मथुरा। पॉलीटेक्निक की वार्षिक परीक्षा के फस्ट ईयर का अप्लाइड फिजिक्स और मैथ का पेपर मथुरा से एक निजी कालेज से लीक हुआ था। प्रिंसिपल ने अपने सहायक के साथ मिलकर फिजिक्स और मैथ के बंडल से एक-एक प्रश्नपत्र गायब कर दिया था। पुलिस ने पेपर लीक करने के मामले में एक निजी कालेज के प्रिंसिपल और उसके सहायक को अरेस्ट किया है। पकड़े गए दोनों आरोपियों ने पेपर लीक करने की बात स्वीकारी है।
डीएम राजेश कुमार और एसएसपी राकेश कुमार सिंह ने शनिवार को मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार को पलीटेक्निक के फर्स्ट ईयर की अप्लाइड फिजिक्स की परीक्षा होनी थी लेकिन परीक्षा शुरु होने से पहले ही पेपर लीक होने की जानकारी होने पर प्रदेशभर में यह परीक्षा रद्द कर दी गई थी। प्राविधिक शिक्षा परिषद ने मामले की जांच के लिए प्रदेशभर के सभी पलीटेक्निक संस्थानों को कल कर लिया था और पेपर के बंडलो की सील जांच और लीक पेपर से मिलान के लिए लखनऊ मंगाया था। मथुरा से प्रश्न पत्रों के बंडलों को लखनऊ भिजवाने के लिए राजकीय पलीटेक्निक टूण्डला फिरोजाबाद में तैनात राजेन्द्र प्रसाद शुक्ला जिन्हे 2015-16 की पलीटैक्निक परीक्षा में पर्यवेक्षक बनाया गया है मथुरा पहुॅचे। एसएसपी ने बताया कि जब राजेन्द्र कुमार फरह स्थित ऐडीफाई इंस्टीट्यूट पहुॅचे और कार्यालय में फिजिक्स के प्रश्नपत्र के बंडल को निकलवाने पहुॅचे तो अलमारी के पास पहले से ही इंस्टीट्यूट का प्रिंसिपल सुशील गुप्ता और उसका सहायक ह््रदेश कुमार सोलंकी मौजूद थे और अलमारी खुली हुई थी। पर्यवेक्षक ने जब अलमारी में रखे प्रश्न पत्र के बंडलों को चौक किया तो उसमें अप्लाइड फिजिक्स के प्रश्न पत्र का बंडल फटा हुआ मिला और गिनती करने पर एक प्रश्नपत्र कम मिला। पर्यवेक्षक की नजर जब एक दूसरे बंडल पर पड़ी तो वह भी खुला हुआ था। पर्यवेक्षक ने चौक किया तो दूसरा बंडल गणित के प्रश्नपत्र का था और गिनती करने पर इसमें भी एक पेपर कम मिला। पुलिस के अनुसार पेपर लीक का मामला समझ में आने पर पर्यवेक्षक राजेन्द्र कुमार शुक्ला ने थानाध्यक्ष फरह को इसकी जानकारी दी। पुलिस ने मौके पर पहुॅच कर दोनों को हिरासत में ले लिया और पर्यवेक्षक की तहरीर पर दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। एसएसपी ने बताया कि दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है।






Related Items
खून, रिश्वत और नाइंसाफी के दलदल में फंसी है भारत की पुलिस व्यवस्था!
‘असुरक्षित वातावरण’ और ‘औपनिवेशिक पुलिस’ है मानवाधिकारों के लिए खतरा
ट्रैफिक पुलिस को व्यवस्था में करने चाहिए बुनियादी बदलाव