संपादकीय

प्रायः सभी प्रतिष्ठित मीडिया चैनलों पर जो चुनाव पूर्व 'जनमत' (ओपिनियन पोल) आया उसमें मोदी की 'हवा-पानी' की बात की गई। बीजेपी के हवाले से 'लहर -सुनामी' की भी खूब चर्चा हुई! 'एग्जिट' पोल में भी मोदी के नेतृत्व में एनडीए की जीत अच्छी 'तय' मानी गई! आज सचमुच मोदी अपने कहे अनुसार जीत गए हैं! शानदार। 1984 के बाद सबसे अधिक सीट। बीजेपी के इतिहास में श्रेष्ठ। अभूतपूर्व। अकेले दम पर बहुमत। नरेंद्र मोदी की 'जीत' को कैसे देखा जाए? 'अच्छे दिन आने वाले हैं' के रूप में! आवश्यकतानुसार पिछड़ा राजनीति (बिहार-यूपी में खासकर), गरीबी, चाय बेचनेवाला के साथ विकास की राजनीति। 

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हाल में ही देश में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के मतदान के तुरंत बाद देश के कई टीवी चैनलों ने एग्जिट पोल के माध्यम से यह बताने का सिलसिला शुरू कर दिया कि देश में किसकी सरकार बनेगी...।

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अपनी मानसिक ऊर्जा को पुराने विचारों को छोड़ने और नए विचारों को अपनाने में लगाना चाहिए। कहें, 'मैं आयोग्य होने की आवश्यकता को छोड़ने के लिए तैयार हूं। मैं जीवन में सर्वोत्तम प्राप्त करने के लिए हकदार हूं, और अब मैं इसे स्वीकार करने के लिए प्यार से अपने आपको अनुमति देता हूं।'

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''नमो भोंडा [मूर्ख] व गधा है।''  ''मोदी गधा और दंगा बाबू है''... ममता बनर्जी ने नरेंद्र मोदी पर अबतक का सबसे बड़ा हमला बोलते हुए उन्हें ‘मूर्ख’ और ‘गधा’ बताया। ममता, इससे पहले, मोदी को ‘शैतान’ और ‘खतरनाक इंसान’ भी बता चुकी हैं।

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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा से चांद पर पहुंचने के बाद पूछा था कि.. वहां (चांद) से अपना देश कैसा लग रहा है?... तो राकेश ने कहा था 'सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा', उसी तर्ज पर हमने वाराणसी की जनता से पूछा कि... 2014 का लोकसभा चुनाव कैसा लग रहा है?... तो वाराणसी की जनता ने कहा कि 'देश का पीएम होगा वैसा, काशी चाहेगी जैसा'।

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देश में लोकसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार 10 मई को पूरी तरह थम गया और अब सभी राजनीतिक दल और राजनेता करवटें बदलते हुए 16 तारीख का इंतजार कर रहे हैं। साथ- साथ पूरे देश की जनता भी चुनाव परिणामों का इंतजार कर रही है क्योंकि उसे भी 16 मई को एक नया 'नायक' मिलने वाला है।

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देश को नई सरकार मिलने में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग कर पांच साल के लिए अपने देश में एक नई सरकार देने का कार्य लगभग पूरा कर दिया है।

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सुकरात का एक शिष्य कशमकश में था कि उसे विवाह करना चाहिए या नहीं? उसने अपने मित्रों, परिचितों, संगे-संबंधियों और बड़े-बुजुर्गो से सलाह ली। सबने अपने-अपने ढ़ंग से सलाह दी। किसी ने कहा कि शादी कर लेनी चाहिए। इससे जीवन व्यवस्थित रहता है। फिर अपनी बात को सही साबित करने के लिए उन्होंने दलीलें भी दीं।

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जाजलि नाम का एक ब्राह्मण था। वह ज्ञान प्राप्त करना चाहता था। इसके लिए वह जगह-जगह भटकता फिरा, कई साधु-महात्माओं के पीछे दौड़ता रहा। लेकिन, उसे कोई ऐसा ज्ञानी नहीं मिला, जिसे वह अपना गुरु बना सके।

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आप जैसा विचार रखते हैं, वैसा ही बन जाते हैं। क्या यह सच्चाई नहीं है? आपकी सोच आपकी नियति को तय करती है, यह आपकी सोच का ही नतीजा होती है। आप अपनी सोच से ज्यादा विकास नहीं कर सकते और न ही आप उससे ज्यादा कुछ हासिल कर सकते हैं। केवल लाटरी का मामला अपवाद हो सकता है। लोग अपने आस-पास की चीजों के मुताबिक ही चीजों को खोजने में विश्वास रखते हैं।

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