मथुरा। शनिवार शाम यूपी के डीजीपी ने मथुरा कांड के मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव की मौत की पुष्टि कर दी है। बताया गया कि मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव मारा गया है।
इसकी पुष्टि उत्तर प्रदेश के डीजीपी जावीद अहमद ने की और कहा कि मथुरा के एसएसपी ने इस बारे में उन्हें सूचित किया है। डीजीपी ने कहा कि कई शवों की पहचान की गई है। इसमें रामवृक्ष यादव के साथियों ने उसके शव की पहचान की है। गाजीपुर में उसके परिवार के लोगों को सूचना दे दी गई है।
रामवृक्ष ने कहा था- नेताजी आ रहे हैं...
यूपी के मथुरा में जवाहर बाग से कब्जा हटाने आई पुलिस पर हमले के मामले में नया खुलासा हुआ है। 270 एकड़ के इस इलाके पर खुद को सत्याग्रही बताने वाले स्वाधीन भारत सुभाष सेना के नेता रामवृक्ष यादव ने अपने समर्थकों से कहा था कि वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस से अगले 2 महीने में मुलाकात करेगा और उनके मिलते ही भारत का इतिहास बदल जाएगा। तब तक वे जवाहर बाग पर ही रुके रहें। मथुरा में पुलिस पर उपद्रवियों के हमले में एसपी और एसएचओ समेत 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। हिंसा का मास्टरमाइंड रामवृक्ष कहां है, इस पर अभी सस्पेंस है। खुद को सत्याग्रही कहने वाले घायल लोगों का एसएन मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। रामवृक्ष यादव के इन सपोर्टर्स के पास खाने के लिए न तो अनाज था, न सब्जियां और न ही दूध। ये लोग पिछले दो महीने से खिचड़ी-दलिया खाकर किसी तरह दिन गुजार रहे थे। इन लोगों से कहा गया कि जल्द ही नेताजी खुद आंदोलन की बागडोर संभालेंगे। इसके बाद जल्द ही भारत से जंगलराज खत्म हो जाएगा। 87 साल के गोरखपुर के रहने वाले दयाशंकर के मुताबिक, हम जय गुरुदेव को पिछले 30 साल से गेहूं और चावल देते चले आ रहे थे। बाद में रामवृक्ष यादव ने नया गुट बना लिया। यादव ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया था कि वह नेताजी को लोगों के सामने लाएगा। अगर वह ऐसा नहीं कर पाया तो उसे फांसी चढ़ा दें।
देश के कई हिस्सों में गए आंदोलनकारी
पुलिस की मानें तो ये आंदोलनकारी गुजरात, वेस्ट बंगाल, महाराष्ट्र और ओडिशा में भी गए। आखिर में इन लोगों ने मथुरा के जवाहर बाग को अपना ठिकाना बना लिया। पुलिस का ये भी कहना है कि ज्यादातर फॉलोअर्स यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं। आंदोलनकारियों के मुताबिक, रामवृक्ष यादव कभी-कभी ही उनसे मिलता था। लोगों को बाहरी दुनिया में घुलने-मिलने की इजाजत नहीं थी। लोगों को सुबह 3 बजे उठना पड़ता था। नहाना-पूजा-नाश्ते के बाद वे दिनभर आराम कर सकते थे। डिनर शाम 5 बजे ही हो जाता था।
मथुरा में तनावपूर्ण शांति
मथुरा के जवाहर बाग में अब जली गाडिय़ां, बिखरे पत्थर और बड़ी तादाद में पुलिस के जवान तैनात हैं। शनिवार को यहां तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। कार्रवाई में शामिल पुलिसकर्मी ने बताया कि कल तो ऐसा लग रहा था मानो जंग छिड़ी हो। एसपी साहब बाग से लगी कॉलोनी के लोगों से बात कर रहे थे कि कुछ लोग उन्हें बाग के भीतर खींच ले गए। कुछ समझते, इससे पहले पेड़ पर चढ़े लोग फायरिंग करने लगे। बम फेंकने लगे। एसएचओ पर भी 20-25 लोगों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। आला अफसरों को फौरन सूचना दी गई। पर न फोर्स आई और न जवाबी कार्रवाई का ऑर्डर। कहा गया- इंतजार करो। जब तक ऑर्डर आता, एसपी साहब और एसएचओ मर चुके थे। उपद्रवी कई और जवानों को मार गिराते यदि वहां आठ फीट की दीवार न होती। शाम 6 बजे फोर्स पहुंची। इसके बाद जवाबी कारवाई हुई। इसमें 22 उपद्रवी मारे गए।
जवाहर बाग में चलती थी रामवृक्ष की हुकुमत
जवाहर बाग को रामवृक्ष यादव ने छावनी में तब्दील कर लिया था। उसकी मर्जी के बिना कोई बाग में आ-जा नहीं सकता था। पुलिस भी नहीं। उसकी दहशत ऐसी थी कि बाग में मौजूद कई अफसर अपने दफ्तर और सरकारी घर छोडक़र चले गए थे। जबकि यह जगह एक ओर पुलिस लाइन और एसपी ऑफिस और दूसरी ओर जज कॉलोनी से घिरी है।
साभार-khaskhabar.com






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