समीक्षा भारती न्यूज सर्विस

समीक्षा भारती न्यूज सर्विस, मीडियाभारती वेब सॉल्यूशंस का सिंडिकेशन विभाग है, जो भारत का प्रमुख ऑनलाइन मीडिया हाउस है और साल 2002 से मीडियाभारती.नेट और कई अन्य अग्रणी समाचार पोर्टल प्रकाशित कर रहा है।

तारीख नौ जून, वर्ष 1964, देश अपने दूसरे प्रधानमंत्री ”लाल बहादुर शास्त्री” से रूबरू हो रहा था। प्रधानमंत्री के रूप में शास्त्री जी का कार्यकाल ऐसा नहीं है कि एक बहुत लंबा सफर रहा हो, किंतु अपने अल्प कार्यकाल में वह जो कुछ भी कर गए वह इतिहास के पन्नों में दर्ज है। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें" महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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इतिहास हमें सिखाता है कि महामारियां यथास्थिति को तोड़ने के लिए जबरदस्त अवसर प्रदान कर सकती हैं। कोरोना वायरस ने यह चीख-चीखकर बता दिया है कि हमारा जीने का तरीका न सिर्फ हमारे लिए बल्कि इस ग्रह के लिए कितना भंगुर और विनाशकारी है। हमें न सिर्फ अपना जीने का तरीका बदलना होगा बल्कि उन मूल्यों को भी बदलना होगा जो आज इस हालात के लिए जिम्मेदार है। हमें कोशिश करनी होगी कि विकास का अर्थ सिर्फ पैसा ही न हो, उसमें स्वास्थ्य, पर्यावरण और अन्य जीवों की उन्नति भी शामिल हो। हमें स्थायी भविष्य की ओर बढ़ना होगा। चंद लोगों की तरक्की के लिए समूची मानव सभ्यता को दांव पर नहीं लगाया जा सकता है। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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यह सत्य है कि कोई भी राष्ट्र संरचनाओं से महान नहीं बनता है बल्कि त्याग, समर्पण और निष्ठा के साथ किए गए प्रयासों और कार्यों से ही एक राष्ट्र के सुदृढ़ भविष्य की निर्मिति होती है। हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने भी अपने बलिदान से स्वतंत्र भारत के महान लक्ष्य को प्राप्त किया और विश्व के सबसे प्राचीन राष्ट्र को गौरवशाली सिंहासन पर आरूढ़ कर दिया। पूरा आलेख पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में अगले पूरे 24 घंटों के लिए... 

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विनायक दामोदर सावरकर के बारे में हम सब समय-समय पर काफी कुछ सुनते और पढ़ते रहते हैं, लेकिन उनके बड़े भाई गणेश दामोदर सावरकर के बारे में लोगों को उतनी जानकारी नहीं है। गणेश दामोदर सावरकर का भारत के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान किसी से भी कम नहीं है। उन्हें ‘बाबाराव सावरकर’ के नाम से भी जाना जाता है। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए... 

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सोने के गहनों की खरीदारी के लिए पूरे देश में हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी गई है। अब हॉलमार्क किए बगैर किसी भी सोने के गहने को दुकानदार बेच नहीं सकते हैं। पूरा आलेख पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें" महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए... (अंग्रेजी में पढ़ें : How mandatory Gold hallmarking will change the game...)

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भारत में संन्यास की विशिष्ट परंपरा रही। जगत में रहते हुए भी वैराग्य के मार्ग का चुनाव करने वाले, संन्यासी कहलाते हैं। वे अपना समूचा जीवन, मनुष्य और समाज के निमित्त ही अर्पण करते हैं और दिव्यता की प्राप्ति के लिए भी साधनारत रहते हैं। ऐसे संन्यासियों के पास अपने कई प्रश्न लेकर सामान्य जन भी जाते हैं। संन्यासियों के आध्यात्मिक उपदेश और उनके कृतित्व का अवलोकन कर, मनुष्य मन का कई संदेह दूर हो जाता है। इससे जीवन यात्रा में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त होता है। ऐसे ही एक संन्यासी का नाम है स्वामी पुरुषोत्तमानंद है। इनसे अधिसंख्य छात्र, युवा और साधक जन प्रेरणा लेते रहे हैं। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अबी सब्सक्राइब करें, महज एक रुपये में अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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