स्वास्थ्य

प्रत्येक बच्चे को जीवन के शुरुआती वर्षों में उचित शारीरिक वृद्धि और विकास के लिए पर्याप्त पोषण, उचित देखभाल, प्यार और स्नेह की जरूरत होती है। स्तनपान न केवल शिशुकाल/ बचपन के दौरान बल्कि बाद के वर्षों में भी उसके स्वस्थ जीवन की नींव रखता है।

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एक अनुमान के अनुसार भारत में हर वर्ष 1.36 मि‍लि‍यन बच्‍चों की मौत होती है और उनमें से दो लाख बच्‍चों की मृत्‍यु डायरि‍या के कारण होती है। हालांकि, प्रति‍रक्षण और अन्‍य बाल स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल सेवाओं में सुधार के कारण भारत में शि‍शु मृत्‍यु दर (आईएमआर) और पांच वर्ष से कम आयु के शि‍शु की मृत्‍यु दर (यू5एमआर) में नि‍रंतर कमी आ रही है। डब्‍ल्‍यूएचओ के 2012 के आंकड़ों के अनुसार, प्रत्‍येक वर्ष पांच वर्ष से कम आयु के शि‍शुओं की मृत्‍यु में 11 प्रति‍शत मृत्‍यु डायरि‍या के कारण होती है।

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नई दिल्ली : केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य और परि‍वार कल्‍याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने राजधानी के सफदरजंग अस्‍पताल के डॉक्‍टरों और अधि‍कारि‍यों से कहा कि कि‍सी डॉक्‍टर की सफलता यह सुनि‍श्‍चि‍त करने में है कि ठीक होने के बाद कोई मरीज अस्‍पताल में वापस लौटकर न आए और इसके लि‍ए डॉक्‍टरों को चाहि‍ए कि वह मरीजों को ऐसे रहन-सहन के लि‍ए शि‍क्षि‍त करें ताकि वह दोबारा बीमार होने से बच सकें।

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उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद जिले के भैसियां गांव में अप्रैल के अंतिम सप्ताह के दौरान नियमित रूप से आयोजित होने वाले टीकाकरण अभियान से एक दिन पहले 20 वर्ष की मुस्लिम महिला नूरजहां गांव की आंगनवाड़ी में युवा माताओं के साथ बैठक कर रही हैं। समुदाय से जुड़े होने के नाते नूरजहां माताओं के साथ आसानी से संवाद कायम कर लेती हैं। आज उनका जोर नवजात शिशुओं और पांच वर्ष तक के बच्चों के लिए नियमित टीकाकरण की महत्ता पर है। नूरजहां अधिक साफ-सफाई पर भी जोर देती हैं। माताएं अपनी गोद में बच्चे लिए ध्यान से नूरजहां की बातें सुनती हैं। बाद में पूछे जाने पर निरक्षर और अर्ध साक्षर माताएं विश्वासपूर्वक यह बताती हैं कि टीकाकरण क्यों जरूरी है, नवजातों तथा गर्भवती महिलाओं के लिए इसका क्या महत्व है। नूरजहां पहले पल्स पोलियो अभियान में स्वयंसेवी के रूप में काम करती थीं और बाद में उन्हें कम्यूनिटी मोबिलाइजेशन को-ऑर्डिनेटर (सीएमसी) बनाया गया है।

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उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के भद्वसियां गांव में अप्रैल के अंतिम सप्ताह में नियमित रूप से आयोजित होने वाले प्रतिरक्षण अभियान से एक दिन पहले 120 वर्ष की मुस्लिम महिला नूरजहां गांव के आंगनवाड़ी में युवा माताओं के साथ बैठक कर रही हैं। समुदाय से जुड़े होने के नाते नूरजहां माताओं के साथ आसानी से संवाद कायम कर लेती हैं। आज उनका जोर नवजात शिशुओं और पांच वर्ष तक के बच्चों की नियमित प्रतिरक्षण की महत्ता पर है। नूरजहां स्वास्थ्य और साफ-सफाई की जरूरत पर भी जोर देती हैं। माताएं कुछ अपनी गोद में बच्चे लिए ध्यान से नूरजहां की बातें सुनती हैं। बाद में पूछे जाने पर निरक्षर और अर्द्ध साक्षर माताएं विश्वासपूर्वक यह बताती हैं कि प्रतिरक्षण क्यों जरूरी है और नवजातों तथा गर्भवती महिलाओं के लिए इसका क्या महत्व है। नूरजहां पहले पल्स पोलियो अभियान में स्वयंसेवी के रूप में काम करती थीं और बाद में उन्हें कम्युनिटी मोबिलाइरकेशन को-आर्डिनेटर (सीएमसी) बनाया जाता है।

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बच्चों के लिए सेक्स एजुकेशन की जरूरत पर कई बहसें होती रही हैं। समाज में एक वर्ग इसे बहुत जरूरी तो दूसरा वर्ग इसे गैर जरूरी मानता रहा है। भारत में परंपरावादी सामाजिक व्यवस्था के दबदबे के चलते परिवारों में सेक्स एजुकेशन से जुड़ी बातें करने से परहेज करने का चलन रहा है। कई वरिष्ठ डॉक्टर और मनोचिकित्सकों से बातचीत के आधार पर मीडियाभारती.इन की संपादकीय टीम ने एक सवाल-जवाब तैयार किया है। इसके जरिए कई मुश्किल सवालों के आसान जवाब ढूढने की कोशिश की गई है... 

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