मुंबई। हर युवा वर्ग को मार्गदर्शन करने वाली एड्स, सेक्स एजुकेशन और धारा ३७७ के पीछे छुपी सच्चाई को उजागर करने वाली दुनिया की शिक्षा प्रधान हिंदी फीचर फिल्म,'द इंटर नेशनल प्रॉब्लम' तीन वर्षों से ज्यादा समय से 'टैक्स फ्री' करने के चक्कर में सेंसर होने के बावजूद रिलीज़ नहीं हो पा रही है। जिसके लेखक-निर्माता-निर्देशक डॉ.जगदीश वाघेला है और फिल्म को टैक्स फ्री कराने के चक्कर में रेवन्यू डिपाटमेंट, हेल्थ डिपार्टमेंट, हेल्थ एड्स डिपार्टमेंट के चक्कर लगभग तीन वर्षों से काट रहे है। जब की फिल्म को 'यू' सर्टिफिकेट सेंसर बोर्ड़ ने दिया है। महाराष्ट्र शासन सदस्य सचिव, चित्रपट सल्लागार समिति तथा अवर सचिव (महसुल) श्रीमती विद्या हम्पय्या ने राज्यपाल को फिल्म के बारे गलत जानकारी भेजी कि यह फिल्म एडल्ट है, जबकि उनको पता था कि इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने यू' सर्टिफिकेट दिया है। ऐसा कहना है फिल्म की लेखक- निर्माता- निर्देशक डॉ. जगदीश वाघेला। उनका मकसद सिर्फ इतना था कि टैक्स फ्री होने पर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक यह संदेश पहुंच सके। उन्होने यहाँ तक लिख कर दिया है कि फिल्म से जो भी फायदा होगा वह एड्स पीड़ितों को दिया जायेगा।
इस बारे में निर्माता-निर्देशक डॉ.जगदीश वाघेला कहते है,"मैं रेवन्यू डिपाटमेंट, हेल्थ डिपार्टमेंट, हेल्थ एड्स डिपार्टमेंट के चक्कर काट काट रहा हूँ। मैं इसके लिए राष्ट्रपति, राज्यपाल ,मुख्यमंत्री, उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे इत्यादि सभी लोगों को पत्र लिखा है।यह फिल्म हेल्थ डिपार्टमेंट, एड्स डिपार्टमेंट सभी को पसंद आई है लेकिन लोग और रेवन्यू डिपाटमेंट वाले पता नहीं क्यों कार्यवाही नहीं कर रहे है? उनके कहने पर तीन बार फिल्म एडिट कर चूका हूँ। फिल्म को सेंसर बोर्ड ने यू' सर्टिफिकेट दिया है।श्रीमती विद्या हम्पय्या ने फिल्म,'द इंटर नेशनल प्रॉब्लम' के बारे में गलत जानकारी भेजी राज्यपाल को भेजी है। उनको पता नहीं क्या तकलीफ है? मुझे लगता है कि समाज के भले के बारे में सोचने की मुझे सजा मिल रही है। मैं केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार से अनुरोध करता हूँ कि वे इस पर उचित कार्यवाही करे।"






Related Items
भारत में प्रथम महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी की कहानी...
विधायक से लेकर कार्यवाहक राष्ट्रपति पद तक रही बीडी जत्ती की राजनीतिक यात्रा
जब किसानों के लिए जगह नहीं तो राष्ट्रपति कैसे रहें होटल में