मितव्ययिता को हम बंधन कह सकते हैं लेकिन यह दुखदायी नहीं

 मितव्ययिता को हम बंधन कह सकते हैं लेकिन यह दुखदायी नहींमितव्ययिता का अर्थ कंजूसी नहीं बल्कि धन संपदा का श्रेष्ठ और  राष्ट्रहित कार्यों के लिए बचत करना है। श्रम, पुरुषार्थ व ईमानदारी से कमाए धन को फिजूलखर्ची न करते हुए भविष्य के लिए सुरक्षित करें। मितव्ययिता केवल धन ही नहीं बल्कि समय, शक्ति, ज्ञान और वैभव के दुरुपयोग न होने देने का भी नाम है। इन सब संसाधनों को श्रेष्ठ कार्यों में नियोजित करने वाले हमेशा महामानव कहलाए हैं।

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