आप जैसा विचार रखते हैं, वैसा ही बन जाते हैं। क्या यह सच्चाई नहीं है? आपकी सोच आपकी नियति को तय करती है, यह आपकी सोच का ही नतीजा होती है। आप अपनी सोच से ज्यादा विकास नहीं कर सकते और न ही आप उससे ज्यादा कुछ हासिल कर सकते हैं। केवल लाटरी का मामला अपवाद हो सकता है। लोग अपने आस-पास की चीजों के मुताबिक ही चीजों को खोजने में विश्वास रखते हैं।






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