बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

तमिलनाडु जैसे राज्यों के विरोध के बावजूद, पूरे भारत में हिंदी को अनिवार्य भाषा बनाने का विचार एक आवश्यक, दिलचस्प, लेकिन जोखिमभरा कदम है। चुनावी राजनीति को अलग रखते हुए, देखने में आ रहा है कि आज हिंदी और अंग्रेजी दोनों तेजी से आगे बढ़ रही हैं। वे लोग जो दोनों भाषाओं को समझते और बोलते हैं, हर जगह पाए जा सकते हैं।

Read More

विपक्षी नेता और वामपंथी चिन्तक बेशक हाल ही में सम्पन्न हुए महाकुंभ मेले से प्रभावित न हुए हों, लेकिन प्रयागराज में महाकुंभ मेले के सफल समापन ने न केवल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कद बढ़ाया है, बल्कि भारत की परंपरा को आधुनिकता के साथ मिलाने की क्षमता को भी प्रदर्शित किया है।

Read More

ज़ेलेंस्की को एक ऐसे कुत्ते की तरह देखा गया, जो न घर का रहा न घाट का, और ट्रंप को उस चालाक बंदर की तरह, जो दो लड़ती बिल्लियों को न्याय दिलाने के बहाने पूरी रोटी हड़प जाता है।

Read More

एक के बाद एक ढेर सारे फरमानों और पहलों के जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पृथ्वी को हिलाकर रख दिया है। अभी प्रतिक्रियाएं दबी हुई हैं, स्तब्ध हैं। राजनैतिक टिप्पणीकार, खुद अमेरिका के बुद्धिजीवी और स्वतंत्र पत्रकार आंकलन करने से बच रहे हैं। व्हाइट हाउस का नया किरायेदार कभी भी, किसी को भी कुछ भी कहकर चौंका सकता है। विश्व की कई राजधानियों में इसके चलते तनाव है। खरीद-फरोख्त का बाजार गरम है और दुश्मनों को भी प्रलोभन देकर भ्रमित किया जा सकता है। लाठी और भैंस का रिश्ता एक बार फिर से चर्चा में है...

Read More

आगरा की कला, संस्कृति और विरासत का उत्सव, हर साल दस-दिवसीय ताज महोत्सव, शहर के कार्यक्रम कैलेंडर में एक स्थायी स्थान बन गया है। हालांकि, इसकी लंबी अवधि और धूमधाम के बावजूद, विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में महोत्सव की प्रभावशीलता और स्थानीय पर्यटन उद्योग पर इसका समग्र प्रभाव बहस का विषय बना हुआ है...

Read More

कुछ दिन पहले दक्षिण भारत में आयोजित एक शास्त्रीय संगीत कार्यक्रम में एक विद्वान ने मुझसे प्रश्न किया कि आगरा घराने की वर्तमान स्थिति क्या है, और कौन इसे संजो रहा है? मेरा उत्तर अज्ञानता और असहायता के बोझ से दबा हुआ था। यह प्रश्न एक बड़ी चिंता की ओर इशारा करता है कि कैसे हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, विशेष रूप से आगरा घराना, आधुनिक समय में उपेक्षित हो रहा है...

Read More



Mediabharti