
करीब 100 साल पहले जून 1916 में गुजरात के अहमदाबाद क्लब में पहली बार आए एक बेहद स्टाइलिश मेहमान के काठीवारी ड्रेस को लेकर गुजरात के ही एक बैरिस्टर ने मज़ाक उड़ाया। नए आए मेहमान ने क्लब के लॉन में मौज़ूद थोड़े-बहुत लोगों को संबोधित किया लेकिन बैरिस्टर अपने दोस्तों के साथ पत्ते खेलते रहे। बैरिस्टर को पता था कि संबोधित कर रहा शख्स कोई और नहीं बल्कि मोहनदास करमचंद गांधी हैं जो कि हाल ही में दक्षिण अफ्रीका से स्वदेश लौटकर अहमदाबाद में ही सत्याग्रह आश्रम की नींव रख चुके हैं। एक बेहद सफल वकील बन चुके बैरिस्टर को गांधी के कार्यों से कोई मतलब नहीं था लेकिन गांधी जब अहमदाबाद पहुंचे तो बैरिस्टर से बातचीत के लिए जोर दिया। बैरिस्टर ने भी बिना मन से ही सही, गांधी से मिलने का फैसला कर लिया। (Read in English)






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