नई दिल्ली : सरकार ने बफर स्टॉक के लिए 30 हजार मीट्रिक टन और दालों का आयात करने का निर्णय लिया है, जिसमें 20 हजार मीट्रिक टन अरहर और 10 हजार मीट्रिक टन उड़द दालें शामिल होंगी।
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नई दिल्ली : सरकार ने बफर स्टॉक के लिए 30 हजार मीट्रिक टन और दालों का आयात करने का निर्णय लिया है, जिसमें 20 हजार मीट्रिक टन अरहर और 10 हजार मीट्रिक टन उड़द दालें शामिल होंगी।
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नई दिल्ली : वित्त मंत्रालाय ने सोवरेन गोल्ड बांडस (एसजीबी) की चौथी श्रृंखला की घोषणा कर दी है और यह आम नागरिकों और संस्थागत निवेशकों के लिए 18 से 22 जुलाई तक खुली रहेगी। एसजीबी योजना का यह चौथा चरण वित्तीय वर्ष 2016-17 की पहली श्रृंखला है। पिछले सप्ताह सोने के औसत मूल्य के आधार पर चौथी श्रृंखला के लिए प्रति ग्राम सोने का मूल्य 3119 रुपये निर्धारित किया गया है।
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नई दिल्ली : ब्रिटेन में हुए जनमत संग्रह पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि ‘ब्रेक्जिट’ से उत्पन्न लघु और मध्यम परिणामों से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है। सरकार अपने व्यापक आर्थिक ढांचे के स्थायित्व को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और राजकोषीय अनुशासन तथा मुद्रास्फीति में गिरावट के साथ देश का आर्थिक ढांचा बहुत ही सामान्य स्थिति में है।
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नेपल्स : करीब 70 फीसदी भारतीय युवा अपने मोबाइल पर खरीदारी करते हैं और 33 फीसदी मोबाइल 'अल्टरनेटिव' (वैकल्पिक) भुगतान का उपयोग करते हैं।
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नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) व्यवस्था को मौलिक रूप से उदार बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया। नवंबर 2015 में घोषित किए गए प्रमुख बदलावों के बाद यह दूसरा बड़ा सुधार है। एक छोटी सी प्रतिबंधित सूची के अतिरिक्त अब ज्यादातर क्षेत्र स्वतः स्वीकृति मार्ग के तहत आंएगे। इन परिर्वतनों के साथ ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में भारत विश्व की सबसे बड़ी उदार अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
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छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के सोगादा गांव को प्रकृति ने बहुत सुंदर बनाया है। यह गांव पहाड़ियों से घिरा है। लेकिन, पहाड़ियों से घिरा होना इस गांव के लोगों के लिए परेशानियों का सबब भी है। इस विषय में गांव की रोशनी बाई से पूछिए। इस गांव के सबसे पास का बैंक 15 किलोमीटर दूर है और इस वजह से यहां तक बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच नहीं थी। आजादी के बाद से सरकारें आती-जाती रहीं लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा कि रोशनी बाई को बैंकिंग व्यवस्था के अंदर कैसे लाया जाए, ताकि खुद की तरक्की के साथ राष्ट्र निर्माण में वह भी अपना योगदान निभा सके।
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