ज्ञानदीप सभागार में हुआ नाट्यकर्मियों का महाकुम्भ

ज्ञानदीप सभागार में हुआ नाट्यकर्मियों का महाकुम्भमथुरा । साहित्यकार पद्मभूषण अमृतलाल नागर के सरंक्षकत्व में 8 जनवरी 1977 को स्थापित सुप्रसिद्ध सांस्कृतिक संस्था ‘स्वास्तिक रंगमंडल’ का 40 वाँ जयन्ती समारोह ज्ञानदीप सभागार में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ अनुष्ठान के रूप में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर फिल्म पटकथा लेखिका और साहित्यकार डा. अचला नागर तथा नाटक, लोकनाट्य नौटंकी आदि विधाओं से जुडे कलाकारों की उपस्थिति में यह आयोजन नाट्यकर्मियों का महाकुम्भ हो गया। स्वास्तिक के संस्थापक अध्यक्ष मोहन स्वरूप भाटिया ने स्वास्तिक के 40 वर्षों के संघर्ष और अभावों से जूझते हुए देश के अनेक प्रतिष्ठाजनक मंचों पर सौ से अधिक प्रस्तुतियों के गौरवशाली इतिहास का यशोगान किया। मुख्य अतिथि पद्मश्री कृष्ण कन्हाई ने कहा कि ब्रज गीत संगीत, नृत्य-नाट्य की भूमि रही है।  स्वास्तिक के निदेशक संदीपन नागर ने कहा कि स्वास्तिक के समर्पित कलाकारों ने नाट्य-मंचन के साथ लोगों में नाट्य- चेतना जागरूक करने का कार्य भी किया है। समारोह में नौटंकी विधा के ख्याति प्राप्त कलाकार किशन स्वरूप पचैरी ने टीपदार आवाज और नगाड़े की खनक के मध्य ‘भाई हो तो ऐसा’ की प्रस्तुति कर दर्शकों को मंत्र-मुग्ध किया। नौटंकी की नाट्य-कथा एवं परिकल्पना संदीपन नागर द्वारा की गयी।  समारोह में फिल्म पटकथा लेखिका के साथ उपन्यासकार के रूप में भी अपनी सशक्त भूमिका निभा रही डा. अचला नागर के उपन्यास ‘छल’ का पद्मश्री कृष्ण कन्हाई, डा. राम अवतार शर्मा, मोहन स्वरूप भाटिया, भागवत प्रवक्ता कीर्ति किशोरी एवं भारत कोष के निर्माता आदित्य चैधरी ने लाकार्पण किया। कार्यक्रम का संचालन आकाशवाणी दूरदर्शन की वरिष्ठ उदघोषिका श्रुति पुरी ने किया और संयोजक सीपी शर्मा ने आभार व्यक्त किया। 


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