निरंजन बघेल के खिलाफ धनगर समाज के द्वारा किया गया प्रदर्शन

निरंजन बघेल के खिलाफ धनगर समाज के द्वारा किया गया प्रदर्शनमथुरा । साल के पहले दिन शहर के डैम्पियर नगर स्थित महारानी अहिल्याबाई होल्कर पार्क में धनगर समाज की एक विशाल बैठक आयोजित की गई थी जिसमें उपस्थित लोगों ने एक स्वर से निरंजन  धनगर के खिलाफ आवाज उठाते हुए उन्हें सर्व सम्मति से  समाज से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया । बैठक में धनगर समाज के वक्ताओं का कहना था कि निरंजन बघेल स्वयं धनगर बने हुए हैं और उन्होंने  गलत तरीके से धनगर  प्रमाण पत्र हासिल कर लिया है जबकि धनगर समाज के लोगों के प्रमाण पत्र बनने में व अवरोध पैदा कर रहे हैं जिसको लेकर धनगर समाज में गहरा रोष व्याप्त है इस बीच सैकड़ों की संख्या में उपस्थित लोगों ने एक स्वर से हाथ उठाकर निरंजन बघेल का सामाजिक बहिष्कार कर दिया वहीं दूसरी ओर जिला अधिकारी को हरीश धनगर के द्वारा भेजी गई एक शिकायत के आधार पर सोमवार को एक जाँच करनी थी जिसको लेकर  जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में दोनों पक्षों की एक बैठक बुलाई थी जिसमें अपरजिलाधिकारी प्रशासन जिला समाज कल्याण अधिकारी तथा तहसीलदार महावन आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे थे इस मौके पर जहां हरीश धनगर ने अपने तमाम साक्ष्य प्रस्तुत किए और निरंजन धनगर पर फर्जी तरीके से प्रमाण पत्र हासिल करने का आरोप लगाया था वहीं दूसरी ओर निरंजन धनगर ने अपने अधिवक्ता के साथ पहुंचकर जिला अधिकारी को एक प्रार्थना पत्र दिया जिसमें साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा था जिस पर जिलाधिकारी ने निरंजन धनगर को 15 दिन की साक्ष्य प्रस्तुत करने हेतु मोहलत दी है सूत्रों का कहना है कि बीते 2 दिनों से निरंजन धनगर प्रशासन के आला अधिकारियों पर दबाव बना रहा था कि वह उसके साक्ष्य प्रस्तुत करने की तिथि को आगे बढ़ा दें जिसमें वहसोमवार को काफी हद तक सफल भी हो गया बताया जाता है कि चुनाव आयोग द्वारा प्रदेश में इसी सप्ताह चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी जिसका चलते  इसी सप्ताह प्रदेश में विधानसभा चुनावों की घोषणा  की जानी है निरंजन बघेल यह चाहता है कि यदि चुनाव घोषित हो गए तो वह अपने मकसद में कामयाब हो जाएगा हालाकी धनगर समाज के अलावा विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के लोग उसके खिलाफ लगे हुए हैं और उनकी मंशा है कि इसका यह प्रमाण पत्र निरस्त हो जाए सूत्रों का दावा है कि निरंजन धनगर के द्वारा 1990 में जमीनों के बैनामे में बघेल जाति दर्ज करा रखी है और इसकी धर्मपत्नी पिछड़ी जाति से जिला पंचायत चुनाव लड़ चुकी है वही निरंजन धनगर के शेक्षिक प्रमाणपत्र की जाती कॉलम में बघेला ठाकुर लिखा हुआ है जबकि धनगर जाति के अन्य लोग जिनके अभिलेखों में 1918 में धनगर जाति अंकित है उनके प्रमाण पत्र अभी तक प्रशासन के द्वारा नहीं बनाए गए हैं इससे कहीं ना कहीं प्रशासन की मंशा पर भी खोट नजर आता है वही जिला अधिकारी के द्वारा दी गई 15 दिन की मोहलत भी जहां निरंजन धनगर के लिए अमृतबाण साबित होगी वही धनगर समाज के सैकड़ों लोग इसके बाद मायूस हो गए थे धनगर समाज के लोगों का कहना है कि वह अपने अधिकार और हक के लिए अपने संघर्ष को जारी रखेंगे और अंत में सत्य की ही जीत होगी अब यह  आने वाला वक्त बताएगा कि ऊंट किस करवट बदलता है फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ हैं और लोंगों की प्रशासन पर ऊँगली उठ रही हैं


Subscribe now

Login and subscribe to continue reading this story....

Already a user? Login



Related Items

  1. भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में भारतीय हस्तकलाओं का हुआ जीवंत प्रदर्शन

  1. लगातार भव्य हो रहे है ओलंपिक खेल, बेहतरी की ओर भारत का प्रदर्शन

  1. चुनावों में खराब प्रदर्शन की समीक्षा के लिए जनता के बीच जाए भाजपा




Mediabharti