हिन्दूवादियों ने गिरिराज धाम में बड़े ही धूमधाम से मनाया नवसम्वतसर पर्व

गोवर्धन। श्री राधा कृष्ण सेवा समिति और सर्व ब्राह्मण महासभा के संयुक्त तत्वाधान में दानघाटी के पास गोवर्धन प्लाजा के प्रांगण में हिन्दूवादियों द्वारा नवसंवत्सर मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कन्हैया बाबा ने तथा संचालन लक्ष्मी नारायण कौशिक ने किया। कार्यक्रम में सर्व ब्राह्मण महासभा के जिलाध्यक्ष पूरन प्रकाश कौशिक ने कहा कि हमारा भारतीय नववर्ष अति प्राचीन और वैज्ञानिक आधार लिये हुए है और हमारे धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्कारों के साथ भी जुड़ा है। इसलिये घर घर में कुल धर्म के रूप में स्थापित भी है। इसे भव्य रूप में संगठित होकर मनाना चाहिये। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि के सूर्योदय से आरम्भ नवसंवत्सर के दिन ब्रह्माजी ने सृष्टि का सृजन किया था एवं इसी दिन रेवती नक्षत्र, विश्व कुम्भ योग में भगवान के प्रथम अवतार मत्स्य रूप का प्रार्दुभाव भी माना जाता है। इसी दिन से प्रकृति भी नववर्ष आगमन का संदेश देने लगती है और प्रकृति में पुरातन के समापन और नवीन दस्तकें मिलने लगती है। विक्रम संवत् के ऐतिहासिक महत्व के बारे में श्री कौशिक ने बताया कि 2000 वर्ष पहले शकों ने सौराष्ट्र, पंजाब, अवंती पर आक्रमण कर विजय प्राप्त की। विक्रमादित्य ने राष्ट्रीय शक्तियों को एक सूत्र में पिरो एक मोर्चा बनाकर शकों पर आक्रमण किया और विजय प्राप्त की। उन्होंने शकों को उनके गढ़ अरब में करारी मात दी। इसी सम्राट के नाम पर भारत में विक्रमी संवत् प्रचलित हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कन्हैया बाबा ने कहा कि धर्म शास्त्र के अनुसार इस दिन ब्रह्म मुहुर्त में नित्य कर्म से निवृत्त होकर अभ्यंग स्नान अथवा तीर्थ, नदी, सरोवर में स्नान करके शुद्ध पवित्र होवे। स्नान के पश्चात् सूर्योदय के समय नववर्ष के शुभारम्भ के अवसर पर सूर्य की प्रथम किरण के दर्शन के साथ ही शंख की ध्वनि के साथ नववर्ष का उद्घोष करे। यह कार्य धार्मिक स्थल पर आयोजित करना और भी शुभ माना जाता है। इस मौके पर हरीओम शर्मा एडवाकेट, सियाराम शर्मा, पं0 दाऊ दयाल शर्मा, गिरधारी सेठी, ब्रम्हदत्त तिवारी उर्फ दीपक, गौरव कौशिक, राजीव गुधैनियाॅ, गणेश पहलवान, मुकेश सिंघल, मोहन सिंह प्रधान, महादेव पांडे, भगवान दास लम्बरदार, राजू फौजी आदि लोग मुख्य रूप से उपस्थित थे।


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