कहने को फेसबुक, ट्विटर, गूगल+ आदि सोशल मीडिया हैं, लेकिन आपको यह ‘निजता’ का एक्सक्लूसिव अधिकार देता है। दूसरी ओर, पत्रकारिता के एक मंच की तरह अगर इसे देखें तो परिपेक्ष्य बदला नजर आता है।
कहने को फेसबुक, ट्विटर, गूगल+ आदि सोशल मीडिया हैं, लेकिन आपको यह ‘निजता’ का एक्सक्लूसिव अधिकार देता है। दूसरी ओर, पत्रकारिता के एक मंच की तरह अगर इसे देखें तो परिपेक्ष्य बदला नजर आता है।
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