गायिका ज्योतिका दयाल पौस्ट को स्मृति चिन्हे देतीं संगीतज्ञ डा. वन्दना तैलंग।
मथुरा। ब्रज विभूति रहे संगीताचार्य आनंद बिहारी तैलंग सुर-संगीत जगत की अमूल्य निधि थे। संगीत के प्रति उनका समर्पण ही उनकी पहचान बना। उक्त उद्गार उनकी प्रथम पुण्य-तिथि पर श्री आनन्द नाद मंदिर व श्री नाद संगीत कला केन्द्र के तत्वावधान में होटल गणपति पैलेस में आयोजित हुई स्वरांजलि संगीत संध्या का उनके चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर शुभारम्भ करते हुए अध्यक्षीय उद्बोधन में गोस्वामी पंकज बाबा ने व्यक्त किये। मुख्य अतिथि डा. लवनाथ- डा. कुशनाथ चतुर्वेदी, साहित्यकार मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा कि तैलंग जी ने संगीत के उन्नयन विकास और उसकी समृद्घि के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया। उनकी शिष्या व धेवती रूचि तैलंग ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए बताया कि संगीत साधना के संरक्षण में उनके प्रयास अतुलनीय रहे। उन्होंने अनेक संगीत केन्द्रों की स्थापना की व अनेकानेक संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित किया। इससे पूर्व आयोजक डा. वन्दना तैलंग ने अतिथियों संग कलाकारों का पटुका व शाल ओढ़ाकर स्मृति चिन्ह प्रदान कर अभिनन्दन किया। कार्यक्रमान्तर्गत एक वृत्त चलचित्र के माध्यम से उनकी स्मृति संयोजन का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया गया। देश-विदेशों में अपनी शास्त्रीय गायन कला की आभा बिखेर चुकीं गायिका ज्योतिका दयाल पौस्ट ने भारी कर्तलध्वनियों के मध्य श्रोताओं को वाह-वाह कहने हेतु विवश किया। गोकुलेन्दु व गौरव तैलंग ने हवेली संगीत में ‘‘प्रगट भये तैलंग कुलदीपक’’ रचना से उन्हें भावांजलि दी। गजाधर पाठक ‘‘राजू’’ ने वीणावादन कर अपनी कला का जादू बिखेरा। वादक कलाकारों ललित सिसौदिया (हारमोनियम), कृष्ण गोपाल शर्मा (पखावज), मदन सिसौदिया व आशीष अग्रवाल (तबला) ने भी श्रोताओं को अपनी कला से प्रभावित किया। संचालन डा. राजेन्द्र कृष्ण अग्रवाल ने किया व आभार डा. वंदना तैलंग ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में सांसद प्रतिनिधि जनार्दन शर्मा, आकशवाणी कार्यक्रम अधिकारी नरेश मल्होत्रा, सुरेश गुप्ता, आरके त्रिपाठी, राजेश शर्मा, डा. सत्यभान शर्मा, भागवताचार्य डा. हरेकृष्ण गोस्वामी, अनुराग तैलंग, श्रीगोपाल अग्रवाल, डा. सीमा मोरवाल, विशनकांत मिलिंद, नीलेश कुमार, संजय गोविल सहित सैकडों रसिक श्रोता उपस्थित थे।





