फर्ज़ी डायबिटीज़ इलाज से लेकर सियासी रिश्वतों तक, हनी ट्रैप से लेकर क्रिप्टो ठगी तक, आज का भारत एक धोखाधड़ी के मेले में बदल चुका है, जहां ईमान की जगह चालाकी फल-फूल रही है। हर क्लिक के पीछे कोई जाल है, हर वादा एक फ़रेब।
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बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।
फर्ज़ी डायबिटीज़ इलाज से लेकर सियासी रिश्वतों तक, हनी ट्रैप से लेकर क्रिप्टो ठगी तक, आज का भारत एक धोखाधड़ी के मेले में बदल चुका है, जहां ईमान की जगह चालाकी फल-फूल रही है। हर क्लिक के पीछे कोई जाल है, हर वादा एक फ़रेब।
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इस साल मॉनसून के समय पर आगमन ने पूरे भारत के किसानों के चेहरों पर खुशी ला दी। नदियां उफान पर रहीं, जलाशय लबालब भर गए, नहरों का जलस्तर उम्मीदों से ऊपर रहा। लेकिन, सितंबर तक जारी रही बारिश के बाद अब फिर हर साल की तरह पानी की कमी और आपूर्ति में रुकावट की चिंता सताने लगी है।
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पाकिस्तान आज एक नाज़ुक मोड़ पर खड़ा हुआ है। इसका भविष्य आंतरिक कमज़ोरियों और बाहरी दबावों के जाल में कस कर उलझ गया है।
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भारत की हवाई सेवाएं खौफनाक दिक्कतों के भंवर में फंसती जा रही हैं। उपभोक्ताओं का आत्मविश्वास डगमगा रहा है। सवाल यह है कि गड़बड़ियों और लापरवाही का बेइंतहा सिलसिला थमने का नाम क्यों नहीं ले रहा है...
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्यापारी हैं और ईरान का जीवित रहना अमेरिकी हितों के लिए उसके विनाश से कहीं अधिक मूल्यवान है। एक पराजित ईरान उस नाजुक भय के संतुलन को बिगाड़ देगा जो अमेरिका के हथियार व्यापार और क्षेत्रीय प्रभाव को बढ़ावा देता है...
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जैसे ही पेड़ों की पत्तियां पीली होकर ज़मीन पर गिरने लगती हैं, भारत में केक काटने का सीज़न शुरू हो जाता है। जी हां, सितंबर से अक्टूबर के बीच देशभर में जन्मदिनों की झड़ी लग जाती है। ऐसा लगता है जैसे कैलेंडर ने भी तय कर लिया हो कि ये दो महीने सिर्फ़ “हैप्पी बर्थडे” गाने के लिए आरक्षित हैं...
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