प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की पहली सालगिरह ने देश को आकलन का एक मौका दिया है कि स्वतंत्रता से जरूरी स्वच्छता के मोर्चे पर वह 365 दिनों में कहां पहुंच पाया है। यहां यह बता देना जरूरी है कि 20वीं सदी की शुरुआत में जब गांधी के व्यक्तित्व का कायाकल्प हो रहा था, उन्हीं दिनों उन्होंने यह मशहूर विचार दिया था- स्वतंत्रता से भी कहीं ज्यादा जरूरी है स्वच्छता। गांधी के इस विचार की अपनी पृष्ठभूमि है। इस पर चर्चा से पहले प्रधानमंत्री के इस अहम अभियान की दिशा में बढ़े कदमों की मीमांसा कहीं ज्यादा जरूरी है।

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