बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

1950 के दशक में भारत नवजात राज्यों का एक समूह था, जिसे इसके संस्थापक नेताओं के विचारों ने जोड़ा था, लेकिन यह विविधता, औपनिवेशिक घावों और खंडित पहचान के साथ संघर्ष कर रहा था...

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आगरा के पर्यावरणविदों और नदी कार्यकर्ताओं ने शहर की बिगड़ती हालत को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। ताजमहल के शहर में बजती यह खतरे की घंटी दरअसल पूरी दुनिया के सामने मौजूद पर्यावरणीय संकट की ओर इशारा करती है। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और अंधाधुंध विकास से धरती को बचाने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने की जरूरत है। 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई की शाम अपने 30 मिनट के भाषण में आतंकवाद के खिलाफ भविष्य की दृष्टि और संचालन रणनीति को स्पष्ट और दृढ़ संदेश के साथ प्रस्तुत किया। उनका यह भाषण न केवल प्रेरणादायक था, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति उनकी अटल प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। मोदी ने आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए ठोस कदमों और रणनीतिक दृष्टिकोण की बात की, जो देशवासियों में विश्वास जगाता है...

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भारत-पाक तनाव की धधकती पृष्ठभूमि में, पश्चिमी देशों की भारत-विरोधी मानसिकता अब कूटनीतिक मतभेद से कहीं आगे, न्याय और तर्क के साथ सरासर विश्वासघात में तब्दील हो गई है। एक जीवंत लोकतंत्र और दशकों से आतंकवाद का शिकार रहे भारत को पाकिस्तान जैसे राष्ट्र के समकक्ष खड़ा करना – जिसका इतिहास जिहादी तत्वों को पोषित करने का रहा है – एक घोर अन्याय है। यह तटस्थता नहीं, बल्कि शक्ति, पूर्वाग्रह और भारत के तेजी से बढ़ते कद को लेकर पश्चिम की बेचैनी का स्पष्ट प्रदर्शन है...

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सुप्रीम कोर्ट की सख़्त टिप्पणी और एनजीटी की चेतावनियां अब वक़्त की पुकार हैं। हरे-भरे पेड़ों की कटाई पर नकेल कसना ज़रूरी हो गया है। शहरों के सीने में धड़कते ये पेड़ अब कंक्रीट की हवस के शिकार हो रहे हैं। वृंदावन, आगरा, हैदराबाद और मैसूर जैसे ऐतिहासिक शहरों में, जहां हरियाली कभी इबादत थी, आज वही पेड़ इंसानी लालच की ज़द में हैं...

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भारत और पाकिस्तान की सीमाओं पर हाल ही में हुआ तथाकथित ‘युद्धविराम’ दक्षिण एशिया की राजनीति में एक महत्वपूर्ण क्षण है, जो शांति, व्यावहारिकता और समझदारी की जीत का प्रतीक है...

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