मथुरा

मथुरा। थाना शेरगढ़ के गाॅव दतौना में नामजदों ने एक युवती के साथ अश्लील हरकत की तथा इसका विरोध करने पर नामजदों ने युवती के घर में घुसकर मारपीट करने की रिपोर्ट पीडि़ता के भाई ने पुलिस में दर्ज कराई हैं।  मिली जानकारी के अनुसार देवजीत पुत्र भगवान सिंह निवासी दनौता थाना शेरगढ़ ने रिपोर्ट दर्ज कराई है कि ग्राम के ही धू्रव पुत्र कन्हैयालाल ने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर उसकी बहन पूनम के साथ अश्लील हरकत की तथा इसका विरोध करने पर नामजदों ने उसके घर में घुसकर युवती से मारपीट कर जान सें मारने की धमकी दी। पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्यवाही शुरू कर दी हैं।  

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दृश्य- एक : नई दिल्ली में चहल-पहल भरी एक सुबह। घर में गजल गायक जगजीत सिंह की गाई गजल का रिकॉर्ड बज रहा है, "सूरज ठेकेदार सा सबको बांटे काम" भाई को कॉलेज के लिए तैयार होते देख निशा लगातार सोच रही है, आखिर मैं क्यों नही जाती कॉलेज? मां उसे जल्दी से भाई का कॉलेज बैग लाने के लिए कहती है, अनमनी सी वह थके कदमों से जाती है और एक फीकी सी मुस्कान के साथ बैग भाई को थमा देती है, और इस सारे मंजर को झाड़ू लगाते-लगाते ध्यान से देख रही है, घर में सफाई का काम करने वाली छोटी, यह सब देख उसे अपने घर की सुबह याद आ रही है जब मां ने छोटे भाई को तो तैयार हो स्कूल जाने के लिए कहा और उसे जल्दी से घर का काम निबटा कर मेम साब के यहां सफाई के लिए भेज दिया।  निशा और छोटी दोनों समाज के अलग-अलग तबकों की बेटियां, लेकिन दोनों के मन में सवाल एक से- इस सूरज ने उन्हें अपने भाइयों के तरह पढ़ने का काम क्यों नही दिया। निशा को कॉलेज की पढ़ाई की इजाजत नहीं दी गई और छोटी के नन्हे कदमों को स्कूल की तरफ कदम बढ़ाने ही नहीं दिए गए और वो लाचार और वह बस लालची नजरों से आते-जाते स्कूल जाते बच्चों को देखती रही... दृश्य- दो : हरियाणा का एक छोटा सा गांव, दूर केरल से इस गांव में "ब्याह" के नाम पर लाई गई उषा अपनी अजन्मी बिटिया की जिंदगी को लेकर पथराई सी आखों से काम तो खेत में कर रही है लेकिन मन में बवंडर मचा हुआ है, सास और पति ने धमकी दी है अगर इस बार भी लड़की हुई तो इस बार भी वही हश्र होगा जो पिछली बार हुआ था। उस वक्त एक टेस्ट में उसके गर्भ में बिटिया का पता लगते ही सास और पति ने उसे गर्भ में ही मरवा दिया था, लेकिन उषा इस बार किसी भी कीमत पर अजन्मी बिटिया की जान बचाना चाहती है, चाहती है, सास और पति से चीख-चीखकर पूछना कि इस बार तो "शादी" के नाम पर लड़की लाने केरल जाना पड़ा, लेकिन अगर लड़कियों की जिंदगियों को यूं ही खत्म करते रहे तो कहीं भी लड़की नहीं मिलेगी, लड़की नहीं रही तो संसार कैसे चलेगा, लेकिन सवालों का बवंडर उसके मन में ही उमड़-घुमड़ रहा है, हिरणी सी भयभीत वह लगातर सोच तो रही है लेकिन शब्द जबान पर आ ही नहीं पा रहे हैं... जी, ये भद्दी और घृणित सच्चाई आज की है और हमारे आस पास की ही है। भले ही हम सब यह सुनते हुए बड़े हुए हों कि स्त्री देवी है, बेटियां पूजनीय हैं, लेकिन अब भी काफी जगह चाहे महानगर हो या सुदूरवर्ती गांव, सच्चाई कुछ और ही है। बेटियों को पूजने की बात कहने वाले हमारे समाज में आज भी बड़ी संख्या में बेटियां मां के गर्भ में ही मारी जाने लगीं हैं। कितने ही लड़कियां स्कूल जाने को तरसती हैं, स्कूल की इमारत में जाना उनकी हसरत ही रह जाती है। अब केन्द्र सरकार ने इस बदनुमा दाग से अधिक आक्रमकता से निबटने का फैसला करते हुए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ को एक आंदोलन की तरह चलाने का मन बनाते हुए इसे अपने अन्य महत्वाकांक्षी अभियान के तरह चलाने की घोषणा की है। यह योजना प्रारंभ में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ऐसे 100 चुनिंदा जिलों में एक राष्ट्रीय अभियान के जरिए कार्यान्वित की जाएगी, जहां बालक-बालिकाओं का अनुपात बेहद कम है। खास बात यह है कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना का शुभारंभ हरियाणा से ही इसलिए किया गया है क्योंकि इसी राज्य में बालक-बालिका अनुपात सबसे कम यानी सर्वाधि‍क खराब है। ‘कन्या भ्रूण हत्या’ जैसी घटनाएं बदस्तूर जारी हैं और इस पाप के लिए कोई और नहीं, बल्कि‍ इन अजन्मी बेटियों के नासमझ माता-पिता, इनके अपने ही जिम्मेदार हैं। कुछ चंद सिक्कों की खातिर डॉक्टरी के नाम पर कसाई का काम कर रहे शिक्षित, झोला छाप डॉक्टर, घरेलू तरीकों से इन अजन्मी बच्चियों की जान ली जा रही है। कानून के बावजूद गांव, देहात और छोटे कस्बों, जगह-जगह ऐसे विज्ञापन आम नजर आते हैं कि हमारी मशीनें फट से बता देंगी कि गर्भ में लड़का है या लड़की और हम सब जानते ही हैं कि गर्भ में बिटिया का पता लगने पर उस काम-तमाम करने के इंतजाम भी वहां हैं। झांसी की रानी, इंदिरा गांधी, कल्पना चावला, किरण बेदी, बच्छेन्द्री पॉल, महादेवी वर्मा, इसरो की महिला वैज्ञानिक, ऐश्वर्या रॉय बच्चन, किरण शॉ मज़ुमदार, फातिमा बीबी, सानिया मिर्जा, सानिया नेहवाल, चंदा कोचर और लता मंगेशकर जैसी भारतीय समाज को गर्व से भर देने वाली महिलाओं के बावजूद यह स्थिति बेहद दुखद...। इस बात को शायद लोग भूल जाते हैं कि बेटियां भी अपने माता-पिता का नाम रोशन करती हैं और वक्त आने पर, खासकर बुढ़ापे में उनका सहारा भी बन सकती हैं। निष्ठुर सोच वाले ये भी नहीं समझ पा रहे हैं कि अगर बेटियां कम हो गईं तो वे अपने बेटों के लिए बहनें और बहुएं कहां से लाएंगे। सरकारी, गैर सरकारी तौर पर इस घृणित बुराई को रोकने के प्रयासो के बावजूद कन्या भ्रूण हत्याएं हो रही हैं। अब केन्द्र सरकार ने इस बदनुमा दाग से अधिक आक्रमकता से निबटने का फैसला करते हुए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ को अपने अन्य महत्वाकांक्षी अभियान के तरह चलाने की घोषणा की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ‘बालक-बालिका’ अनुपात बढ़ाना है। बालक-बालिका अनुपात (सीएसआर) से यह पता चलता है कि किसी भी राज्य या शहर अथवा देश में हर 1000 बालकों के अनुपात में कितनी बालिकाएं हैं। एक दुखद सच यह है कि कन्या भ्रूण हत्या की निर्मम घटनाओं के चलते भारत में यह अनुपात लगातार घटता जा रहा है। वर्ष 1991 में हर 1000 बालकों पर 945 बालिकाएं थीं, लेकिन वर्ष 2011 में हर 1000 बालकों पर 918 बालिकाएं ही थीं। आंकड़े बयान करते है कि इस दौरान हरियाणा में सबसे कम यानि 877 महिलाएं जबकि केरल में सर्वाधिक यानि 1000 के पीछे 1084 महिलाएं हैं।  यह योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय की संयुक्त पहल है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार यह योजना लड़कियों और महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करने और उन्हें सुरक्षा मयस्सर करने पर भी केंद्रित होगी। इस दुनिया में अपना पहला कदम रखने के लिए तैयार बच्चि‍यों के जीवन की रक्षा करना और उन्हें शिक्षि‍त कर अपनी जिंदगी में आने वाली तमाम चुनौतियों का सामना करने लायक बनाना ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना इस योजना का उद्देश्य है। देशभर में जन अभियान के माध्यम से सामाजिक मानसिकता को बदल कर और इस विषम विषय पर जागरूकता पैदा करके इस योजना को सफल बनाने की कोशि‍श की जाएगी। इसमें लड़कियों एवं महिलाओं से किए जा रहे भेदभाव को समाप्त करने पर भी जोर दिया जाएगा। बालक-बालिका अनुपात में बेहतरी को सुशासन के एक प्रमुख विकास संकेतक के तौर पर शामिल करना भी इसका एक उद्देश्य है। इस योजना की मुख्य रणनीतियों में सामाजिक लामबंदी एवं संवाद अभियान को बढ़ावा देना भी शामिल है ताकि सामाजिक मानदंडों में बदलाव लाने के साथ-साथ बालिकाओं को समान महत्व दिलाया जा सके।  इस अभियान में सभी प्रदेश और केंद्र शासित राज्यों के चुनिंदा शहरों को शामिल किया जाएगा।  महिला पुरुष अनुपात दर की निराशाजनक तस्वीर के बाद अब जरा जानें महिला साक्षरता की तस्वीर, वहां भी तस्वीर निराशाजनक है। 2011 मे महिला साक्षरता दर 65.46% तथा पुरुष साक्षरता दर 82.14% दर्ज की गई है। बिहार में यह दर सबसे कम यानि 46.40% उत्तर प्रदेश में 51.36%, हरियाणा में 56.91% तथा राजस्थान में 47.76% है। खुशी की बात यह है कि केरल में महिला साक्षरता दर 100 यानि शत-प्रतिशत है। सूत्रों के अनुसार इस योजना की मुख्य रणनीतियों में सामाजिक लामबंदी एवं संवाद अभियान को बढ़ावा देना भी शामिल है ताकि सामाजिक मानदंडों में बदलाव लाने के साथ-साथ बालिकाओं को समान महत्व दिलाया जा सके।  ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ यानी बेटियों का उनका हक दिलाने वाला अभि‍यान निश्चि‍त रूप से एक जनहित और राष्ट्रहित क्रांति है। बालिका के सशक्तिकरण पर केंद्रित महत्वपूर्ण योजना 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' पर केंद्र सरकार 100 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसका उल्लेख वित्त वर्ष 2014-15 के बजट में किया गया है।  हालांकि,  'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना के आलोचकों की भी कोई कमी नहीं है। इन लोगों का कहना है कि इस योजना को सफल बनाने के लिए मामूली रकम के बजाय भारी-भरकम धन का आवंटन किया जाना चाहिए। इसके साथ ही कन्या भ्रूण हत्या करने वालों पर ज्यादा-से-ज्यादा सख्ती बरतने की भी जरूरत है ताकि अन्य लोगों के मन में भय पैदा हो। जाहिर है, इसके लिए एक कड़ा कानून बनाना होगा। इसी तरह गर्भधारण पूर्व और जन्म पूर्व जांच तकनीकों का धड़ल्ले से इस्तेमाल करने वाले डॉक्टरों पर भी कड़ाई से लगाम कसने की जरूरत है। इसके अलावा स्कूली शि‍क्षा के दौरान ही बालिकाओं के साथ समानता का भाव बालकों के जेहन में पैदा करने की कोशि‍श की जानी चाहिए, तभी आगे चलकर वे उनके साथ भेदभाव करने से बच सकेंगे। यही नहीं, इसका फायदा उनकी नई पीढ़ी को भी मिलेगा।  इनका कहना है कि बालिकाओं के खि‍लाफ हिंसा की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर निश्चि‍त तौर पर सुनियोजित तरीके से कदम उठाने पड़ेंगे। पैसे की भारी किल्लत के साथ अन्य कष्ट उठाकर भी अपनी बेटियों की पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें आर्थि‍क दृष्टि‍ से सक्षम बनाने वाले माता-पिता को सार्वजनिक तौर पर सम्मानित करने की भी आवश्यकता है, ताकि वे समाज के अन्य लोगों के लिए नजीर बन सकें और संकुचित सोच वाले लोग उनसे प्रेरणा ले सकें। इसके साथ ही बहादुरी के कारनामे दिखाने वाली लड़कियों को भी सार्वजनिक तौर पर सम्मानित करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही बालिकाओं एवं महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर गौर करने और उनके लिए विशेष सरकारी एवं निजी अस्पताल खोले जाने की भी जरूरत है। इसी तरह नई पीढ़ी का मार्गदर्शन भी अभी से ही करना जरूरी है। इन सब का भी सकारात्मक असर हमारे समाज पर अवश्य पड़ेगा और आगे चलकर लड़कियों एवं महिलाओं के साथ समानता का भाव लोगों के मन में पैदा होगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' के प्रभावी अभियान से सूरज ठेकेदार सा निशा और छोटी को भी पढ़ने का काम सौंपेगा और उषा की अजन्मी बिटिया सूरज की रोशनी देखने इस दुनिया में कदम रखेगी और पढ़-लिखकर सूरज ठेकेदार उसे भी कोई अच्छा काम काज सौंपेगा। आमीन...

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मुंबई। आमिर खान की फिल्म " पी के ..." को लेकर काफी हंगामा हुआ था कि यह एक धर्म के खिलाफ बनी है। वैसे "पी के.."का मतलब होता है पाकिस्तान। फिल्म के हंगामे के बाद भोजपुरी में ४० फिल्मों से ज्यादा फिल्मों में बतौर हीरो काम करने वाले एक्शन हीरो सुदीप पांडे ने भी फिल्म देखा और उनको भी लगा लोगों का आमिर खान की फिल्म के बारे में कहना काफी हद तक ठीक है। इस कारण उन्होने आमिर खान की फिल्म के तर्ज पर एक हिंदी फीचर फिल्म," हूँ'' बनाने का फैसला किया और उसके सब्जेक्ट पर काम चल रहा है। इसका निर्माण सुदीप पांडे प्रोडक्शन के बैनर तले हो रहा है और जिसके लेखक और निर्देशक विजय शंकर है।   भोजपुरी में 'शराबी', 'कुर्बानी', खूनी दंगल' जैसी कई हिट फिल्मों के हीरो सुदीप पांडे कहते है," मैं आमिर का फैन हूँ और ऐसे कई लाखों लोग उनके फैन है। उनको इस तरह का रोल नहीं करना चाहिए, हमारा देश धर्मनिरपेक्ष देश है। हम कलाकार है और कलाकार का कोई धर्म नहीं होता है सिवाय लोगों का मनोरंजन करने के। आज सलमान भाई गणेशजी की पूजा करते है, यह उनका बड़प्पन दर्शाता है। फिल्म ओह माई गॉड बनी थी, जोकि एक बैलेंस फिल्म थी। अब मैं भी अपनी फिल्म,' हूँ.." बना रहा हूँ, लेकिन इसमे किसी एक धर्म का न दिखाकर ,सभी को बैलेंस कर के दिखाने वाला हूँ। जो लोग आमिर खान की फिल्म से आहत हुए है यह उनकों काफी पसंद आएगी। 'हूँ' के जरिये हम हिंदुस्तान दिखा रहे है।"          

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आचार्य प्रवर ए.एस. विज्ञानाचार्य के सान्निध्य में चल रहे यमुना आन्दोलन के प्रचार प्रसार के लिये आज चैथा रथ गोविन्द मठ वृन्दावन से हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया गया। यह रथ  कुंवर सिंह निषाद के नेतृत्व में यमुना किनारे - किनारे प्रचार प्रसार करेगा। प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी यमुना रक्षक दल युवामोर्चा जिलाध्यक्ष प्रवीण चैधरी को सौंपी गयी है। जो पाँच हजार नौजवानों को 11 मार्च संसद मार्च के लिये तैयार करेंगे। वहीं यमुना रक्षक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत जयकृष्ण दास के साथ परमेश्वर गीता मंदिर के महन्त श्री सनत कुमार, हिताश्रम के महन्त श्री कमलदास जी महाराज, संकीर्तन कुंज के महन्त बलराम दास बाबा एवं भ्क्ति निकेतन के महन्त श्री स्वतन्त्रतानन्द जी महाराज तथा सुप्रीम कोर्ट के वकील श्री विश्वामित्र भारती द्वारा भक्ति निकेतन आश्रम में बैठक के दौरान मिला यमुना आन्दोलन को समर्थन। वहीं साध्वी भोली माता जी पंजाब, बठिण्डा से आकर यमुना रक्षक दल एवं 11 मार्च के आन्दोलन के लिये पूर्ण रूपेण समर्थन दिया। इसी कड़ी में आज ब्रज अकादमी वृन्दावन की सचिव डाॅ0 राकेश हरिप्रिया जी ने इस आन्दोलन को विशाल जन आन्दोलन मे परिवर्तित करने के लिये केम्प कार्यलय मे आकर अपने समस्त पदाधिकारी एवं भक्तों के साथ समर्थन दिया और कहा कि हम सभी साधक यमुना जी के निर्मल स्वरूप को ब्रज में देखकर कृत-कृत्य होना चाहते हैं। संत वाणी में वर्णन हैं कि ‘‘यमुना निहारिवेते यम ना निहारि है ‘‘ अर्थात जब हम निर्मल यमुना जी का दर्शन कर लेंगे तो फिर हमें यमराज का दर्शन नही करना पड़ेगा। वृन्दावन के प्रसिद्ध विद्वान एवं यमुना भक्त पं0 डाॅ0 रामदत्त मिश्र को यमुना रक्षक दल का राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी बनाया गया। एवं उन्होने कहा कि मीडिया का सम्पूर्ण कार्य मिश्र जी देंखेगे। डाॅ0 रामदत्त मिश्र ने कहा कि इस पुनीत कार्य में सभी संत महन्तों एवं कथा व्यासों को राग द्वेष भूलकर सहयोग करना चाहिये। इस अवसर पर साधक मदनलाल गौतम, ब्लाॅक अध्यक्ष राधाबल्लभ शर्मा, युवामोर्चा महासचिव मुनेन्द्र कुमार, प्रेमनारायणजी, शैलेन्द्र बघेल, मंजीत मिश्र, कल्याणानन्दजी, रमेश यादव, भजनानन्द, लोचन दास, मालती देवी, घनश्याम अग्रवाल, रामप्रकाश आदि उपस्थित थे।  हर ब्रजवासी का जीवन खतरे में हैं: डाॅ0 राजवीर सिंह प्रदूषित हो रहे यमुना को बचाने के लिये एवं हथिनी कुण्ड से माँ यमुना को मुक्त कराने के लिये ब्रजवासियें एवं यमुना भक्त ने कमर कस ली है। अबकी बार माँ यमुना को मुक्त करा कर ही दम लेंगे। आज दिनांक 25 फरवरी को जिला प्रभारी डाॅ0 राजवीर सिंह एवं अजयपाल सिंह के नेतृत्व में यमुना प्रचार रथ के द्वारा जैंत, चैमुहां, अकबरपुर, देवपुरा, पाली, ततारपुर, डरावरी, तथा संक्षेत में जनजागरण के साथ 11 मार्च वाहन यात्रा एवं 12 मार्च की पदयात्रा का प्रचार-प्रसार किया गया। जहां हजारों यमुना भक्तों एवं ब्रजवासियों 11 मार्च को चलने का आह्वान किया। जिला प्रभारी डाॅ0 राजवीर सिंह ने सम्बोधित करते हुये कहा कि दूषित जल के कारण ब्रजवासियों का जीवन खतरे में है। यमुना को अविरलता को ब्रज में लाना ही होगा। ब्रजवासी चैन से नहीें बैठेगें, केन्द्र सरकार को ढाुका कर ही दम लेंगे। जहरीले जल के कारण अनेकों बीमारियों का साम्राज्य लगा हुआ है।  सदानीरा बहने वाली यमुना को हथिनी कुण्ड बैराज पर बांध दिया गया है। जिसके परिणाम स्वरूप दिल्ली और हथिनी कुण्ड के बीच यमुना का जल सूख जाता है। दिल्ली से आगे मथुरा और आगरा में यमुना क ेजल के स्थान पर अनेकोे वृह्द गंदे नालों का पानी है, जिससें यमुना दूषित हो रही है और यमुना का जल जहरीला होता जा रहा है। उन्होने गाँव-गाँव जाकर लोगों की पीड़ा सुनी जिससे पता चला कि अशुद्ध जल पीने के कारण अनेको लोग बीमार हैं। ठा. अजयपाल सिंह ने कहा कि यमुना को हथनी कुण्ड से मुक्त एवं ब्रज में यमुना की अविरल धारा को पुनः लाने के लिये सभी यमुना भक्तों एवं ब्रजवासियों को 11 के आन्दोलन में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेना होगा।  इस अवसर पर लोकगीत गायक सियाराम यादव, शिवचरण, परशुराम, प्रेम सिंह, मेघश्याम, हरिदास, दर्शन सिंह, सोनू ठाकुर, तेजपाल सिंह, सुरेन्द्र प्रताप सिंह आदि उपस्थित थे।  

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राया। कस्बे के मथुरा रेलवें लाइन पर स्थित गौसना फाटक गेट नम्बर 350 को बन्द किये जाने के विरोध में स्थानीय नागरिकों द्वारा दिया जा रहा है धरना आज भी जारी रहा। आन्दोलनकारियों ने धरना स्थल पर काले झण्डें लगाकर विरोध जताया। धरने में भगवान सिंह, अशोक कुमार धाकरें, मानसिंह, सोहनलाल, सोरन सिंह, महादेव सिंह, दलवीर सिंह ने प्रशासन से जन समस्याओं को देखतें हुए उक्त फाटक को अतिशीघ्र खुलवाये जाने की माॅग की। धरने की अध्यक्षता अशोक धाकरें तथा संचालन राजू पंडित ने किया।

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मथुरा। प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ एंव मूल निवासियों को शासकीय व्यय पर हरिद्वार एंव ऋषिकेश की तीर्थ यात्रा कराये जाने हेतु व्यवस्था की गई है, और उन्होने इस यात्रा को समाजवादी श्रवण यात्रा का नाम दिया है। नवनीत सहगल प्रमुख सचिव धमार्थ कार्य विभाग उ0प्र0 लखनऊ ने जिलाधिकारी को भेजे गये पत्र में अवगत कराया है कि उक्त समाजवादी श्रवण यात्रा का शुभारम्भ 9 मार्च को लखनऊ से किया जायेगा। जिसमें प्रत्येक जनपद से वरिष्ठ नागरिक इस समाजवादी श्रवण यात्रा में सम्मलित होगें। लखनऊ से रेल मार्ग द्वारा यह यात्रा करते हुए वरिष्ठ नागरिक हरिद्वार तथा ऋषिकेश जायेगें तथा वापसी में यह समाजवादी श्रवण यात्रा लखनऊ में ही समाप्त होगी। श्री सहगल ने बताया कि यह समाजवादी श्रवण यात्रा प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों के लिए निःशुल्क होगी। इस यात्रा में किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं देना होगा बल्कि यह यात्रा पूर्णतया निःशुल्क होगी उन्होने यह भी बताया कि इस समाजवादी श्रवण यात्रा के दौरान वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा तथा स्वास्थ एंव खान-पान का पूरा ध्यान रखने की भी व्यवस्था शासन द्वारा की गई है। उन्होने कहा कि इस यात्रा के दौरान ट्रेन में वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा हेतु पुलिस फोर्स एंव स्वास्थ की देखभाल के लिए चिकित्सों तथा स्वास्थ कर्मियों की टीमे मय पर्याप्त दवाओं के साथ समाजवादी श्रवण यात्रा शुरू होने से लेकर यात्रा समाप्ति तक तैनात रहेगी।  

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मथुरा। उ0प्र0 कांग्रेस विधान मण्दल दल के नेता तथा विधायक मथुरा वृन्दावन प्रदीप माथुर ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, लोक निर्माण विभाग मंत्री शिवपाल यादव, मुख्य सचिव आलोक रंजन, प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग, मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग से भंेट की तथा मथुरा के विकास के मुद्दों के साथ साथ प्रमुख रूप से मथुरा वृन्दावन की प्रमुख सड़कों के निर्माण पर चर्चा की। इससे पूर्व श्री माथुर ने मथुरा  तथा देहातों की कुछ प्रमुख सड़कों के आगणन बनवाकर लखनऊ में विभिन्न प्रक्रियाओं से पास कराते हुए प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग को भिजवा दी थी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एवं लोक निर्माण मंत्री शिवपाल यादव ने मुख्य अभियंता श्री गुप्ता को बुलावाकर मथुरा शहर और देहात की प्रमुख सड़कों को स्वीकृत करने के लिये प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग से कहा। इन प्रमुख मार्गाें में डीग गेट से भरतपुर गेट होते हुए कृष्णा नगर तिराहे तक, महोली रोड़ नेशनल हाईवे से नये बस स्टैण्ड तक, बीएसए इंजीनियरिंग काॅलेज से राधिका बिहार होते हुए नेशनल हाईवे तक, सौंख अड्डे रेलवे फाटक से डैम्पीयर नगर के तिराहे तक, पुराने क्वालिटी होटल से म्यूजियम के टी प्वांइट तक, तथा देहात में गोवर्धन रोड़ जमुना धाम से बाकलपुर होते हुए गिरधरपुर तक, सौंख रोड़ से अमरा का नगला होते हुए नौगाॅव तक, नरहौली गाॅव मंे एटीवी नगर के बगल से होते हुए रेलवे क्रासिंग तक, मथुरा भरतपुर रोड़ से धनगाॅव होते हुए भुडरशू तक, आट्स गाॅव से नगला बिहारी तक तथा बाबू गढ़ सकराया तक, गोवर्धन रोड़ से गिरधरपुर गाॅव तक, देवी आट्स से जोनाई तक शामिल है जिनके निर्माण कराये जाने की कार्यवाही पूर्ण करा ली गई हैं तथा इन सड़कों के लिए शीघ्र धन आवंटन हो जायेगा और इस सड़कों का निर्माण कार्य शीघ्र पूर्ण होगा। श्री माथुर ने यह भी बताया कि उनके अथक प्रयासों के बाद  लोक निर्माण मंत्री शिवपाल यादव, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश तथा प्रमुख सचिव लोक निर्माण तथा प्रबन्ध निदेशक यूपी ब्रिज कारपोरेशन ने डैम्पीयर नगर स्थित मुर्गा फाटक पर रेलवे ओरव ब्रिज बनाने के निर्माण पूर्णतः स्टेट सैक्टर से बनाने की सहमति बना ली है तथा उसकी डीपीआर बनाई जा रही है। आने वाले उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण बजट में इसे पूर्ण रूप से समावेषित कराये जाने की प्रबल सम्भावना है। इसकी स्वीकृति के बाद मथुरा को एक नया रेलवे ओवर ब्रिज का तोहफा मिलने जा रहा है।

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मथुरा। मगोर्रा क्षेत्र में नशीले पदार्थों की बिक्री नहीं रूक रही है। अब लोग इसे इलाके की पुलिस की मिलीभगत बताते हैं लेकिन स्थिति यह है कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर गांजा सहित मादक पदार्थ बिक रहे हैं। इसमें एक पुलिस कर्मचारी की मिलीभगत भी बतायी जा रही है।  

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बल्देव। बल्देव मथुरा मार्ग पर जेनर्म बसों की कमी के कारण प्राइवेट बस संचालक आॅवर लोडिग सवारी भरके बल्देव मथुरा मार्ग पर दौडते नजर आते है। जिसके चलते उत्तर प्रदेश परिवाहन निगम को घाटे का सामना करना पडता है जबकि डग्गेमार वाहन संचालकों द्वारा यात्रियों से दुव्र्यवहार आये दिन किया जाता है। इस तरफ एआरटीओ द्वारा कार्यवाही न करने के कारण कभी भी बडा हादसा हो सकता है।

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जमीन के बदले मुआवजा राशि पर बनी सहमति मथुरा। शहर के महौली रोड पर नये बस स्टेंण्ड पर आये दिन लगनें वाले जाम की समस्या से निजात हेतु विद्यायक प्रदीप माथुर द्वारा किए जा रहें प्रयास अब सफल होने लगें हैं। विद्यायक प्रदीप माथुर के अथक प्रयासों से रोडवेज व पराग डेरी के मध्य चल रहें लेने देने के विवाद को समाप्त कराते हुए अब नये बस स्टेंण्ड पर बस स्टेंण्ट स्थानान्तरण का रास्ता सापफ हो गया हैं। उ0प्र0 कांग्रेस विधान मण्डल दल के नेता तथा विधायक मथुरा वृन्दावन प्रदीप माथुर ने लखनऊ से बताया कि मथुरा से नये बस स्टेण्ड को नेशनल हाईवे स्थित पराग डेरी परिसर में स्थानांतरित करने का मसला तय हो गया है। पहले बात इस बात पर अटक रही थी कि दुग्ध विकास विभाग पराग डेरी परिसर, मथुरा की 5 एकड़ भूमि को 33 वर्ष के पट्टे पर दे रहे थे और परिवहन विभाग से लगभग 15 करोड़ रू0 माॅग कर रहे थे। इस पर परिवहन विभाग को आपत्ति थी। विधायक श्री माथुर की वार्ता हाल ही में पद स्थापित श्रीमती अर्चना अग्रवाल प्रमुख सचिव दुग्ध विकास से हुई उन्होंने मुख्य सचिव आलोक रंजन के साथ हुई बैठक एंव उनके द्वारा किये गये आदेशों को जब संदर्भित किया तो इस पर श्रीमती अर्चना अग्रवाल ने बताया कि शासन एवं आपकी बात मान ली गई है और मथुरा में स्थित पराग डेरी परिसर की भूमि 90 साल के पट्टे पर उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम को दे दी जायेगी और इस संदर्भ के आदेश उन्होंने पारित कर दिये है। विधायक माथुर ने बताया कि अब नये बस स्टेण्ड को नेशनल हाईवे पराग डेरी परिसर पर स्थानांतरित करने का मार्ग प्रशस्त हो गये है और इस वर्ष के आने वाले वित्त बजट में बस स्टैण्ड के निर्माण हेतु धनराशि भी आवंटित करा दी जायेगी जिससे कि एक नये अच्छे बस अड्डे का निर्माण हो पायेगा। ज्ञात रहे कि पिछले वित्त वर्ष में विधायक माथुर के अथक प्रयास से वृन्दावन में बस अड्डे का निर्माण तथा मथुरा में स्थित बस स्टैण्ड को नेशनल हाईवे पर स्थानांतरित कराने हेतु 10 करोड़ रू का बजट में प्रावधान किया गया था परन्तु दुग्ध विकास विभाग एंव परिवहन विभाग की लाल फीताशाही के चलते तथा अनिर्णय की स्थिति के कारण यह कार्य नही हो पाया।

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