सेवा में राजेश कुमार जिलाधिकारी, मथुरा महोदय, आजकल मथुरा और वृन्दावन के विकास को लेकर बड़ी-बड़ी चिंताएं जाहिर की जा रही हैं। रोजाना अनेक संगठन और समितियों का गठन हो रहा है... राज्य सरकार, केंद्र सरकार, नगर पालिका, जिला परिषद, आवास विकास परिषद, ताज ट्रॅपेजियम जोन अथॉरिटी, मथुरा-वृन्दावन डेवलपमेंट अथॉरिटी, और न जाने कितने निकायों की अलग-अलग समितियां और संगठन बनाए जा चुके हैं। मण्डलायुक्त महोदय ने मथुरा को गौशाला क्षेत्र घोषित किया है। मुख्य विकास अधिकारी ऑर्गेनिक फार्मिंग और वर्मी-कम्पोस्ट को प्रोत्साहित करना चाहते हैं, हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, संत-महात्मा, फ़ौज़/छावनी, बिल्डर्स और कॉलोनाइजर सभी अचानक मथुरा-वृन्दावन के विकास के लिए 'चिंतित' हो गए हैं। ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि ब्रज भूमि की मौलिकता का सत्यानाश हो रहा है। फॉरेस्ट एरिया लगातार कम हो रहा है। नदी, तालाब, कुण्ड सब खतरे में हैं। हर जगह बेतहाशा निर्माण जारी है। अनुमति मिले तो ठीक न मिले तो और अच्छा..., भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ सब ठीक होता जाता है। महोदय, आप से निवेदन है कि इन सभी 'क्रन्तिकारी विकास' में सहयोग दे रही संस्थाओं के मुखियाओं की एक बड़ी सभा करके ब्रज भूमि के समग्र विकास का एक नया प्रारूप खींचा जाए जिसपर सब एक जुट होकर कार्य कर पाएं। अभी जो कुछ हो रहा है, वह भविष्य के प्रति आतंकित करने वाला क्रम मात्र है। वर्तमान में जिस तरह से काम को अंजाम दिया जा रहा है, उससे विकास नहीं विनाश को आमंत्रण मिल रहा है। भवदीय श्रवण कुमार, मनोज चौधरी, सुनील शर्मा, पवन गौतम, रहीश कुरैशी, पंकज दीक्षित, सुवीर सेन, संजीव सिंह, जाहिद सईद, कुंज बिहारी भारद्वाज, अनेक सिंह, विजयकांत शर्मा और दीपक शास्त्री ब्रज बचाओ समिति
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