मनोरंजन

सफल अभिनेता और संगीत निर्देशक सी. रामचंद्र एक संपूर्ण कलाकार थे। जीवन के कलाकार। चाहे आम भारतीय फिल्मों का दर्द हो या हल्ला-हंगामा सी. रामचंद्र अपने प्रयोगों और रचनाधर्मिता में हमेशा कलात्मक रहे।  

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राजा के पलंग के चारों पाये कठपुतलियों की आकार में ढले थे। पूर्णमासी की रात को जादूगर के निर्देशन वाली छड़ी घुमाते ही कठपुतलियां नाच उठतीं। निर्देशानुसार बोलने लगतीं, गाने लगतीं, हँसने और रोने लगतीं।

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सच! उनकी उड़ती हुई रेशमी जुल्फें देख कंवारियों का दिल मचल जाता होगा। उनके अंदाज और अभिनय का कायल हर युवक देवदास और हर बाला पारो बन प्रेम रस में डूब जाना चाहती होगी। उनकी कहानियां, सिनेमाई अफसाने दोहराए गए।  

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अमोल पालेकर... कह सकते हैं अनमोल पालेकर। कला की बहुरंगी छवि। थिएटर और सिनेमा के मार्फ़त जीवन की सुंदरता रचता कलाकार। वह अचानक ही फिल्मों में आ गए। थियेटर उनका पहला सपना और पहली पसंद था।      

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दमदम, कलकत्ता की ‘द ग्रामोफोन कंपनी’ की फैक्ट्री में पहला ग्रामोफोन रिकॉर्ड बजाया गया। यह एक काला डिस्क था जिसके ऊपर लिखा था- ‘हिज मास्टर्स वॉइस’। यह रिकॉर्ड एक दूसरी इकाई के साथ जिसकी एक पतली सुई डिस्क के साथ मिलती थी, बजाया गया और एक मानवीय ध्वनि गूंज उठी, जो गा रही थी।      

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‘साहब, बीवी और गैंगस्टर’ और ‘प्रेममयी’ जैसी फिल्मों में अपनी एक्टिंग के जौहर दिखा चुकी बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रेया नारायण इन दिनों हास्य किरदारों को ज्यादा तवज्जो दे रही हैं और उनका मानना है कि कॉमेडी फिल्मों को ही दर्शक ज्यादा पसंद करते हैं।

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