मथुरा

युवती की हत्या के बाद एक्सप्रेस वे जाम करने का प्रयास करते युवती के परिजन राया। थाना क्षेत्र के गाॅव ककरेटिया के जंगलों में एक कूंए में युवती का शव मिलनें से क्षेत्र में सानसनी फैल गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटना स्थल का निरीक्षण कर शव को कब्जें में कर मृतका की शिनाख्त कर उसके परिजनों को मौके पर बुला लिया। परिजनों ने आक्रोशित होकर  एक्सप्रेस वे पर जाम लगा दिया जिसे जल्द ही पुलिस द्वारा समझा बुझा कर खुलवा लिया गया। परिजनों का आरोप है युवती एक कथित प्रेमी ने उसकी हत्या कर शव को कुंए में फैंका है। पुलिस ने युवती के शव का पंचनामा भर कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा हैं। परिजन युवती के प्रेमी पर हत्या करने का आरोप लगा रहे है वहीं इसे आॅनर किलिंग कके मामले के रूप में भी देखा जा रहा है। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। मिली जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र के गाॅव ककरेटिया में आज प्रातः काल खेतों में शौच के लिए गये ग्रामीण हाथ धोने को खेत पर बनें कूंए पर पहुंचे तो उन्हें कूंए में युवती का शव तैरता मिला जिसे देख ग्रामीणों में सनसनी फैल गई। घटना की जानकारी पाकर सैकड़ों ग्रामीण एकत्रित हो गये। जिन्होंने घटना की सूचना स्थानीय पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटना स्थल का निरीक्षण कर शव को कूंए से वाहर निकलवाया और मृतका की शिनाख्त ज्योति पुत्री जगदीश निवासी गांव कटैला एवं हाल निवासी लंकापुरी बिचपुरी थाना राया के रूप में कर उसके परिजनों को भी मौके पर बुला लिया। आक्रोशित होकर परिजनों ने एक्सप्रेस वे पर जाम लगा दिया जिसे जल्द ही पुलिस द्वारा समझा बुझा कर खुलवा लिया गया। पुलिस ने शव को पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए भेजा हैं। पुलिस के अनुसार युवती की हत्या कर शव को छिपाने के उद्देश्य से शव कूंए में फैंका गया हैं। वहीं मृतका के परिजनों का आरोप है कि युवती एक युवक के प्रेम जाल में फंसी हुई थी और विगत रात्रि घर में भी इसी बात को लेकर काफी विवाद हुआ था। इसी नाराज होकर युवती घर से भाग निकली थी। परिजनों ने युवती के कथित प्रेमी द्वारा युवती की हत्या करने का आरोप लगाया है वहीं लोग इसे आॅनर किलिंग का भी मामला बता रहे है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच करने के प्रयास में जुटी हुई हैं। जबकि युवती का कथित प्रेमी अभी तक फरार है पुलिस उसे भी खोजने के प्रयासों में है। -

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तौमस के कथित मित्रों की राय पर पुलिस द्वारा किया गया तुगलकी फैसला आखिर कितना सही है। आखिर असम से अपने घर बार को छोड़ कर तौमस के सहारे पर साथ जीने मरने की कसमें खाकर यहां आयी सीमा परियाल अब जब जीवन के बीच रास्ते में छोड़ दी गयी है तो वो किस के सहारे जियेगी और अब उसका क्या होगा। कथित समाजियों और पुलिस ने भी अपने स्वार्थों के चलते चन्द पलों में ही पति पत्नि के सम्बन्धों को खेल की भांति तुड़वा डाला। अपने घर और अपनों से हजारों किलो मीटर दूर राधाकुण्ड में अब उस अकेली अबला का क्या हश्न होगा जब कि थाने से जाते जाते वो कहती रही कि अब वो किसके सहारे रहेगी, वो तौमस के बिना नहीं रह पायेगी और मर जायेगी। क्या सच में ही वो अपने कहे अनुसार वो तौमस के वियोग मंे मर जायेगी या कहीं ये सदमा उसके जीवन को ही न बदल दे। सम्भव है अकेला जानकर भी कहीं कोई अनहोनी उसके साथ घटित न हो जाये। यदि ऐसा कुछ होता है तो इस सबका जिम्मेदार कौन होगा? फैसला कराने तौमस के वे कथित मित्र या थाना की जिम्मेदार पुलिस ? ये अब समय की गर्त में छिपा है। कस्बा राधाकुण्ड में इसी प्रकार से सैंकड़ों विदेशी युवक युवती किराये पर मकान लेकर या विभिन्न धर्मशालाओं और गैस्ट हाउसों में पिछले लम्बे समय से रहते चले आ रहे है। जिनमें अनेकों के तो वीजा अवधि भी समाप्त हो चुकी और उनके सही अते पते भी यहां कोई नहीं जानता है। वास्तव में ये जांच का विषय है कि कैसे बिना किसी अते पते के लोग कैसे इन्हें किराये पर रख लेते है वीजा समाप्त होने के बावजूद भी ये कैसे यहां रह जाते है। यहां रहकर ये लोग यहां युवक युवतियों को अपना शिकार बनाते है और उनसे अपना मतलब सिद्ध होते ही उन्हें बीच मंझधार मंे फंसा हुआ छोड़ कर भाग निकलते है। इनके खिलाफ कोई कार्यवाही भी नहीं हो पाती। इससे बचने को ये लोगा स्थानीय लोगों का एक ऐसा सुरक्षात्मक काॅकस बना लेते है तो हर स्थिति में इन्हे बचाने को भी तैयार रहता है।

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मेलांे की विशाल तैयारियों का नहीं दिखा मिलावटखोरों पर कोई असर गनीमतः बड़े खतरांे से बच गयी लाखों जिन्दगियां, नहीं घटी कोई दुर्घटना  मथुरा। जनपद में अपूर्व जोश और उत्साह के साथ ही दीपावली पर्व का समापन हो गया है। वहीं गोवर्धन पूजा, यम द्वितीया के यहां लगने वाले विशाल मेले भी सकुशल सम्पन्न हो गये है। किन्तु इस दौरान यहां जनपद भर मंे बेखौफ होकर मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री हर ओर होती नजर आयी और जनपद भर में खाद्य और आपूर्ति विभाग द्वारा कहीं भी इन पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी न ही इनके विरूद्ध कोई विशेष अभियान चलाया गया। गनीमत तो ये रही कि इन मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से कहीं कोई बड़ी दुर्घटना घटित नहीं हो सकी। इन त्यौहारों की समाप्ति के साथ ही सक्रिय हुए खाद्य विभाग के ऐजेन्ट अब बाजारों में नजर आने लगे है। जो अपने तयशुदा दुकानदारों से त्यौहार पर एकत्रित हुई रिश्वत की वसूली को ले जाने में जुटे है।  समूचे हिन्दुस्तान के साथ ही ब्रज मण्डल में अनोखे जोश और उत्साह के बीच धूमधाम से मनाये जाने वाले हिन्दुओं के प्रमुख पर्व दीपावली पर यहां जमकर सिन्थैटिक दूध और उनसे बनी मिठाईयां बेझिझक औैर बेखौफ होकर बेची गयी। जनपद के लगभग सभी छोटे बड़े दुकानदारों ने लम्बे स्टाॅक में रखी बासी अथवा दूध घी की कमी के चलते मिलावटी तैयार हुई मिठाईयां एवं अन्य खाद्य सामिग्री धड़ल्ले से बेची। जिला प्रशासन के किसी भी बड़े अफसर ने अथवा खाद्य और आपूर्ति विभाग के किसी अधिकारी ने न तो इस ओर ध्यान ही दिया और न देना चाहा। कागजों में मेले के लिये तैयार हुए अभियान भी कागजों में ही सिमट कर रह गये। जनपद के हर गांव, कस्बा, नगर और शहर में धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और यम द्वितीय पर्व के पांच दिनों में करीब 25-30 हजार दुकानों से 80 करोड़ से सवा अरब रूपये कीमत की मिठाईयां लोगों द्वारा खरीदी गयी। इनमें से 90 प्रतिशत से भी अधिक दुकानदारों ने लम्बे स्टाॅक में रखी बासी अथवा दूध घी की कमी के चलते मिलावटी सिन्थैटिक दूध की मिठाईयां बेखौफ होकर बेची लेकिन खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को इसकी कानों कान खबर तक नहीं हो सकी। इस दौरान खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने कहीं भी कोई भी ठोस या बड़ी कार्यवाही इन दुकानदारों के खिलाफ अमल में नहीं लाया। न ही उन्होंने मेला तैयारियों की प्रशासनिक बैठकों में निर्धारित हुए अभियानों को ही धरातल पर उतारा। बल्कि उन्होंने सिर्फ सिर्फ कागजों में इसकी खाना पूर्ति कर कर्तव्य की इतिश्री कर ली। इसे ब्रज मण्डल के आराध्य देव की कृपा कहें या कुछ औैर वरना इतने बड़े स्तर पर बेची और खरीदी गयी मिठाईयों और खाद्य सामिग्रियों से लाखों के जीवन पर बन आयी थी इसके बावजूद ये गनीमत ही रही कि कहीं कोई अप्रिय घटना सामनेे नहीं आयी। वरना खाद्य और आपूर्ति विभाग की लापरवाही से तो लाखो का जीवन खतरे में पड़ ही गया था।  हमारे सूत्रों से मिली जानकारी की माने तो इन त्यौहारों के समापन के बाद सक्रिय हुए विभागीय ऐजेन्ट अब जनपद भर के बाजारों में नजर आने लगे है। ये एजेन्ट यहां बाजारों में मेले के दौरान किसी भी प्रकार की खाद्य सामिग्री को बेचने की एवज मंे तय की हुई धनराशि को लेने आये है। हर महीने होने वाली ये अवैध वसूली हर बार की तरह दीपावली पर कई गुना अधिक की जाती है। खाद्य निरीक्षकों को पहुंचायी जाने वाली ये धनराशि बाजारों में दुकानदारों द्वारा स्वतः ही एक दुकानदार के पास एकत्रित कर ली जाती है। इसी तरह हर गांव में एक दुकानदार, कस्बों में करीब दर्जन भर दुकानदार, नगरों व शहरों में इनकी गिनती सैंकड़ों तक पहुंच जाती है। इन दुकानदारों द्वारा खाद्य निरीक्षकों के द्वारा निश्चित किये गये एजेन्टों को ये राशि समय से अदा कर दी जाती है। खाद्य निरीक्षक को एजेन्टों के माध्यम से पहुंचन वाली इस राशि का बंटवारा अधिकारियों तक किया जाता है। इसी कारण कोई भी अधिकारी अपने अवैध वूसली के इन श्रोतों को बन्द करने का प्रयास ही नहीं करता है। चन्द पैसों की खातिर धड़ल्ले से चलवाये जा रहे जहर के इस कारोबार में लगभग हर स्तर तक पहुंचायी जाने वाली मासिक रकम इसे बन्द नहीं होने देती है। वहीं इस कारोबार में लगे लोग दीपावली के पर्व का हर वर्ष बेसब्री से इन्तजार करते है कि कब दीपावली आये और उनकी चांदी कट सके। 

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मथुरा। थाना फरह क्षेत्र अन्र्तगत फरह चैराहे के पास 30 वर्षीय पैदल चल रहे पिता पुत्र को बुलेरो ने टक्कर मार दी। जिससे पिता की मौके पर ही मौत हो गई तथा उसका ढ़ाई वर्षीय बालक भी घायल हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।  मिली जानकारी के अनुसार गोपाल उम्र 30 वर्ष पुत्र महावीर निवासी गांव धर्मपुरा चैकी ओल थाना फरह अपने ढ़ाई वर्षीय पुत्र को डाॅक्टरों के यहां दिखाने जा रहा था। तभी फरह चैराहे के पास तेज गति से आती बुलेरो गाड़ी नम्बर आरजे 11 यूए 1133 के चालक ने गाड़ी को लापरवाही से चलाते हुए पैदल चल रहे पिता पुत्र में टक्कर मार दी जिससे गोपाल की घटना स्थल पर ही मौत हो गई तथा उनका पुत्र घायल हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मृतक को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया तथा ढ़ाई वर्षीय बालक को उपचार के लिए स्वर्णजयंती में भर्ती कराया।

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मथुरा। एसओ रिफाइनरी महेश यादव ने क्षेत्र की जनता में भय व आतंक फैलाने पर अमरचंद उर्फ बबली पुत्र छतर सिंह निवासी भुड़रसू रिफाइनरी आदि चार लोगों को धारा 110 में निरुद्ध किया हैं।

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मथुरा। उद्यमिता विकास जैसे महत्त्वपूर्ण विषय पर जीएलए विश्वविद्यालय के इन्स्टीट्यूट आॅफ बिजनैस मैनेजमेन्ट में भारतीय प्रबन्धन संस्थान अहमदाबाद और नर्चर टैलेन्ट अकादमी द्वारा एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ, जिसमें नर्चर टैलेन्ट अकादमी के सीईओ अमित ग्रोवर व उनकी टीम द्वारा विद्यार्थियों को अपने उद्यम को स्थापित करने के गुण सिखाये गये। इस कार्यशाला के अन्तर्गत एमबीए, बीबीए, बीकाॅम, बीटैक सहित कई अन्य पाठ्यक्रमों के छात्रों को सीखने का मौका मिला। इस दौरान अमित ग्रोवर ने छात्रों को बताया कि किसी भी उद्यम को विकसित करने के लिए वर्तमान में सबसे श्रेष्ठ और सरल साधन डिजीटल प्रमोशन है, जिसके अन्तर्गत हम किसी भी सोषल साइट या बेवसाइट पर उद्यम से सम्बन्धित विज्ञापन देकर उसका प्रचार कर सकते है। विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो. आनन्द मोहन अग्रवाल ने बताया कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में आगे बढ़ने के लिए विद्यार्थियों में कुशल व्यक्तित्व व उद्यमिता के गुण होना बेहद जरूरी है, जिससे समाज व राष्ट्र का सुदृढ़ निर्माण किया जा सके। इस कार्यशाला के दौरान एक बिजनैस प्लान प्रतियोगिता भी आयोजित की गयी, जिसमें प्रथम स्थान पर रहे बीटैक तृतीय वर्ष के छात्र बल्देव पटवारी व उनकी टीम ने साॅलिड वेस्ट मैनेजमेन्ट पर प्लान प्रस्तुत करते हुए बताया कि किस प्रकार हम बेकार चीजों का सदुपयोग करते हुए उसकी उपयोगिता को बढ़ाकर उद्यमिता का विकास कर सकते है। वहीं बीबीए फैमिली बिजनैस प्रथम वर्ष के शुभम व शिवानी की टीम को क्रियेटिव फर्नीचर्स बिजनैस आइडिया प्रस्तुत करने पर दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। प्रतियोगिता में तृतीय स्थान के लिए छात्रों के दो समूहों में टाई रहा। जिसमें बीटैक कम्प्यूटर साइंस द्वितीय वर्ष के छात्र अरूण विश्वकर्मा व पार्थदत्त ने गेम डवलपमेन्ट पर बिजनैस प्लान प्रस्तुत किया और एमबीए प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य व उनकी टीम ने वैडिंग प्लान पर अपना प्लान प्रस्तुत किया। प्रोग्राम के अन्तर्गत विजेता टीमों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र वितरित किये गये। कार्यक्रम का कुषल संचालन कल्चरल काॅर्डिनेटर अवनीश शर्मा एवं प्रबन्धन विभाग के विद्यार्थियों अनुराग विश्वकर्मा, प्रियंका कपूर, वंशज राॅय आदि ने किया। इस अवसर पर प्रो. विकास त्रिपाठी, प्रो. सोमेश धमीजा, अरूण कौशल, कुशाग्र कुलश्रेष्ठ, शैफाली गर्ग, मनीशा पाराशर आदि गणमान्य शिक्षकगण उपस्थित रहे।

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