आजादी के समय 1947 में, भारत में महज 29 करोड़ रुपये के निवेश के साथ केवल पांच केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम थे। इसके अलावा, ब्रिटिश हुक्मरानों को सेवाएं प्रदान करने के लिए संभवत: भारत के पास रेलवे और विस्तृत डाक एवं तार विभाग का काफी हद तक पर्याप्त नेटवर्क था, जो पूरे देश को कवर करता था।






Related Items
अस्थिर भू-राजनीति परिदृश्य के बावजूद भारतीय मौद्रिक व वित्तीय क्षेत्र में उछाल
भारत के समुद्री खाद्य निर्यात क्षेत्र को मिला बड़ा मौका
भारतीय विमानन क्षेत्र भर रहा है समावेशिता की उड़ान