सुकरात का एक शिष्य कशमकश में था कि उसे विवाह करना चाहिए या नहीं? उसने अपने मित्रों, परिचितों, संगे-संबंधियों और बड़े-बुजुर्गो से सलाह ली। सबने अपने-अपने ढ़ंग से सलाह दी। किसी ने कहा कि शादी कर लेनी चाहिए। इससे जीवन व्यवस्थित रहता है। फिर अपनी बात को सही साबित करने के लिए उन्होंने दलीलें भी दीं।






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