क्या भारत फिर इतिहास को दोहराते हुए खामोश तमाशबीन बना रहेगा? क्या हम सचमुच बांग्लादेश को एक और पाकिस्तान में तब्दील होते देखने का इंतज़ार कर रहे हैं, उस मोड़ तक, जहां से वापसी नामुमकिन हो जाती है...
Read More
बृज खंडेलवाल वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले ढाई दशक से मीडियाभारती के लिए लगातार लेखन कार्य कर रहे हैं।
क्या भारत फिर इतिहास को दोहराते हुए खामोश तमाशबीन बना रहेगा? क्या हम सचमुच बांग्लादेश को एक और पाकिस्तान में तब्दील होते देखने का इंतज़ार कर रहे हैं, उस मोड़ तक, जहां से वापसी नामुमकिन हो जाती है...
Read More
मरोड़े हुए लोहे के ढांचे से एक-एक कर शव निकाले जा रहे हैं। कुछ ही मिनट पहले यही ढांचा हंसता-खेलता परिवार था, छुट्टियां मनाने निकला हुआ। खून से सनी सीटों के बीच एक बच्चे का जूता पड़ा है। टूटी हुई स्टीयरिंग एक बेजान जिस्म को जकड़े हुए है। कहीं खोपड़ी सीट से टकराकर चटक गई है, कहीं पलटी गाड़ी के नीचे हाथ-पैर कुचल गए हैं। यह किसी दुर्लभ या अचानक हुए हादसे की डरावनी तस्वीर नहीं है। यह भारत की सबसे तेज़ सड़कों की रोज़मर्रा की हक़ीक़त है। उत्तर प्रदेश की एक्सप्रेसवे सड़कों पर मौत अब कोई मेहमान नहीं, बल्कि रोज़ का मुसाफ़िर बन चुकी है...
Read More
गांधी परिवार की रणनीति हमेशा यह रही है कि पार्टी का मुखिया कोई ऐसा व्यक्ति हो जो ‘काबू में’ रहे। वर्तमान अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इस सोच के लिए बिल्कुल मुफ़ीद साबित हुए हैं...
Read More
बेंगलुरु एयरपोर्ट की चमकती रोशनियों के बीच, दो ज़िंदगियां एक ही सवाल से टकरा रहीं थीं—आख़िर उड़ानें रुकी क्यों...
Read More
सुबह की गुलाबी रोशनी में महाराष्ट्र के सातारा ज़िले के एक छोटे से गांव की रोजमर्रा ज़िंदगी जगने लगती है, मुर्गों की बांग, पीतल के बर्तनों की खनक, और बरगद के पेड़ के नीचे बैठी आशा वर्कर संगीता, जिसने अपनी नीली दवाई-बक्शा खोलकर सामने फैला दी है। गन्ने के खेतों पर पड़ती धूप में वह औरतों के एक घेरे को समझा रही है कि जन्मों में फ़ासला रखना कैसे मां और बच्चे दोनों की ज़िंदगी बचाता है। कुछ औरतें बच्चों को गोद में लिए हैं, कुछ संकोच में ऐसे सवाल पूछ रही हैं जो शायद वे अपने शौहर के सामने कभी न पूछ पातीं। इस सादे से सुबह के दृश्य में भारत की असली आबादी-क्रांति दर्ज है, न फ़ाइलों में, न नारेबाज़ी में, बल्कि एक-एक आशा की सब्र, मोहब्बत, और इख़्तियार देने की कोशिश में...
Read More
भारतीय इतिहास में संत सुधारकों ने गहन और जटिल आध्यात्मिक ज्ञान को जनसाधारण की भाषा में अनुवादित कर जनसंचार का एक अनोखा माध्यम विकसित किया। यह प्रक्रिया न केवल ज्ञान को सुलभ बनाती थी, बल्कि उसे लोकप्रिय बनाकर समाज में गहराई से स्थापित करती थी...
Read More