
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू किया जाना भारत में अप्रत्यक्ष कर सुधारों के क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बड़ी संख्या में केन्द्रीय एवं राज्य करों को मिलाकर उन्हें एकल कर यानी जीएसटी का रूप देने से करों की बहुतायत अथवा दोहरे कराधान की समस्या का समाधान बड़े पैमाने पर हो जाएगा और इसके साथ ही ‘एक समान राष्ट्रीय बाजार’ का मार्ग प्रशस्त होने की संभावना है।






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