तमिलनाडु जैसे राज्यों के विरोध के बावजूद, पूरे भारत में हिंदी को अनिवार्य भाषा बनाने का विचार एक आवश्यक, दिलचस्प, लेकिन जोखिमभरा कदम है। चुनावी राजनीति को अलग रखते हुए, देखने में आ रहा है कि आज हिंदी और अंग्रेजी दोनों तेजी से आगे बढ़ रही हैं। वे लोग जो दोनों भाषाओं को समझते और बोलते हैं, हर जगह पाए जा सकते हैं।
Read More




