एक कप कॉफी और ताजगी भरा अनुभव, घर में हों या बाहर, एक कप कॉफी की दरकार हमेशा होती है। रोजमर्रा की थकान में कॉफी की खुशबू, स्वाद और तरोताजा अहसास हमें स्फूर्ति और आनंद से भर देती है। कॉफी एक ऐसा अवयव है जिस पर बहुत बडें पैमाने पर शोध किया गया है। वैज्ञानिक शोधों ने सााबित किया है कि अगर कॉफी को संतुलित मात्रा रोजाना 4-5 रेग्यूलर साइज कप में पिया जाए तो यह वयस्कों के लिए हानिकारक नहीं होती, शारीरिक तौर पर चुस्त-दुरूस्त रखती है व स्वास्थ्यवर्द्धधक भी होती है। कॉफी पर किए गए अध्ययनों में ये भी सामने आया है कि कॉफी डायबिटीज से बचाव करती है। क्या है डायबिटीज!
डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें हमारा शरीर खून में मौजूद शर्करा ब्लड शुगर, खासकर ग्लूकोज को नियंत्रित नहीं कर पाता। ऐसा इंसुलिन की समस्या के कारण होता है। इंसुलिन शरीर में मौजूद ग्लूकोज को अन्य अंगों जैसे लीवर, मसल और कोशिकाओं में पहुंचाता है। जब इंसुलिन की कमी होती है तो शर्करा का पूर्ण इस्तेमाल नहीं हो पाता और शरीर में शर्करा की मात्रा बढ जाती है।इसे अडल्ट ऑनसेट डायबिटीज के नाम से भी जाना जाता था। इसका करण यह था कि पहले यह 40 से ज्यादा की उम्र बदलते रहन-सहन और बढते मोटापे के कारण यह बीमारी वयस्कों और यहां तक कि 10 या उससे कम उम्र के बच्चों में भी देखी जाने लगी। तब से इसका अडल्ट ऑनसेट का इस्तेमाल बंद कर दिया गया। मधुमेह के ये दोनों कारण ही शरीर में अनियंत्रित ग्लूकोज के कारण होते हैं। कई बार खाना खाने के बाद शरीर में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से कहीं ज्यादा बढ जाता है।इसे इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज या जुवेनाइल डायबिटीज के नाम से भी जाना जाता है। यह आनुवांशिक भी होता है।मधुमेह के कारणों के बारे में निश्चित रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता है। इसमें कई बार पेनक्रियाज शरीर में इंसुलिन की कम मात्रा या सृजन करता है या कोशिकाएं ही इंसुलिन का प्रतिरोध करने लगती है या ये दोनों ही कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि टाईप 2 मधुमेह अनुवांशिक होता है परंतु अन्य कारणों से भी इस बीमारी के होने का खतरा बना रहता है। इन कारणों में शामिल हैं शारीरिक श्रम का अभाव, एक ही जगह बैठे रहना, मोटापा, बढती उम्र, अनियमित डाइट, मधुमेह की पारिवारिक पृष्ठभूमि, पेनक्रियाज में समस्या, एथनीसिटी या अन्य बिमारियां।कॉफी पर शोध व अध्ययन
कॉफी पर प्रकाशित हो चुके अध्ययनों में यह बात भी कही गई है कि कॉफी पीना टाईप 2 मधुमेह से बचाव में सहायक होता है। इस तथ्य पर अन्य शोध और अध्ययन भी किए गए जिनमे कॉफी के इस गुण के समर्थन में ही परिणाम निकला है। शोध में यह निष्कर्ष भी निकला है कि चाय न पीने वाले लोग जो संतुलित मात्रा में कॉफी पीते हैं, उनमें मधुमेह होने की संभावना कम होती है। हालांकि अभी तक विभिन्न शोधों में यह पता नहीं चल सकता है कि किस प्रक्रिया द्वारा कॉफी मधुमेह से बचाव करती है लेकिन कैफीमेटेड और डीकैफीमेटेड दोनों तरह की कॉफी में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला क्लोरोजैनिक एसिड इस रक्षात्मक प्रभाव के लिए जिम्मेदार होता है। कई शोधों में विशिष्ट तौर पर यह बात कही गई है कि डीकैफीमेटेड दोनों तरह की कॉफी पीने से टाईप 2 मधुमेह का कम खतरा होता है।
साभार-khaskhabar.com






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