बृज खंडेलवाल

बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।

पूरी दुनिया में एक ही ऐसा परिधान है जिसे अमीर-गरीब, बूढ़े-बच्चे, नर-नारी और शहरी व ग्रामीण, सभी पहनकर अपनी आजादी या आत्मविश्वास का एहसास कराते हैं। जी! हम बात कर रहे हैं जींस की, जो पैंट, पतलून या पायजामा तो है ही, लेकिन साथ ही एक फैशन स्टेटमेंट भी है। लोकप्रियता तो इतनी कि कुछ साल पहले वृंदावन के एक प्रतिष्ठित मंदिर में बवाल कटा था, जब किसी पुजारी ने ठाकुरजी को भी जींस पहना दी थी, विद हैट एंड गॉगल्स।

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भारत सरकार द्वारा ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के लिए जोर देने से उन महत्वपूर्ण मुद्दों की अनदेखी हो रही है, जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। एकल चुनाव प्रारूप को अपनाने से पहले, समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए व्यापक चुनावी सुधार आवश्यक हैं। 

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केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पहल को लागत कम करने और चुनावी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के समाधान के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।

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भारत के कई शहरों में पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक रास्ते या फुटपाथ नहीं हैं। इसकी वजह से पिछले कुछ वर्षों में पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों की तेज़ रफ़्तार ट्रकों, बसों या कारों से कुचलकर मौत हो जाने की कई दुर्घटनाएं हुई हैं।

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पितृ पक्ष पखवाड़ा शुरू होते ही, हिंदू समुदाय को एक गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। प्रशिक्षित पंडितों की भारी कमी नजर आ रही है...

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टूरिस्ट सिटी आगरा आधुनिक युग की एक विकट समस्या से जूझ रहा है। सड़कें वहीं की वहीं, लेकिन वाहनों की संख्या आसमान छू रही है। घर में गैराज नहीं है, लेकिन हर परिजन के पास एक वाहन जरूर है...

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