धर्मेंद्र कुमार

दैनिक जागरण, अमर उजाला, नवभारतटाइम्स.कॉम और एनडीटीवीखबर.कॉम के रास्ते पत्रकारिता में पिछले दो दशक से ज्यादा समय से सक्रिय धर्मेंद्र कुमार मीडियाभारती वेब सॉल्युशन्स के प्रमुख हैं।

निजता के नाम पर रिश्तों में दूरी बनाने से होने वाले नुकसानों का जिक्र कर रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार केशव चतुर्वेदी। इस विषय पर विचार व्यक्त करने के लिए अभी सब्सक्राइब करें, महज एक रुपये में दिनभर के लिए...

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भोजपुरी साहित्य की परंपरा संत कबीर दास, दरिया दास व तुलसी दास से लेकर भिखारी ठाकुर की रचनाओं तक विस्तारित है। माना जाता है कि संस्कृत की साक्षात पुत्री है भोजपुरी भाषा...। साहित्य समालोचक प्रमोद कुमार पांडेय बता रहे हैं, भोजपुरी भाषा के उद्गम की कहानी। पूरा आलेख पढ़ने और अपने विचार व्यक्त करने के लिए अभी सब्सक्राइब करें, महज एक रुपये में...

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बीते कई राजनीतिक और सामाजिक प्रकरणों में रिपोर्टिंग से ऐसा लगने लगा है कि मीडिया अपनी मारक क्षमता कहीं खो बैठा है। मीडिया के सुर, लय और ताल के खो जाने से खिन्न ब्रज खंडेलवाल बता रहे हैं इसकी वजह...। इस विमर्श में भाग लेने और अपनी राय व्यक्त करने के लिए अभी सब्सक्राइब करें, महज एक रुपये में...

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कोरोना काल में, हालांकि, घरेलू निवेश करने की बात थोड़ी अटपटी तो लगती है लेकिन सतत छोटा निवेश किसी भी घर की अर्थव्यवस्था का एक अहम पहलू है। ऐसे समय में जब आमदनी कम हुई है, नौकरियां छूट रही हैं, फिर भी, छोटे-छोटे निवेशों के जरिए इस प्रक्रिया को कैसे जारी रखा जा सकता है? इसी तरह के कई सवालों पर बात करने के लिए आज हमारे साथ हैं वित्त नियोजक अभिनव गुप्ता। आलेख को पढ़ने और साक्षात्कार के दौरान पूछे गए सवालों पर अपनी राय व्यक्त करने के लिए अभी सब्सक्राइब करें महज एक रुपये में...

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किसान सड़कों पर उतरकर नए कृषि कानून का विरोध कर रहे हैं। लेकिन, ये पंजाब के किसान हैं। यूपी, बिहार, महाराष्ट्र या कर्नाटक के किसान इस तरह का विरोध नहीं कर रहे हैं। क्यों नहीं कर रहे हैं, यह सवाल है। क्या पंजाब के किसान नए कृषि कानूनों को समझ नहीं पा रहे हैं? इसके विपरीत, केंद्र सरकार विरोध कर रहे इन किसानों को क्यों नहीं समझा पा रही है? क्या किसानों की आड़ में नेतागिरी हो रही है? असली समस्या क्या है? इसका हल क्या है? ऐसे ही कई सवालों पर विचार-विमर्श के लिए आज हमारे साथ हैं वरिष्ठ पत्रकार प्रियरंजन झा। पूरा आलेख पढ़ने और साक्षात्कार में भाग लेने के लिए अभी सब्सक्राइब करें, मात्र एक रुपये में...

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यूपी, मध्य प्रदेश और अब हरियाणा में भी सरकारों ने लव जिहाद पर कानून बनाए जाने के संकेत दे दिए हैं। कानून बन भी जाएंगे, लेकिन क्या वाकई लव जिहाद जैसा कुछ है भी या यह बीजेपी के खुराफाती दिमाग की महज उपज मात्र है? हाल ही में कुछ घटनाएं ऐसी भी हुईं जिनमें हिंदू वधू और मुस्लिम वरों के रिश्ते टूटे हैं लेकिन सामाजिक जमीन पर ये घटनाएं लव जिहाद के दायरे में आती भी हैं या नहीं...? साथ ही, क्या अपनी पहचान छुपाकर रिश्ते बनाने के मामलों के पीछे लव जिहाद ही है? ऐसे ही कई सवालों पर बात करने के लिए आज हमारे साथ हैं वरिष्ठ पत्रकार केशव चतुर्वेदी। पूरा आलेख पढ़ने और साक्षात्कार में भाग लेने के लिए अभी सब्सक्राइब करें, मात्र एक रुपये में... 

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