बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

बृज भूमि, खास तौर पर गोवर्धन और वृंदावन में हरियाली की भयावह गिरावट एक दुखद विडंबना को दर्शाती है। कभी हरे-भरे जंगलों, मैंग्रूव, पवित्र तालाबों और यमुना के शांत घाटों की जीवंत तासीर वाला यह क्षेत्र अब तेजी से हो रहे शहरीकरण की खूंखार पकड़ का शिकार हो रहा है। कृष्ण की बांसुरी की गूंज कंक्रीट की संरचनाओं के बढ़ने और पवित्र भूमि के निरंतर विकास के कारण, अब सुनाई नहीं देती है...

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वर्षों से चले आ रहे वकीलों के आंदोलन और निरंतर की जा रही मांगों के बावजूद, आगरा में उच्च न्यायालय पीठ स्थापित करने की फिलहाल कोई संभावना नहीं दिख रही है...

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भोपाल गैस त्रासदी से हमने हमने कुछ नहीं सीखा है। हमारे शहर हादसों और मानव निर्मित आपदाओं के कगार पर खड़े हैं। भोपाल की दुखद विरासत का भूत हर दिन बड़ा होता जा रहा है। शहरों का औद्योगिक परिदृश्य, सुरक्षा मानकों में ढिलाई और नियामक उदासीनता से पीड़ित है।

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रविवार की सुबह धुंधभरे मौसम में, एक 18 वर्षीय नौजवान व्यस्त यमुना किनारा रोड पर ट्रकों और बसों के साथ दौड़ रहा है। जब उसे रोककर ऐसा करने की वजह पूछी तो उसने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “जब खेल के मैदान या खुली जगह है ही नहीं तो हम प्रतियोगिताओं की तैयारियों के लिए दौड़ने का अभ्यास कहां करें?

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एक सवाल जो बार बार उठता रहता है, वह अभी भी उत्तर के इंतज़ार में है। क्या धर्म विशेष की कट्टर मान्यताएं, लोकतंत्री जीवन शैली के साथ कदम ताल नहीं कर सकतीं?

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ज्यादातर भारतीय शहरों का विकास निर्वाचित निगम के पार्षदों से छीनकर चंद नौकरशाहों द्वारा कब्जाए विकास प्राधिकरणों को सौंपने की भूल का परिणाम आज सर्वत्र दिखने लगा है...

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