संपादकीय

प्रधानमंत्री ने 15 अगस्‍त को अपने प्रथम स्‍वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’ नामक वित्‍तीय समावेश पर राष्‍ट्रीय मिशन की घोषणा की थी। एक पखवाड़े से कम समय में देश इस विशाल योजना को लागू करने के लिए तैयार हुआ और प्रधानमंत्री ने स्‍वयं नई दिल्‍ली में इस योजना की शुरूआत की। (Read in English: PMJDY: A Step Towards ‘Sab Ka Sath, Sab Ka Vikas’)

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जन-धन योजना कितनी सफल या असफल होगी, यह कहना तो मुश्किल है... लेकिन इससे एक ‘बड़ा’ फायदा यह होने जा रहा है कि बैंकिंग हर आदमी या कहें कि हर परिवार तक पहुंच जाएगी।

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भारत विश्व व्यापार संगठन में केवल अपनी ही नहीं अपितु विश्व के अनेक गरीब देशों की लड़ाई लड़ रहा है।

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कहने को फेसबुक, ट्विटर, गूगल+ आदि सोशल मीडिया हैं, लेकिन आपको यह ‘निजता’ का एक्सक्लूसिव अधिकार देता है। दूसरी ओर, पत्रकारिता के एक मंच की तरह अगर इसे देखें तो परिपेक्ष्य बदला नजर आता है।

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'सही' क्या है और 'गलत' क्या है... यह फैसला कौन करे... ? मेरे खयाल से 'सत्य' तो सार्वभौमिक है... जबकि 'सही' और 'गलत' की परिभाषा हम अपने हिसाब से गढ़ लेते हैं...।

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ऐसा पूर्वानुमान है कि वर्ष 2050 तक भारत चीन को पीछे छोड़कर विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राष्ट्र बन जाएगा। पहले से ही अधिक जनसंख्या का भार झेल रहे विश्व में, धनी देशों को भी गरीबी की वजह से बढ़ रही जनसंख्या विस्फोट की समस्या की जिम्मेदारी लेने के लिए कहा जा रहा है।

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