समीक्षा भारती न्यूज सर्विस

समीक्षा भारती न्यूज सर्विस, मीडियाभारती वेब सॉल्यूशंस का सिंडिकेशन विभाग है, जो भारत का प्रमुख ऑनलाइन मीडिया हाउस है और साल 2002 से मीडियाभारती.नेट और कई अन्य अग्रणी समाचार पोर्टल प्रकाशित कर रहा है।

कोरोना वायरस के संक्रमण के अलावा बदलते मौसम में खुद का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। कभी तेज धूप और कभी बारिश कई बीमारियों को लेकर आते हैं। ऐसे में दूषित भोजन का सेवन ‘फूड प्वाइजनिंग’ की समस्या का कारण बन सकता है। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी 'सब्सक्राइब करें', महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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पूरी दुनिया में आम की कई किस्में पाई जाती हैं। हमारे देश में भी कई राज्य खास किस्म के आमों के लिए प्रसिद्ध हैं। लेकिन, क्या कभी ऐसा पेड़ देखा है, जिस पर सभी किस्म के आम एक साथ फलते हों। जी हां, ये सच है...। पूरा आलेख पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें" महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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कई लोगों को लगता है कि 'मोतियाबिंद' केवल बड़े व वृद्धों को ही होता है, लेकिन यह बच्चों को भी हो सकता है। जी हां, सफेद मोतिया या 'मोतियाबिंद' बच्चों में दृष्टिहीनता का एक बड़ा कारण है। सफेद मोतिया होने पर बच्चे की आंख का लेंस प्रभावित होता है। ऐसी स्थिति में आंख में धुंधलापन या सफेदी आ जाती है और बच्चे की दृष्टि प्रभावित होती है। पूरा आलेख पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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देश के चौथे राष्ट्रपति वराहगिरी वेंकट गिरि ने हमेशा श्रमिकों के कल्याण के लिए तत्परता से कार्य किया। श्रमिक आंदोलनों में भाग लिया। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय आंदोलनों में भी उनकी सशक्त भागीदारी थी। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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हम सब झांसी की रानी को जानते हैं। अपने पाठ्यपुस्तकों में उनकी वीरता की गाथा पढ़ी है। तभी तो, अगर आज भी कहीं “खूब लड़ी मर्दानी”, यह पंक्ति सुनते हैं, तो आगे की कविता अपने आप याद आ जाती है। यह रानी लक्ष्मी बाई के अभूतपूर्व शौर्य का ही परिणाम है कि आज भारत के बच्चे-बच्चे की वाणी पर उनका नाम है। पूरा आलेख पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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वह दौर गुलामी का था। उस समय जंगल के भीतर बिरसा मुंडा, ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध प्रतिरोध का सबसे सशक्त स्वर बनकर उभरे थे। उन्होंने आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए ही कदम नहीं उठाया, बल्कि उन्हें आर्थिक,सामाजिक और शैक्षिक रूप से सबल बनाने के लिए भी हरसंभव प्रयास किया। पूरा आलेख पढ़ने के अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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