धर्मेंद्र कुमार

दैनिक जागरण, अमर उजाला, नवभारतटाइम्स.कॉम और एनडीटीवीखबर.कॉम के रास्ते पत्रकारिता में पिछले दो दशक से ज्यादा समय से सक्रिय धर्मेंद्र कुमार मीडियाभारती वेब सॉल्युशन्स के प्रमुख हैं।

हमारे गांव में जब पहली बार वीसीआर आया, तब हमें सिनेमा के ‘स’ का भी पता नहीं था। वीसीआर के ‘मालिक’ एक बड़े हॉल में टिकटें बेचकर, एक रंगीन टीवी पर फिल्में दिखाते थे। वह हमारे पिता के मित्र थे तो एक दिन उन्होंने हम सभी बच्चों को फिल्म दिखाने के लिए बुलवाया। हम सब, पूरा परिवार, फिल्म देखने गए। फिल्म थी, ‘जय संतोषी मां’ और मेरी उम्र तब तीन या चार साल रही होगी...

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अब नहीं हैं। जब हम बहुत छोटे थे तो उनके दस्तखत नोट पर दिखते थे। घर के किसी बड़े ने बताया था कि जिसके दस्तखत नोट पर होते हैं, वह बहुत ‘बड़ा’ आदमी होता है। उसे ‘गवर्नर’ कहते हैं। हम बहुत खुश होते थे कि कभी हम भी ‘गवर्नर’ ही बनेंगे। फिर बैठकर सभी नोटों पर साइन किया करेंगे। खैर! यह बचपन की बात है। जब थोड़े बड़े हुए तो पता चला कि मनमोहन सिंह एक बेहतरीन अर्थशास्त्री हैं। बाद में एक बेहतरीन वित्त मंत्री बने। इंटरनेट पर घूम रहा उनका ‘बायोडाटा’ बताता है कि उनके जैसा आदमी न कभी हुआ है, और न होगा।

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जब से नरेंद्र मोदी ने बनारस की सीट से चुनाव लड़ना शुरू किया है, तब से मीडिया में यहां के बारे में लगातार कुछ न कुछ लिखा जाने लगा है। कई बार तो लगता है कि बनारस के बारे में सब कुछ लिखा जा चुका है और अब लिखने के लिए बाकी कुछ बचा ही नहीं है। लेकिन, क्या वास्तव में ऐसा ही है...

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आम आदमी पार्टी अब दिल्ली से निकलकर देश के दूसरे हिस्सों में पहंचने लगी है। दिल्ली में तीन बार सरकार बनाने में सफल रही पार्टी पहली बार पंजाब जैसे एक बड़े राज्य में अपनी सरकार बनाने जा रही है। साथ ही, गोवा और उत्तराखंड में भी पार्टी ने अपने निशान बनाए हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और लोगों के लिए उपलब्ध कुछ सहूलियतों व एक हद तक मुफ्त की राजनीति पर काम करने के चलते पार्टी को ये सफलताएं मिली हैं। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए... 

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आपद काल में छोटी बचतें कितनी कारगर साबित हो सकती हैं, बता रहे हैं वित्त नियोजक अभिनव गुप्ता। पूरा आलेख पढ़ने, वीडियो देखने, पोडकास्ट सुनने और अपनी राय व्यक्त करने के लिए महज एक रुपये में सब्सक्राइब करें, दिनभर के लिए...

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चुनावी प्रक्रिया में, 'साइलेंट वोटर' के रूप में एक नया 'फिनोमिना' सामने आया है। मतदाताओं का यह वर्ग अपनी 'राय' जाहिर नहीं करता है, सिर्फ वोट करता है। मतदाताओं के इस नए रूप और व्यवहार के बारे में बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार ब्रज खंडेलवाल। पूरा आलेख पढ़ने, वीडियो देखने, पोडकास्ट सुनने और दिनभर विमर्श में भाग लेने के लिए अभी सब्सक्राइब करें महज एक रुपये में...

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