मथुरा

जम्‍मू-कश्‍मीर में श्री अमरनाथ की पवित्र यात्रा हिन्‍दू तीर्थ यात्रियों की आस्‍था का प्रतीक है। यह यात्रा हर वर्ष सावन के महीने में शुरू होती है। देश के विभिन्‍न भागों से आए लाखों श्रद्धालु दक्षिण कश्‍मीर स्‍थित श्री अमरनाथ जी की गुफा में प्राकृतिक रूप से बर्फ से बने शिवलिंग की अराधना करते हैं। इस यात्रा का काफी महत्‍व है इसलिए यह जरूरी है कि प्रत्‍येक श्रद्धालु को यात्रा के इतिहास के बारे में सतही जानकारी हो। यात्रा के दौरान बालटाल और पहलगाम के रास्‍ते पवित्र गुफा तक जाने वाले मार्ग पर स्‍थित विभिन्‍न धार्मिक स्‍थलों की जानकारी लेना भी जरूरी है। यहां यह बताना उचित होगा कि बहुत कम लोग अनंतनाग जिले में भगवान शिव के एक अन्‍य तीर्थ स्‍थल छोटा अमरनाथ जी के बारे में जानते होंगे जो बिजबेहरा कस्‍बे से करीब सात किलोमीटर दूर छोटे से गांव थजवार में स्‍थित है। यहां पहाड़ की चोटी पर भगवान शिव की एक गुफा है जहां सावन की पूर्णिमा के दिन भक्‍तों की भारी भीड़ उमड़ती है। इसी दिन दो महीने तक चलने वाली वार्षिक अमरनाथ यात्रा समाप्‍त हो जाती है। ऐसा माना जाता है कि बूटा मलिक नाम के एक मुस्‍लिम चरवाहे को एक ऋषि ने कोयले का एक बोरा दिया। घर पहुंचने के बाद मलिक ने पाया कि बोरे में सोना भरा हुआ है। वह इतना खुश हो गया कि खुशी के मारे ऋषि का आभार व्‍यक्‍त करने के लिए वापस उनके पास पहुंचा। वहां उसने एक चमत्‍कार देखा। उसे एक गुफा देखकर अपनी आंखों पर विश्‍वास नहीं हुआ। तभी से पवित्र गुफा वार्षिक तीर्थ यात्रा का स्‍थान बन गई। एक पौराणिक कथा के अनुसार इस गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को समस्‍त सृष्‍टि की रचना और मानवता के लिए मोक्ष के तरीकों का रहस्‍य बताया था। कबूतरों के एक जोड़े ने उनकी बातचीत सुन ली और तभी से वे अमर हो गए। कबूतरों के इस जोड़े ने गुफा को अपना चिरकालिक स्‍थान बना लिया और आज भी गुफा में श्रद्धालुओं को दो कबूतर बैठे हुए दिखाई देते हैं। श्री अमरनाथ जी की यात्रा का सबसे छोटा मार्ग कश्‍मीर घाटी के गंदेरबल जिले में बालटाल के रास्‍ते है। बालटाल गर्मियों की राजधानी श्रीनगर से करीब 60 किलोमीटर दूर और प्रसिद्ध पर्यटन स्‍थल सोनमर्ग से करीब 15 किलोमीटर दूर है। बालटाल के रास्‍ते जाने वाले श्रद्धालुओं को खड़ी चट्टानों के साथ संकरे रास्‍तों से गुजरना पड़ता है। तीर्थयात्रियों को पवित्र गुफा तक पहुंचने से पहले करीब तीन किलोमीटर बर्फीले रास्‍ते से जाना पड़ता है। अकसर देखा गया है कि इस रास्‍ते पर मौसम खराब हो जाता है और वर्षा के कारण श्रद्धालुओं के लिए परेशानी खड़ी हो जाती है। खराब मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्‍वास नहीं डगमगाता। हालांकि इस मार्ग से कम लोग जाते हैं। अधिकतर श्रद्धालु पहलगाम के रास्‍ते जाने का विकल्‍प चुनते हैं। बालटाल के रास्‍ते जाने पर श्रद्धालुओं को गंदेरबल जिले में स्‍थित माता खीर भवानी मंदिर में स्‍थित पवित्र झरने का दर्शन करने का अवसर मिल जाता है। ऐसा माना जाता है कि यदि कोई अप्रिय घटना होनी हो तो इस झरने का रंग बदल जाता है। पिछले वर्ष जून 2014 में ऐसी घटना देखने को मिली जब झरने का रंग बदलकर लाल हो गया और इसके बाद सितम्‍बर 2014 के पहले सप्‍ताह में कश्‍मीर घाटी में बाढ़ आई। पहलगाम के रास्‍ते से श्रद्धालुओं को रघुनाथ जी मंदिर के दर्शन करने के साथ-साथ अनंतनाग जिले में स्‍थित मार्तंड के सूर्य मंदिर को देखने का अवसर मिलता है। विश्‍व प्रसिद्ध पहाड़ी स्‍थल, पहलगाम यात्रा का आधार शिविर है जो श्रीनगर से 100 किलोमीटर दूर है। यहां से श्रद्धालु सड़क के रास्‍ते अथवा पैदल जा सकते हैं। श्रद्धालु प्रसिद्ध लिड्डर नदी के तट पर स्‍थित भगवान शिव के मंदिर तक पहुंचते हैं। भगवान शिव का एक अन्‍य प्राचीन मामल मंदिर लिड्डर नदी के साथ लगे पहाड़ पर स्‍थित है और देखने लायक है। पहलगाम बर्फ से ढके पहाड़ों और घने जंगलों से घिरा हुआ है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने अपने वाहन नंदी को यही छोड़ दिया था और वे पवित्र गुफा की ओर प्रस्‍थान कर गए थे। इस स्‍थान का नाम बेल गांव था जो समय बीतने के साथ पहलगाम बन गया। आधार शिविर पहलगाम से यात्रा शुरू होने पर पहला पड़ाव 16 किलोमीटर दूर चंदनवाड़ी में है। चंदनवाड़ी जाने वाली सड़क पर गाड़ियां जा सकती है। इस स्‍थान तक पहुंचने के लिए तीर्थयात्री उचित दरों पर उपलब्‍ध सार्वजनिक वाहनों का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। लिड्डर नदी के किनारे का दृश्‍य बेहद रमणीक है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव ने इस स्‍थान पर अपने माथे पर चंदन पाउडर मला था इसलिए इसका नाम चंदनवाड़ी पडा। चंदनवाड़ी पहुंचने के बाद यात्रा काफी कठिन और चुनौती भरे मार्ग से पिस्‍सू टॉप की तरफ बढ़ती है। हर हर महादेव का जाप करते हुए इस कठिन मार्ग से गुजरते हुए किसी का भी मन आनंदित हो उठता है और कठिन रास्‍ता भी आसान लगने लगता है। खड़ी चढ़ाई वाले यात्रा के इस दौर को पूरा करने के बाद श्रद्धालु कहीं रूककर आराम करते हैं। शेषनाग अगला पड़ाव है जहां तीर्थयात्री पवित्र झरने में स्‍नान करते हैं और एक रात रूकते हैं। ऐसा माना जाता है कि शेषनाग के पवित्र झरने में स्‍नान करके सभी पाप धुल जाते हैं। माना जाता है कि भगवान शिव ने पवित्र गुफा की ओर जाते समय अपने शेषनाग को इसी झरने पर छोड़ दिया था। यह स्‍थान वास्‍तव में बर्फ की चोटियों से घिरी झील है जिसकी शक्‍ल सांप के सिर की तरह दिखाई देती है। पवित्र यात्रा का अगला चरण महागुन टॉप की तरफ टेढ़ा-मेढ़ा खड़ी चढ़ाई वाला मार्ग है। अधिक ऊँचाई और ऑक्‍सीजन की कमी होने के कारण इस स्‍थान पर श्रद्धालुओं को सांस लेने में दिक्‍कत होती है। कुछ श्रद्धालुओं को उबकाई आने लगती है। सूखे मेवे और खट्टी-मीठी वस्‍तुएं जैसे नींबू ऐसी स्‍थिति में लाभदायक हो सकता है। पूरे रास्‍ते पर श्रद्धालुओं के लिए चिकित्‍सा सुविधाएं मुफ्त में उपलब्‍ध है। आगे बढ़ने पर रास्‍ता नीचे की तरफ पोष पथरी के घास के मैदानों की ओर चला जाता है जो जंगली सुगंधित फूलों और जड़ी बूटियों से घिरा हुआ है। लेकिन कहा जाता है कि जो भी यहां कुछ समय रूक जाता है वह सुगंध के कारण गहरी नींद में सो जाता है। अत: यह सलाह दी जाती है कि इस स्‍थान पर अधिक समय नहीं बिताए और अगले पड़ाव पंचतरणी की तरफ बढ़े। पंचतरणी बर्फ से ढकी पाँच चोटियों से घिरा है जहां तीर्थयात्री आराम करते हैं और रात गुजारते हैं। अगले दिन यात्रा पवित्र अमरनाथ गुफा के लिए शुरू होती है यहां अमरावती और पंचतरणी का संगम होता है। श्रद्धालु पवित्र गुफा में दर्शन से पहले अमरावती में स्‍नान करते हैं। साधु और तीर्थयात्री श्रीनगर में दशनामी अखाड़े से पैदल छड़ी मुबारक यात्रा शुरू करते हैं। आवश्‍यक अनुष्‍ठानों के बाद छड़ी मुबारक पवित्र गुफा की तरफ बढ़ने से पहले प्रसिद्ध शंकराचार्य मंदिर और दुर्गानाग मंदिर जाती है। पैदल यात्रा के दौरान अवंतीपुरा मंदिर, बिजबेहरा के शिव मंदिर, रघुनाथ जी मंदिर और अनंतनाग में मट्टन स्‍थित मार्तंड सूर्य मंदिर पर धार्मिक अनुष्‍ठान किए जाते हैं। इन अनुष्‍ठानों के बीच श्रद्धालुओं को भजन-कीर्तन करते देखा जा सकता है और पूरा वातावरण जीवंत हो उठता है। छड़ी मुबारक सावन पूर्णिमा (रक्षा बंधन) के दिन श्री अमरनाथ जी के दर्शन करती है। इसी के साथ पवित्र यात्रा का समापन हो जाता है। 2014 में करीब 3,72,909 यात्रियों ने श्री अमरनाथ जी की यात्रा की थी। तीर्थयात्रियों को यात्रा करते समय कुछ एहतियाती उपाय करने चाहिए। कठिन मार्ग होने के कारण तीर्थयात्री संतुलन बनाए रखने के लिए अपने हाथ में एक छड़ी रखें और स्‍पोर्ट्स शूज़ पहनें। यात्रा की चुनौतियों का सामना करने के लिए यात्री अपने पास कम समान रखें और एक प्राथमिक उपचार किट लेकर जाएं। ठंडे मौसम से बचने के लिए गर्म कपड़े ले जाना जरूरी है क्‍योंकि रास्‍ते में मौसम बदलता रहता है। पिछले कुछ वर्षों में अमरनाथ यात्रियों की जो जन-हानि हुई हैं उसका एकमात्र कारण यात्रियों के पास पर्याप्‍त गर्म कपड़ों का नहीं होना था। यात्रा के लिए पंजीकरण और आवश्‍यक उपायों की जानकारी श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड ने अपनी वेबसाइट Shriamarnathjishrine.com पर दी हुई है। वेबसाइट में आवेदन फॉर्म और बैंक की शाखाओं की पूरे पते के साथ राज्‍यवार सूची है जिस पर यात्री अपना पंजीकरण करा सकते हैं।

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सौख के गांव सीगांपट्टी में शिविर लगाकर किसानों को मुआवजे के चेक वितरित करते समाज कल्याण विभाग के एडीओ आर डी शमा, भरतसिंह कुन्तल, हेमराज सिंह व अन्य सौंख समाचार। कस्बा के समीपवर्ती गांव सीगांपट््टी में शुक्रवार को पूर्व माध्यमिक विद्यालय सीगांपट्टी में श्वििर लगाकर किसानों को मुआवजे के चेक बांटे। समाज कल्याण विभाग के एडीओ आर डी शर्मा के मुताबिक शक्रवार को ग्राम पंचायत सीगांपट्टी में शिविर लगाकर 400 किसानों को करीब 41 लाख  रूपये के मुआवजे के चेक बांटे गये। इस मौके लेखपाल शिवचरन, भरतसिंह कुन्तल, प्रधान प्रतिनिधि वीरपाल सिंह, हेमराज सिंह कुन्तल, एनपीआरसी भगवान सिंह, नरेन्द्र सिंह, पूरनसिंह, कर्मवीर सिंह, सुमित मल्होत्रा, विकास यादव, बलवीर सिंह, बदन सिंह, चतुरसिंह, बच्चूसिंह, पुष्पेन्द्र सिंह आदि उपस्थित थे।   

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मथुरा : जनपद क्षेत्र में बारिश व ओलावृष्टि से 90 फीसदी तक फसल बर्बाद हो चुकी है और मुआवजा पाने के लिए किसान लगातार दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। 

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मथुरा : जनपद क्षेत्र में बारिश व ओलावृष्टि से 90 फीसदी तक फसल बर्बाद हो चुकी है और मुआवजा पाने के लिए किसान लगातार दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।  शुक्रवार दोपहर को विकास खण्ड चौमुहां के दलोता में एक अन्य किसान नत्थो की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। गरीबी से जूझ रहे इस किसान की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। फसल में लागत कर्ज लेकर लगाई गई थी।  छाता के नजदीक गांव जलालपुर के एक किसान राम प्रसाद ने आत्महत्या करने की धमकी दी है। उनका आरोप है कि लेखपाल मनमानी कर रहे हैं और पीड़ितों को मुआवजे के चेक नहीं दिए जा रहे हैं।  फसल बर्बाद होने के बाद अब पशुओं के चारे की भी समस्या खड़ी हो गई है। पशु विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जनपद में आठ लाख से अधिक पशु हैं। इनमें दुधारू पशुओं की संख्या अधिक है। अगर इन पशुओं को समय पर चारा नहीं मिला तो जनपद में दूध की कमी आ जाएगी। ऐसे हालत में पशुपालक पशुओं को कट्टीघरों में बेचने पर भी मजबूर हो जाएंगे। कुछ किसानों ने पशुओं की संख्या में कमी आने की बात भी कही है।  दूसरी ओर, जनपद क्षेत्र के ही छटीकरा मार्ग स्थित अक्षयपात्र के वृंदावन चंद्रोदय मंदिर परिसर में 25 और 26 अप्रैल को ‘मथुरा महोत्सव’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। सांसद हेमामालिनी द्वारा कराए जा रहे इस आयोजन में बॉलीवुड की कई नामचीन हस्तियां भाग लेंगी। पहले दिन 25 अप्रैल को हेमामालिनी कृष्ण वंदना प्रस्तुत करेंगी। ईशा देओल, चांदनी शर्मा और ब्रज के कलाकार मयूर नृत्य और कैलाश खेर गायन प्रस्तुति देंगे। वहीं 26 अप्रैल को श्रद्धा कपूर, अदिति राव, गोविंदा, जैकलीन फर्नाडीज, अर्जुन कपूर, आयुष्मान आदि कृष्ण लीलाओं पर नृत्य और शंकर महादेवन गायन की प्रस्तुति देंगे। इससे पूर्व, यह आयोजन 11 और 12 अप्रैल को इसी परिसर में होना था जिसे भारी जन विरोध के चलते स्थगित कर दिया गया था।  

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मथुरा। जिलाधिकारी राजेश कुमार द्वारा पल्स पोलियो अभियान विशाल रैली को झंडी दिखाकर रवाना किया जायेगा। सघन पल्स पोलियो प्रतिरक्षण अभियान के प्रचार प्रसार हेतु एक विशाल रैली का आयोजन दिनांक 24 अपै्रल को प्रातः 10.30 बजे से राजकीय इण्टर काॅलेज से किया जायेगा। विभिन्न विद्यालयों के कक्षा 01 से 10 तक के सभी छात्र छात्रायें इस रैली में भाग लेंगी। रैली राजकीय इण्टर काॅलेज मथुरा से प्रारम्भ होकर होलीगेट होते हुए जिला चिकित्सालय मथुरा में सभा के रूप में परिवर्तित हो जायेगी।

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राया। विद्युत विभाग की लापरवाही व भ्रष्टाचार की वजह से कस्बे की जनता परेशान है। कस्बे में आये दिन तार टूटते रहते है। जगह जगह बिजली के खम्बें व विद्युत लाइनें जर्जर अवस्थाओं में पहुँच चुके है। कस्बे के किसी न किसी फीडर पर हर समय कोई न कोई तार टूटता रहता है। अथवा कही न कही अकसर फाॅल्ट हो जाता है। विद्युत विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों की लापरवाही व उदासीन रवैये के चलते यहीं छोटे छोटे फाॅल्ट बमुश्किल सही हो पाते है। एक ही दिन में दर्जनों बार शट डाउन लिया जाता है। जब इन विद्युत समस्याओं की शिकायत विभागीय लोगों से की जाती है तो विद्युत कर्मचारी व अधिकारी फोन नही उठाते है। विद्युत इस गम्भीरतम समस्या केा लेकर गौ रक्षा सेवा समिति के अध्यक्ष राकेश बंसल ने कस्बे के अवर अभियन्ता से जब शिकायत की तो अवर अभियन्ता साहब कहना था कि क्या मैं बिजली ठीक करूँगा कर्मचारियों से कहो व बिजली घर जाकर शिकायत करो। जब स्थानीय लोगो द्वारा बिजली घर जाया जाता है। तो वहाँ कोई भी कर्मचारी शिकायत सुनने के लिए तैयार नही होता। क्षेत्र में कई ट्रांसफार्मर भी विद्युत कर्मचारियों की लापरवाही से फुंका पड़े है। लेकिन अभी तक विभागीय लोगों ने उनकी सुधि नही ली है। सिर्फ वैकल्पिक व्यवस्था बना कर काम चला रहे है। विद्युत विभाग में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। चाहें आप नया कनैक्शन ले रहे हो या पुराना कनैक्शन कटवाना है। या केविल सही करानी कोई कार्य बिना लेनदेन के नही होता है। मीटर लगवाने के नाम पर अवैध वसूली चल रही है। बिजली कब आती है कब चली जाती है कोई पता नही है। बिजली के बिल जमा कराने में एक या दो महीने की देरी हो जाती है तो कनैक्शन कटाने या रिपोर्ट लिखाने की धमकी देकर अवैध वसूली की जाती है। भारतीय गौरक्षा समिति के अध्यक्ष राकेश बंसल ने कहा है। कि अब भारतीय गौरक्षा समिति इसका विरोध करेगी अगर कोई कर्मचारी रिश्वत लेते हुए या अवैध वसूली करते पकडा गया तो उसकी शिकायत उच्च अधिकारियों के सामने मय सबूत की जायेगी।

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