कृषि / व्यापार / बचत

सिंचाई क्षेत्र में छह दशकों के निवेश के बावजूद सुनिश्चित सिंचाई के तहत 142 मिलियन हेक्‍टयेर कृषि भूमि में से केवल 45 प्रतिशत ही कवर हो पाई है। हाल ही में शुरू हुई प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) ‘हर खेत को पानी’ देने पर ध्‍यान केन्द्रित करने की दिशा में एक सही कदम है। इसके अंतर्गत मूल स्‍थान पर जल संरक्षण के जरिए किफायती लागत और बांध आधारित बड़ी परियोजनाओं पर भी ध्‍यान दिया जाएगा। (Read in English)

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नई दिल्ली : 8 नवंबर के बाद से प्रभावी 500 एवं 1000 रुपये के उच्च मूल्य वाले बैंक नोटों की वर्तमान सीरीज के निरस्तीकरण के समय प्रथम 72 घंटों के लिए कुछ खास लेन-देन के लिए छूट प्रदान की गई थी, जिससे कि आम जनता को कम से कम असुविधा हो। इसके बाद विभिन्न हलकों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर छूट के दायरे में कुछ और लेन-देनों को शामिल किया गया।

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नई दिल्ली : उरी हमला मामले पर चीन द्वारा पाकिस्तान का समर्थन किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर चले दिवाली पर चीनी वस्तुओं की खरीदी न करने के जबरदस्त अभियान के कारण इस वर्ष दिवाली पर चीनी सामान की बिक्री में गत वर्षों के मुकाबले लगभग 60 प्रतिशत की गिरावट हुई है। इस बार न केवल आम लोगों ने बल्कि व्यापारियों ने भी चीनी सामान बेचने के प्रति कोई उत्साह नहीं दिखाया। इस वजह से घरेलू सामान को ज्यादा इस्तेमाल में लाने की भावना को भी बल मिला है। (Read in English)

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देशभर से 2,950 प्रदर्शक, 1,90,000 वर्ग मीटर क्षेत्र, 110 देशों के 5,000 से अधिक खरीदार, 450 से अधिक खरीद एजेंट, 2,000 से अधिक उत्पाद, होम, लाइफस्टाइल, फैशन एवं टेक्सटाइल के स्टाइल एवं डिजाइन जैसी विशिष्ट विशेषताओं से लबरेज 42वें आईएचजीएफ- दिल्ली मेला शरद 2016 का आयोजन हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद के तत्वाधान में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में 14-18 अक्टूबर 2016 तक किया गया।

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राजस्थान जैतून के अग्रणी उत्पादक के रूप में उभरकर सामने आया है। राजस्थान में 182 हेक्टेयर सरकारी कृषि क्षेत्रों के अतिरिक्त किसानों के 425.18 हेक्टेयर खेतों में जैतून की खेती की जा रही है। साल 2013 से 2016 तक राज्य में कुल 11574.09 किलोग्राम जैतून के तेल का उत्पादन किया गया है। 

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केन्द्र एवं राजस्थान सरकार के प्रयासों और वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों की मदद से राजस्थान के किसान पारंपरिक खेती के तरीकों के साथ-साथ आधुनिक कृषि के युग में प्रवेश कर रहे है। फलस्वरूप राजस्थान में जैतून, जोजोबा (होहोबा), खजूर जैसी वाणिज्यिक फसलें भी होने लगी है।

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