समीक्षा भारती न्यूज सर्विस

समीक्षा भारती न्यूज सर्विस, मीडियाभारती वेब सॉल्यूशंस का सिंडिकेशन विभाग है, जो भारत का प्रमुख ऑनलाइन मीडिया हाउस है और साल 2002 से मीडियाभारती.नेट और कई अन्य अग्रणी समाचार पोर्टल प्रकाशित कर रहा है।

कोरोना की रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद अक्सर लोग आश्वस्त हो जाते हैं कि वे अब ठीक हो गए हैं, लेकिन वायरस से नेगेटिव आने के बाद भी लोगों में पोस्ट कोविड के लक्षण विद्यमान रहते हैं। ऐसे में खुद पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।

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प्रसिद्ध भारतीय राजनीतिज्ञ, वकील, कवि एवं पत्रकार चितरंजन दास समूचे भारत में ‘देशबंधु’ के नाम से भी जाने जाते हैं। उन्होंने बंगाल में स्वराज पार्टी की स्थापना की। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भी उनकी महती भूमिका थी। उन्होंने कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के पक्ष में मुकदमा लड़ा। इसी कारण, समस्त भारतवर्ष में ‘राष्ट्रीय वकील’ नाम से भी इनकी ख्याति फैल गई। पूरा आलेख पढ़ने के लिए अभी 'सब्सक्राइब करें', महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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साहित्य सृजन एक साधना है। व्यक्ति जीवन की आंच पर तपता है और उन अनुभूतियों को शब्दों के सांचे में ढालकर पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत करता है। लेखक अपने अनुभवों को, ठीक-ठीक पाठकों तक पहुंचा दे तो सृजन का एक उद्देश्य सफल होता है। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी 'सब्सक्राइब करें' महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...  

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योग की कई पद्धति होती हैं। देश में ऐसे तमाम योग गुरु हुए ,जिन्होंने तन और मन को स्वस्थ रखने के लिए अलग-अलग तरह के योग पद्धतियों से लोगों का परिचय करवाया। भारत के योग गुरुओं में बेल्लूर कृष्णमचारी सुंदरराजा अयंगर का ऊंचा स्थान रहा है। वह देश-दुनिया में बीकेएस अयंगर के नाम से मशहूर हैं। उन्होंने ही ‘अयंगर योग’ की स्थापना की और योग की इस पद्धति को दुनिया में प्रसिद्ध किया। पूरा आलेख पढ़ने के लिए अभी 'सब्सक्राइब करें', महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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गंगा नदी से जुड़ी पौराणिक कथाओं को यदि हम आधुनिक संदर्भों में देखें तो सबसे पहले महाराज सगर ने इसके लिए व्यापक कार्य किया। उसके बाद उनके पौत्र अंशुमान ने इस कार्य को आगे बढ़ाया, अंशुमान, राजा सगर की साठ हजार प्रजा लेकर सभी ओर इस पतित पावनी गंगा को भूमंडल पर खोज कर लाने का प्रयास करते रहे, जहां तक कि वे पृथ्वी को खोदकर  पाताल लोक तक चले गए, लेकिन वे भी असफल रहे। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी 'सब्सक्राइब करें', महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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जन्म लेने से पूर्व ही मनुष्य का ध्वनि से सहज संबंध स्थापित हो जाता है। यह संबंध मृत्युपर्यन्त जारी रहता है। मनुष्य के सामान्य अनुभव से यह सर्वविदित है कि गर्भस्थ शिशु भी विविध ध्वनियों को सुनकर प्रतिक्रिया व्यक्त करता है। जब यही ध्वनि निर्दिष्ट लय, ताल के साथ अनुभूतियों को व्यक्त कर रस उत्पन्न करे तो उसे संगीत कहते हैं। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...

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