भरता घटाने के अभियान में लग जाएं।

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गरीबी के खिलाफ जंग में मनरेगा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अगर 25 करोड़ लोग गरीबी की रेखा से ऊपर उठे हैं, तो ग्रामीण रोजगार योजनाओं ने इस क्रांति को सफल अंजाम दिया है, बेशक क्रियान्वयन बेहतर और भ्रष्टाचार मुक्त हो सकता था...

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कुछ तो हुआ है कि वॉशिंगटन के गलियारों में बेचैनी बढ़ गई है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद अमेरिका का चेहरा तमतमा गया है, और ट्रंप का गुस्सा उनके लगातार बयानों में झलक रहा है...

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