कोविड से ठीक होने वाले मरीजों में अक्सर कमजोरी की समस्या आ रही है, या यूं कहें कि कई लोगों में पोस्ट कोविड के भी अलग-अलग लक्षण सामने आ रहे हैं। ऐसे में इसकी वजह और वैक्सीनेशन से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब जानना बेहद जरूरी हैं।
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समीक्षा भारती न्यूज सर्विस, मीडियाभारती वेब सॉल्यूशंस का सिंडिकेशन विभाग है, जो भारत का प्रमुख ऑनलाइन मीडिया हाउस है और साल 2002 से मीडियाभारती.नेट और कई अन्य अग्रणी समाचार पोर्टल प्रकाशित कर रहा है।
कोविड से ठीक होने वाले मरीजों में अक्सर कमजोरी की समस्या आ रही है, या यूं कहें कि कई लोगों में पोस्ट कोविड के भी अलग-अलग लक्षण सामने आ रहे हैं। ऐसे में इसकी वजह और वैक्सीनेशन से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब जानना बेहद जरूरी हैं।
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कोरोना के उपचार में आयुर्वेदिक औषधियां भी कारगर साबित हो रही हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार हल्के लक्षण वाले कोरोना संक्रमितों को, चिकित्सक की देख-रेख में आयुष-64 और कबसुर कुडिनीर दवाएं दी जा सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि प्राचीन वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में रोग को समूल रूप से नष्ट करने की क्षमता होती है। इसमें प्रयुक्त औषधियां शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाती...
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कोविड-19 के म्यूटेंट के साथ कई सारी नई बीमारियां आ रही हैं। हाल ही में ‘म्यूकर माइकोसिस’ नाम की एक बीमारी चर्चा में है। दरअसल, यह एक तरह की 'फंगस' या 'फफूंद' होती है। यह उन लोगों पर हमला करती है जो किसी स्वास्थ्य समस्या के कारण दवाइयां ले रहे हैं और इन दवाइयों की वजह से उनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो गई है।
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“यह बदला हुआ भारत है, जो दुनिया से आंख मिलाकर और हाथ मिलाकर चलना चाहता है। यह किसी प्रतिबंध से झुकेगा नहीं और शांति व सुरक्षा के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करेगा।“ दरअसल, भारत के सफल परमाणु परीक्षण के बाद पूरी दुनिया हैरान रह गई थी और सरकार से कई सवाल किए जा रहे थे और संसद में इसका जवाब देते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपना इरादा साफ कर दिया था।
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भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी रॉ के पहले प्रमुख और भारत के मास्टरस्पाई के नाम से मशहूर आरएन काव यानी रामेश्वर नाथ काव के दिमाग और कुशल रणनीति की वजह से ही भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ को पूरी दुनिया में एक अलग पहचान और कामयाबी मिली। दरअसल, काव ही वह पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने रॉ को एक प्रोफेशनल खुफिया एजेंसी में तब्दील किया। उन्होंने न सिर्फ भारत के राष्ट्र निर्माण में अतुलनीय योगदान दिया, बल्कि भारत की इस एजेंसी को भविष्य के लिए एक सुरक्षित दिशा और दशा भी प्रदान की। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी "सब्सक्राइब करें", महज एक रुपये में, अगले पूरे 24 घंटों के लिए...
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पद्मभूषण सुंदरलाल बहुगुणा, एक ऐसे प्रकृतिप्रेमी और पर्यावरण संरक्षक, जिन्होंने सिर्फ कहा नहीं बल्कि करके भी दिखाया। सत्तर के दशक में रैणी गांव में ‘चिपको आंदोलन’ के प्रणेता रहे बहुगुणा ने गौरा देवी और अन्य महिलाओं के साथ पेड़-पौधों को बचाने के लिए अनूठा आंदोलन चलाया था। इस आलेख को पूरा पढ़ने के लिए अभी सब्सक्राइब करें महज 1 रुपये में अगले पूरे 24 घंटों के लिए...
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